बिहार में शराब माफिया का नया खेल! अब भूटान से मंगाई जा रही शराब, 150 की बोतल 1200 में बिक रही
बिहार के मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई 115 कार्टन विदेशी शराब जब्त हुई है। जांच में खुलासा हुआ कि शराब में पानी और जानलेवा स्पिरिट मिलाकर नकली ब्रांड रैपर के साथ 1200 रुपये तक में बेची जा रही थी। शराबबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नया नेटवर्क सामने आया है।
मुजफ्फरपुर(Threesocieties.com Desk): बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब माफिया लगातार नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। अब मामला केवल पड़ोसी राज्यों से तस्करी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। मुजफ्फरपुर में भूटान से तस्करी कर लाई गई विदेशी शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों और उत्पाद विभाग की चिंता बढ़ गई है।
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उत्पाद विभाग की छापेमारी में 115 कार्टन भूटान निर्मित विदेशी शराब जब्त की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि तस्कर शराब को भूटान से सीमा पार कर पश्चिम बंगाल लाए और फिर किशनगंज, फारबिसगंज, पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा फोरलेन के रास्ते मुजफ्फरपुर तक पहुंचाया गया।
अंतरराष्ट्रीय रूट से बिहार तक पहुंची शराब
जांच एजेंसियों के अनुसार, शराब की इस खेप को बेहद सुनियोजित तरीके से बिहार तक पहुंचाया गया। जांच अब उस वाहन और उसके मालिक की पहचान पर केंद्रित है, जिसके जरिए यह लंबी दूरी तय की गई। मामले में अहियापुर थाना क्षेत्र के तीन कथित शराब कारोबारियों—लखपत पासवान, सुशील झा और निखिल कुमार—के नाम सामने आए हैं। तीनों फरार बताए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही है।
150 रुपये की शराब को 1200 में बेचने का नेटवर्क
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भूटान जैसे टैक्स-फ्री देश से बेहद सस्ती कीमत पर शराब खरीदकर उसे बिहार में कई गुना कीमत पर बेचा जा रहा था। जांच में पता चला कि लगभग 150 रुपये कीमत वाली 750 एमएल शराब में पानी, रंग और खतरनाक स्पिरिट मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाती थी। इसके बाद बोतलों पर बड़े ब्रांड्स के नकली लेबल और रैपर लगाकर बाजार में 1200 रुपये प्रति बोतल तक बेचा जा रहा था।
नकली ब्रांडिंग के जरिए ग्राहकों को बनाया जा रहा शिकार
तस्कर कथित तौर पर नामी शराब ब्रांड्स के नकली स्टिकर, ढक्कन और रैपर का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं। इससे न केवल अवैध कारोबार फल-फूल रहा था, बल्कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही थी।
स्पिरिट मिलाकर बनाई जा रही ‘मौत की शराब’
विशेषज्ञों के अनुसार शराब में मिलाई जा रही स्पिरिट बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। रसायनशास्त्र विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिथाइल अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाए तो व्यक्ति की आंखों की रोशनी जा सकती है और अधिक मात्रा में सेवन मौत तक का कारण बन सकता है। यही कारण है कि इस तरह की मिलावटी शराब केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है।
टैक्स-फ्री राज्यों और देशों पर माफिया की नजर
उत्पाद विभाग का कहना है कि अब शराब माफिया केवल हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। अधिक मुनाफे के लिए टैक्स-फ्री क्षेत्रों और देशों से शराब लाने का ट्रेंड बढ़ रहा है। भूटान से शराब पकड़े जाने का यह मामला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शराब तस्करी का नेटवर्क पहले से कहीं अधिक संगठित और व्यापक हो चुका है।
बड़ा सवाल: शराबबंदी के बावजूद कैसे बढ़ रहा नेटवर्क?
मुजफ्फरपुर में पकड़ी गई यह खेप कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर इतनी लंबी दूरी तय कर विदेशी शराब बिहार तक कैसे पहुंच रही है? क्या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और स्थानीय सिंडिकेट मिलकर शराबबंदी को चुनौती दे रहे हैं? फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं, लेकिन इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि शराब माफिया के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।






