Suresh Singh Murder Case: धनबाद में फिर फिसली पुलिस! 15 साल से फरार शशि सिंह पर दबिश बेअसर

धनबाद के चर्चित सुरेश सिंह हत्याकांड में 15 साल से फरार मुख्य आरोपी शशि सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी की, लेकिन एक बार फिर वह हाथ नहीं लगा। जानिए पूरे केस की कहानी।

Suresh Singh Murder Case: धनबाद में फिर फिसली पुलिस! 15 साल से फरार शशि सिंह पर दबिश बेअसर
सुरेश सिंह - शशि सिंह (फाइल फोटो)।
  • कोल किंग’ मर्डर केस अब भी अधूरा

धनबाद (Threesocieties.com Desk): Suresh Singh Murder Case में एक बार फिर धनबाद पुलिस को मायूसी हाथ लगी है। 15 साल से फरार मुख्य आरोपी शशि सिंह की गिरफ्तारी के लिए बुधवार देर रात कोलाकुसमा स्थित उसके आवास पृथ्वी मेंशन में छापेमारी की गई, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया।

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रात करीब 1:30 बजे सरायढेला समेत कई थाना क्षेत्रों की पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश दी। घर का मुख्य दरवाजा बंद मिला, जिसे खुलवाकर पुलिस ने पूरे परिसर की सघन तलाशी ली। घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बावजूद शशि सिंह का कोई सुराग नहीं मिला।

पुलिस के पहुंचने से पहले निकल गया आरोपी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सूचना पुख्ता थी कि शशि सिंह घर पर मौजूद है, लेकिन छापेमारी से ठीक पहले ही वह निकल गया। यह पहली बार नहीं है जब पुलिस उसके करीब पहुंची और वह हाथ से निकल गया। पिछले 15 वर्षों में कई बार ऐसे मौके आए, लेकिन हर बार पुलिस को नाकामी ही मिली।

 50 हजार का इनामी, फिर भी गिरफ्त से दूर

शशि सिंह पर झारखंड पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट, इश्तेहार और कुर्की तक की कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद न तो उसने सरेंडर किया और न ही पुलिस उसे पकड़ पाई।

15 साल में बदल गए कई अफसर, नतीजा शून्य

इस हाई-प्रोफाइल केस में अब तक कई एसपी, एसएसपी, सिटी एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर बदल चुके हैं। बावजूद इसके मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। जांच अधिकारी भी कई बार बदले गए, लेकिन केस की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

 क्या है पूरा मामला (Flashback)

7 दिसंबर 2011 की रात धनबाद क्लब में आयोजित एक रिसेप्शन पार्टी के दौरान कोयला कारोबारी और कांग्रेस नेता सुरेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि पार्टी में हुई बहस के बाद शशि सिंह ने गुस्से में पिस्टल निकालकर सैकड़ों लोगों के सामने सुरेश सिंह को गोली मार दी और मौके से फरार हो गया। इस मामले में सुरेश सिंह के पिता तेजनारायण सिंह के बयान पर धनबाद थाना कांड संख्या 994/11 दर्ज किया गया था, जिसमें शशि सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

बाकी आरोपी सरेंडर, मुख्य आरोपी अब भी फरार

मामले में नामजद अन्य आरोपी—मोनू सिंह, आलोक वर्मा और प्रमोद लाला—बाद में कोर्ट में सरेंडर कर बेल पर बाहर हैं। लेकिन मुख्य आरोपी शशि सिंह अब भी फरार है और पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 राजनीतिक पकड़ भी बनी चर्चा

शशि सिंह का परिवार धनबाद और यूपी के बलिया में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखता है। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी में देरी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

 दो बार हाईकोर्ट का सख्त आदेश

रांची हाईकोर्ट भी इस मामले में दो बार धनबाद पुलिस को शशि सिंह की गिरफ्तारी का सख्त आदेश दे चुका है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है।

कब तक पकड़ से दूर रहेगा शशि?

