अब IG बनना आसान नहीं! IPS अफसरों के लिए 2 साल की सेंट्रल डेपुटेशन अनिवार्य, होम मिनिस्टरी का बड़ा फैसला

IPS अधिकारियों के लिए IG बनने के नियम बदले। 2011 बैच के बाद के अफसरों को अब 2 साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य। गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला।

अब IG बनना आसान नहीं! IPS अफसरों के लिए 2 साल की सेंट्रल डेपुटेशन अनिवार्य, होम मिनिस्टरी का बड़ा फैसला
2011 बैच और उसके बाद के IPS पर नियम लागू।

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk)।  भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के करियर प्रोफाइल और पदोन्नति प्रक्रिया में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए एक सख्त शर्त जोड़ दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आईजी (Inspector General) रैंक पर तैनाती के लिए अधिकारियों को कम से कम दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव होना अनिवार्य होगा।

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गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि यह नियम 2011 बैच और उसके बाद के सभी IPS अधिकारियों पर लागू होगा।

 IG बनने के लिए बदले नियम

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार: किसी भी IPS अधिकारी को केंद्र सरकार में IG या समकक्ष पद पर नियुक्त होने के लिए

SP या DIG रैंक पर न्यूनतम दो वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी करनी होगी

बिना केंद्रीय अनुभव के अब IG, ADG और DG जैसे शीर्ष पदों तक पहुंच आसान नहीं होगी

यह फैसला सीधे तौर पर उन अधिकारियों को प्रभावित करेगा जो अब तक केवल अपने कैडर राज्य में ही सेवा देना पसंद करते थे।

केंद्र में पद खाली, राज्यों से नहीं मिल रहे अफसर

गृह मंत्रालय के पत्र में यह भी स्वीकार किया गया है कि केंद्र सरकार के पास लंबे समय से IPS अधिकारियों की भारी कमी बनी हुई है।

SP स्तर के 229 स्वीकृत पदों में से 104 पद खाली

DIG स्तर के 256 पदों में से 69 पद रिक्त

राज्य सरकारें आमतौर पर DG और ADG स्तर के लिए नाम भेजती हैं, लेकिन SP और DIG स्तर पर पर्याप्त संख्या में अधिकारियों को केंद्र भेजने में रुचि नहीं दिखा रही हैं।

बदलनी होगी IPS अधिकारियों की रणनीति

मंत्रालय के इस आदेश के बाद अब 2011 और उसके बाद के बैच के IPS अधिकारियों को अपनी करियर रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। यदि कोई अधिकारी भविष्य में:

IG

ADG

या DGP

जैसे शीर्ष पदों पर पहुंचना चाहता है, तो उसे करियर के शुरुआती चरण में ही CBI, NIA, IB, CRPF, BSF या अन्य केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति लेनी होगी।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राज्यों से पुराना विवाद

गौरतलब है कि 2021 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने प्रस्ताव दिया था कि केंद्र सरकार को राज्यों की सहमति के बिना भी अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर बुलाने की शक्ति मिले। हालांकि:

कई राज्यों ने इसका कड़ा विरोध किया

संघीय ढांचे पर खतरे का हवाला दिया गया

अंततः यह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका

फिलहाल स्थिति यह है कि:

अधिकारी की स्वयं की सहमति

और राज्य सरकार की मंजूरी

दोनों अनिवार्य हैं।

निष्कर्ष

गृह मंत्रालय का यह फैसला न केवल IPS कैडर मैनेजमेंट को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य-केंद्र संबंधों और अफसरशाही की कार्यशैली में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखा जाना दिलचस्प होगा कि कितने अधिकारी केंद्र की राह पकड़ते हैं और कितने अपने कैडर में ही सीमित रह जाते हैं।