ममता बनर्जी को बड़ा झटका? TMC में टूट की चर्चा तेज, 16 सांसदों के फोन बंद; दिल्ली में बढ़ी सियासी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आने की चर्चा तेज है। TMC के कई सांसदों के बागी होने, फोन बंद होने और दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों के बीच ममता बनर्जी के सामने नए संकट की अटकलें लगाई जा रही हैं।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका? TMC में टूट की चर्चा तेज, 16 सांसदों के फोन बंद; दिल्ली में बढ़ी सियासी हलचल
TMC में ‘ऑपरेशन ब्रेक’?

    HighLights

  • TMC में 22 सांसदों के बागी होने की चर्चा ने बढ़ाई सियासी हलचल
  • कई सांसदों के फोन बंद होने से अटकलों का बाजार गर्म
  • दिल्ली में डेरा जमाए शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेताओं के बयान से बढ़ा सस्पेंस
  • दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई समर्थन जुटाने की चर्चा
  • अगले सप्ताह संसद में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना पर नजर

कोलकाता/नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक भूचाल की चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी खेमे की सक्रियता और लगातार बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संसदीय दल में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं और अगले कुछ दिनों में दिल्ली में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

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सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर करीब 22 सांसदों के एक अलग गुट के रूप में सामने आने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई सांसदों से संपर्क नहीं हो पाने और फोन बंद मिलने से राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया है।

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दिल्ली में बढ़ी गतिविधियां, शुभेंदु और बीजेपी नेताओं के बयान से बढ़ा सस्पेंस

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ विपक्षी नेता और बीजेपी के कई नेता इन दिनों दिल्ली में सक्रिय हैं। बीजेपी नेताओं के हालिया बयानों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। विपक्षी खेमे का दावा है कि TMC के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई सांसद नई राजनीतिक संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।

दलबदल कानून का गणित बना सबसे बड़ा सवाल

अगर संसदीय स्तर पर किसी बड़े विभाजन की कोशिश होती है तो दलबदल कानून सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी विभाजन को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए दो-तिहाई समर्थन आवश्यक माना जाता है। यही वजह है कि संख्या बल और सांसदों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

फोन बंद होने से बढ़ी चर्चा

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कई सांसदों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। सूत्रों का दावा है कि कई सांसदों के फोन लगातार बंद मिल रहे हैं, जिससे संभावित राजनीतिक बदलाव की अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

क्या अगले हफ्ते होगा बड़ा सियासी धमाका?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला सप्ताह पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि चर्चाएं सही साबित होती हैं तो इसका असर सिर्फ राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों और संभावित घटनाक्रम पर टिकी हुई है।