पटना हॉस्टल कांड: NEET छात्रा मौत मामले में सीएम नीतीश ने CBI जांच की सिफारिश, सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा की मौत मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने CBI जांच की सिफारिश की है। 17 दिन की SIT जांच पर सवाल, FSL रिपोर्ट में स्पर्म मिलने से मामला और गंभीर।
- परिजनों के आरोपों के बीच बिहार सरकार ने केंद्र से मांगी CBI जांच
- 150 से अधिक लोगों के बयान, 22 की पुलिस जांच बेनतीजा
- फोरेंसिक रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत, पुलिस थ्योरी बदली
पटना(Threesocieties.com Desk)। बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में अब जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पूरे मामले की CBI जांच की सिफारिश केंद्र सरकार से कर दी है। इस बात की आधिकारिक जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के जरिए दी।
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी ने भारत सरकार से पटना में हुए NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को CBI से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) January 31, 2026
सम्राट चौधरी ने लिखा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में हुई NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या 14/26) को CBI से जांच कराने का आग्रह किया है, ताकि घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन हो सके।
17 दिन की जांच पर उठे सवाल
इस मामले में बिहार पुलिस द्वारा गठित SIT (विशेष जांच टीम) करीब 17 दिनों तक जांच करने के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वहीं, मृत छात्रा के परिजनों ने लगातार SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और निष्पक्ष जांच नहीं होने का आरोप लगाया।
DGP से मुलाकात के बाद भड़का परिवार
शुक्रवार को पीड़िता की मां, भाई और मामा ने DGP विनय कुमार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद परिजन बेहद नाराज नजर आए। परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह कहने का दबाव बनाया गया कि रेप नहीं हुआ, यह आत्महत्या का मामला है।
पीड़िता की मां ने यहां तक कह दिया कि “पुलिस बिक चुकी है और यहां न्याय की उम्मीद नहीं है।”
FSL रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
इस मामले में FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) की रिपोर्ट ने जांच को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार:
छात्रा के अंतःवस्त्र से पुरुष स्पर्म के अवशेष मिले हैं
स्पर्म की उम्र 18 से 21 वर्ष के युवक की बताई जा रही है
अब तक 30 से अधिक लोगों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की संभावना से इनकार नहीं किया गया
शरीर पर खरोंच और ब्रूज के निशान पाए गए हैं
आधी रात तक चला हाई लेवल मंथन
शुक्रवार देर रात पुलिस मुख्यालय में हाई लेवल बैठक हुई, जहां DGP विनय कुमार ने SIT की जांच रिपोर्ट को क्रॉस-एग्जामिनेशन स्टाइल में परखा।आईजी सेंट्रल रेंज जितेंद्र राणा की निगरानी में बनी SIT डिजिटल और कागजी सबूतों से भरे काले बैग के साथ मुख्यालय पहुंची थी।
PMCH पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या?