15 साल बाद भी इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस का मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हर छापेमारी के बाद वही सवाल खड़ा होता है—क्या शशि सिंह कभी पकड़ा जाएगा या यह केस हमेशा अधूरा ही रहेगा? ·

सुरेश सिंह की मर्डर के 14 साल पांच माह में, मुख्य आरोपी शशि को नहीं खोज सकी पुलिस

पांच SP व छह SSP भी 50 हजार के इनामी शशि सिंह को नहीं पकड़ पाये

चार सिटी एसपी रुरल एसपी, सात डीएसपी व नौ इंस्पेक्टर की नजर से भी दूर है शशि

 कोल किंग के नाम से फेमस धनबाद जिला कांग्रेस के कैशियर सुरेश सिंह की मर्डर के 14 साल पांच माह बाद भी पुलिस मुख्य आरोपी शशि सिंह को नहीं पकड़ पायी है। जिले में 11 साल में पांच एसपी व छह एसएसपी आये लेकिन आरोपी शशि सिंह को नहीं खोज सके। पुलिस शशि सिंह पर 50 हजार का इनाम घोषित कर रखी है। रामधीर, संजीव व शशि के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआआर तेजनारायण सिंह रामधीर सिंह, संजीव सिंह व शशि सिंह (सिेंह मैंशन) के खिलाफ अपने बेटे की मर्डर करने की एफआइआर दर्ज करायी थी। पुलिस अनुसंधान में शशि के अलावा उसके करीबी मोनू सिंह, आलोक वर्मा, प्रमोद लाला समेत चार लोगों की संलिप्ता सामने आयी। एक अन्य आरोपी छपरा जिला निवासी मनोज सिंह को भी पुलिस अभी तक पकड़ नहीं पायी है।

एक फरार आरोपी का सत्यापन भी नहीं हो पाया

पुलिस रिकार्ड में मनोज अभी असत्यापित है। पुलिस इन्विस्टीगेशन में संजीव रामधीर के खिलाफ एविडेंस नहीं मिला था। लगभग पांच माह के इन्विस्टीगेशन के बाद वर्ष 2012 की 20 मई को पुलिस ने शशि सिंह, प्रमोद लाला, मोनू सिंह, आलोक वर्मा को फरार दिखाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दिया था। चारों फरार आरोपियों की हुई थी कुर्की पुलिस चारों फरार आरोपियों की कर्की-जब्ती की थी। बारी-बारी से मोनू सिंह, आलोक वर्मा, प्रमोद लाला कोर्ट में सरेंडर कर बेल पर है। 11 साल में पुलिस शशि को पकड़ नहीं पाई है। फरारी के दौरान शशि ने शादी रचाई। तीन-तीन बच्चे का पिता बना। वाइफ आसनी सिंह को यूपी के बलिया जिले के दोआबा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया। बावजूद शशि को पुलिस नहीं पकड़ पायी।

रांची हाईकोर्ट दो बार आदेश दे चुकी है आदेश

शशि सिंह को अरेस्ट करने के लिए रांची हाईकोर्ट अबतक दो बार आदेश दे चुकी है। हाईकोर्ट ने 16 मई 2016 को दूसरी बार धनबाद पुलिस को शशि को अरेस्ट करने का सख्त आदेश दिया था। 20 दिसंबर 2011 को उसके खिलाफ इश्तेहार निकला था। 23 जनवरी 2012 को कुर्की जारी किया गया। वारंट, इश्तेहार व कुर्की के बावजूद शशि ने न तो कोर्ट में सरेंडर किया और न ही पुलिस उसे पकड़ पाई। 10-10 पुलिस कप्तान बदल गये सुरेश सिंह की मर्डर के समय रविकांत धान धनबाद एसपी थे। श्री धान के बाद जतिन नरवाल, अनूप टी मैथ्यू, हेमंत टोप्पो व राकेश बसंल जिले के एसपी बने। इसके बाद धनबाद जिला को अपग्रेड कर एसएसपी, सिटी एसपी व रुरल एसपी का पोस्ट स्वीकृत किया गया। सुरेंद्र कुमार झा एसएसपी बने, उनके बाद मनोज रतन चोथे, किशोर कौशल, अखिलेश बी वारियर, असीम विक्रांत मिंज, संजीव कुमार व हुरदीप पी जनार्दनन धनबाद के एसएसपी रहे हैं। 11 माह से से प्कुरभातमार एसएसपी हैं लेकिन शशि का पता नहीं चल पाया। केस के आधा दर्जन से अधिक आइओ भी बदल चुके हैं। वर्ष 2016 से अब तक धनबाद में सिटी व रुरल एसपी के रुप में 12 आईपीएस आये-गये लेकिन शशि को खोज नहीं सके।

