बिहार: BPSC पास कराने के नाम पर 40 लाख घूस कांड! महिला दारोगा, JDU नेता और डॉक्टर दंपती पर EOU की FIR

बिहार में BPSC परीक्षा पास कराने के नाम पर 40 लाख रुपये घूस लेने का बड़ा मामला सामने आया है। महिला दारोगा, उनके बेटे, JDU प्रदेश महासचिव और डॉक्टर दंपती के खिलाफ EOU ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानिए पूरा मामला।

बिहार: BPSC पास कराने के नाम पर 40 लाख घूस कांड! महिला दारोगा, JDU नेता और डॉक्टर दंपती पर EOU की FIR
आरोपी नेता डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार(फाइल फोटो)।

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की सेटिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अब एक नया सनसनीखेज मामला सामने आया है। पटना जिला बल में तैनात एक महिला दारोगा ने अपने बेटे को BPSC परीक्षा में पास कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के लिए कथित तौर पर 40 लाख रुपये की रिश्वत दी। लेकिन जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आया तो मामला थाने, अदालत और अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) तक पहुंच गया।

यह भी पढ़ें: ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा रहस्य, 8 दिन से मुर्दाघर में शव, पति फरार, CCTV और पोस्टमार्टम ने बढ़ाए सवाल

पूरा मामला सामने आने के बाद बिहार की राजनीति और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस केस में JDU के प्रदेश महासचिव और डॉक्टर दंपती सहित पांच लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

EOU ने पांच लोगों पर दर्ज की FIR

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए), 8 और 12 के तहत पटना जिला बल की सब-इंस्पेक्टर आशा सिंह, उनके बेटे रितेश कुमार उर्फ सोनू, डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, उनकी पत्नी डॉ. रजनी और उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार पहले RJD के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में JDU के प्रदेश महासचिव हैं।

40 लाख लेकर BPSC में सफलता दिलाने का दावा

प्राथमिकी के मुताबिक, पटना के कृष्णा डेंटल अस्पताल से जुड़े डॉक्टर दंपती ने रितेश कुमार को BPSC परीक्षा में सफलता दिलाने की गारंटी दी थी। इसके बदले 40 लाख रुपये नकद एडवांस लिए गए। हालांकि जब परीक्षा परिणाम आया तो रितेश का नाम मेरिट सूची में नहीं था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।

25 लाख का चेक बाउंस, फिर खुला पूरा खेल

आरोप है कि विवाद बढ़ने पर डॉक्टर दंपती ने 25 लाख रुपये लौटाने के लिए चेक दिया, लेकिन हस्ताक्षर मेल नहीं खाने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके अलावा बाकी 15 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया।

जक्कनपुर थाने में दर्ज हुआ धोखाधड़ी का केस

रितेश कुमार ने 21 जनवरी 2024 को पटना के जक्कनपुर थाने में डॉक्टर दंपती और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। पुलिस जांच के बाद जुलाई 2024 में तीनों आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।

पुराने पारिवारिक संबंधों से हुआ संपर्क

एफआईआर में बताया गया है कि आशा सिंह और डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार के परिवार के बीच पुराने संबंध थे। इसी दौरान रितेश की BPSC तैयारी की जानकारी मिलने पर संपर्क बढ़ा और कथित डील तय हुई।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई जांच

डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार ने अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ा सवाल उठाया कि आखिर 40 लाख रुपये नकद कहां से आए और इसकी जांच क्यों नहीं हुई। इसके बाद पटना पुलिस और EOU की जांच और तेज हो गई।

महिला दारोगा ने लोन और बचत का दिया हवाला

पूछताछ में महिला दारोगा आशा सिंह ने बताया कि उन्होंने SBI की मौर्यालोक शाखा से हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन और अपनी बचत से करीब 22 लाख रुपये बेटे को दिए थे। जांच एजेंसियां अब बाकी रकम के स्रोत की भी जांच कर रही हैं।

‘पिछले दरवाजे’ से नौकरी दिलाने की कोशिश!

पटना पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी पद पर रहते हुए भी महिला दारोगा ने अपने बेटे को कथित तौर पर ‘सेटिंग’ और ‘पिछले दरवाजे’ से नौकरी दिलाने की कोशिश की। अब EOU पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि क्या इस मामले में कोई बड़ा परीक्षा या भर्ती रैकेट सक्रिय था।

बिहार की राजनीति में मचा बवाल

मामले में JDU प्रदेश महासचिव का नाम सामने आने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष सरकार पर हमला बोल रहा है और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। EOU की जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।