PMCH के डॉक्टरों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में छात्रा के शरीर पर कई जगहों पर इंजरी और ब्रूज का जिक्र किया गया, हालांकि एज ऑफ इंजरी स्पष्ट नहीं की गई। यह भी सामने आया कि छात्रा को आधे बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था।
अब CBI करेगी फ्रेश जांच
राज्य सरकार की सिफारिश के बाद संभावना है कि CBI नया केस दर्ज कर स्वतंत्र जांच करेगी। हालांकि, मृतका के परिजनों ने अब तक लिखित रूप से CBI जांच की मांग नहीं की थी, लेकिन सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया।
150 से अधिक लोगों के बयान, 22 की पुलिस जांच बेनतीजा,फोरेंसिक रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत, पुलिस थ्योरी बदली
छह जनवरी को चित्रगुप्त नगर के गर्ल्स हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली नीट की तैयारी करने वाली छात्रा की मौत के मामले में पटना पुलिस की 22 दिनों की जांच कहीं नहीं पहुंची। सात सदस्यीयएसआईटी टीम में 35 से अधिक तेजतर्रार पदाधिकारी से लेकर पुलिसकर्मी लगाए गए, फिर भी पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद भी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला। पुलिस की जांच खुद ही सवालों के घेरे में उलझी हुई है। इस मामले जो एक गिरफ्तारी हुई थी, मकान मालिक की हुई, जिसे सिर्फ इस वजह से से जेल भेजा गया कि साक्ष्य न मिटे और अनुसंधान प्रभावित ना हो। इसके अलावा किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
बेहोशी की हालत नमें मिली थी छात्रा
छह जनवरी को छात्रा को हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली। उसे तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। स्वजन ने शुरू से ही आशंका जताई कि बेटी के साथ मारपीट या यौन हिंसा हुई। पुलिस ने 9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में केस दर्ज किया, लेकिन शुरुआती जांच में लापरवाही साफ दिखी। एएसपी ने महिला चिकित्सक के बयान के आधार पर यौन हिंसा की पुष्टि नहीं होने की बात कही, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट उस समय आई ही नहीं थी। यह बयान झुलसाने वाला साबित हुआ। मामले ने तूल पकड़ा तो 16 जनवरी को डीजीपी के निर्देश पर एसपी पूर्वी के नेतृत्व में सात सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।
मोबाइल में सर्च की गूगल हिस्ट्री
चित्रगुप्त नगर थानेदार को टीम से बाहर रखा गया, क्योंकि स्वजन पहले से उन पर सवाल उठा रहे थे। एसआईटी ने दावा किया कि जांच तेजी से किया जा रहा है। छात्रा के उपचार वाले अस्पताल से लेकर यूरिन सैंपल में मिली नींद की गोली का सोर्स खोजा गया। दवा किस दुकान से खरीदी गई, यह पता चला। छात्रा के मोबाइल की गूगल सर्च हिस्ट्री में 'सुसाइड' और 'नींद की दवा' के सर्च मिले। ट्रैवल हिस्ट्री जांचने को हॉस्टल से पटना जंक्शन और जहानाबाद तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। 150 से अधिक लोगों के बयान लिए गए, 80 से ज्यादा जगहों पर कैमरा फुटेज देखे गए।
पुलिस ने दावा किया कि दवा खरीदने वाली दुकान तक पहुंच चुके हैं, लेकिन असली झटका फारेंसिक रिपोर्ट से लगा। 25 जनवरी को बायोलाजिकल जांच में अंतर्वस्त्र पर मानव स्पर्म के अवशेष मिले। यह रिपोर्ट पुलिस की पूरी जांच पर सवालिया निशान लगा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कहा गया कि यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, फिर भी शुरुआती बयान गलत साबित हुए। पुलिस की पूरी थ्योरी ही बदल गई। पुलिस बैकफुट पर चली गई और स्थिति यह हो गई कि इस मामले में पुलिस बयान देने में भी बचने लगी।
स्पर्म का डीएनए प्रोफाइल तैयार
इसके 25 जनवरी की रात चित्रगुप्त नगर थानेदार और कदमकुआं के अपर थानेदार को निलंबित कर दिया गया। एफएसएल ने स्पर्म का डीएनए प्रोफाइल तैयार किया। पुलिस ने 25 संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए और मिलान के लिए भेजे। फिर भी कोई अरेस्ट नहीं, कोई आरोपी नहीं पकड़ा गया। पुलिस की यह लचर जांच कई सवाल छोड़ गई। ट्रैवल हिस्ट्री में जहानाबाद का लिंक क्यों उभरा, लेकिन कोई ठोस लीड क्यों नहीं मिली? बच्ची से यौन हिंसा की घटना कब और कहाँ हुई, आरोपित कौन है, यह सवाल आज भी बना हुआ है। शुरुआती जांच में इनकार से लेकर निलंबन तक, हर कदम पर लापरवाही झलकी। 22 दिनों की जांच, अफसर लगे, लेकिन नतीजा शून्य रहा। परिवार न्याय की आस में है। क्या सीबीआई इस पहेली को सुलझाएगी? अब यह सवाल बना है।