धनबाद और यूपी के बलिया में शशि किसी परिचय का मोहताज नहीं

पुलिस रिकार्ड में मोस्ट वांटेड शशि सिंह कोयला राजधानी धनबाद और यूपी के बलिया में शशि किसी परिचय का मोहताज नहीं है। झारखंड पुलिस ने शशि सिंह के सिर पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। राजनीतिक रूप से शशि का परिवार काफी मजबूत है। शशि झरिया के चर्चित MLA दिवंगत सूरजदेव सिंह के भतीजे हैं। शशि के पिता रामधीर सिंह भी यूपी के बलिया जिला परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। फिलहाल धनबाद के विनोद सिंह मर्डर केस में उम्र कैद की सजा के बाद रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार में बंद हैं। शशि की मां इंदु देवी धनबाद नगर निगम की मेयर रह चुकी हैं। राजनीतिक रूप से शशि का फैमिली काफी मजबूत है। शशि की चाची सह मौसी कुंती देवी दो-दो बार झरिया की एमएलए रह चुकी हैं। शशि के चचेरे भाई संजीव सिंह भी झरिया से बीजेपी एमएलए रह चुके हैं। संजीव अभी धनबाद के मेयर हैं। संजीव की वाइफ झरिया की विधायक हैं। शशि की मां इंदू देवी भी मेयर चुनाव लड़ी थी लेकिनस्थान पर रही।. शशि के चचेरे भाई नीरज सिंह की वाइफ पूर्णिमा नीरज सिंह झरिया से कांग्रेस की एमएलए रही हैं।

शशि सिंह का फिलहाल नहीं होगा सरेंडर

झारखंड पुलिस का मोस्ट वांटेड शशि सिंह के फिलहाल धनबाद कोर्ट में सरेंडर करने की योजना नहीं है। धनबाद क्लब में सात दिसंबर, 2011 की रात धनबाद क्लब में सैकड़ों लोगों के सामने शशि ने कोल किंग सुरेश सिंह की मर्डर कर दी थी। इसके बाद से पुलिस शशि के पीछे पड़ी है। इनाम भी घोषित है। बावजूद 11 साल में पुलिस पकड़ नहीं पाई। इस दौरान शशि ने शादी रचाई। तीन-तीन बच्चे पैदा किए। वाइफ आसनी सिंह को यूपी के बलिया जिले के दोआबा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया। इतनी सक्रियता के बावजूद पुलिस शशि को पकड़ने में विफल साबित रही है। 2020 की सितंबर माह में झारखंड के धनबाद से लेकर यूपी के बलिया तक शशि के सरेंडर की चर्चा शुरू हुई है। यह चर्चा झरिया के एक्स एमएलए संजीव सिंह के भाई जनता मजदूर संघ के संयुक्त महामंत्री सिद्धार्थ गौतम के एक फेसबुक पोस्ट के बाद शुरू हुई थी।

फ्लैश बैक: सात दिसंबर 2011 को हुई थी सुरेश सिंह की हत्या

बनारस से लेकर कोलकाता की कोयला मंडियों में कोल किंग के नाम से मशहूर सुरेश सिंह को शशि सिंह ने सात दिसंबर, 2011 की रात धनबाद क्लब में गोली मार मर्डर कर दी। आरोप है कि नूनू सिंह के बेटे के रिशेप्शन में सुरेश सिंह ने सिंह मेंशन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मौके पर मौजूद यह शशि को नागवार गुजरा।शशि ने पिस्टल निकाल सुरेश को भून दिया। इस दौरान सैकड़ों लोग मूकदर्शक बने रहे। सुरेश के दर्जन भर प्राइवेट बॉडीगार्ड भी काठ बन गये थे। मर्डर करने के बाद शशि आराम से निकल गये। मर्डर के 11 साल बाद भी धनबाद पुलिस शशि को पकड़ नहीं पाई है। दो-दो बार झरिया विधानसभा कांग्रेस के टिकट पर लड़ा चुनाव लड़े थे सुरेश कोल बिजनस में कोयला राजधानी धनबाद ही नहीं कोलकाता से लेकर वाराणसी की कोयला मंडियों में कोल किंह सुरेश सिंह का सिक्का चलता था। धनबाद जिला कांग्रेस के कैशियर रहे सुरेश सिंह 2005 और 2009 में झरिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2009 में तीन हजार कुछ वोटों के अंतर से वह चुनाव हार गये थे। दोनों चुनाव में कुंती देवी ने उन्हें पराजित किया था।