चतरा: रेलवे निर्माण की आड़ में ‘मिट्टी माफिया’ का खेल! 11 एकड़ जमीन खोद डाली, FIR के बाद कंपनियों में हड़कंप

झारखंड के चतरा जिले के टंडवा में रेलवे लाइन और फुलवारिया स्टेशन निर्माण के नाम पर 11 एकड़ जमीन से अवैध खनन का बड़ा खुलासा हुआ है। FIR दर्ज होने के बाद निर्माण कंपनियों में हड़कंप मच गया है।

चतरा: रेलवे निर्माण की आड़ में ‘मिट्टी माफिया’ का खेल! 11 एकड़ जमीन खोद डाली, FIR के बाद कंपनियों में हड़कंप
रेलवे निर्माण के नाम पर ‘महा धांधली’।

चतरा (Threesocieties.com Desk): झारखंड के चतरा जिले के टंडवा क्षेत्र से रेलवे निर्माण परियोजना के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फुलवारिया रेलवे स्टेशन और लाइन निर्माण के दौरान करीब 11 एकड़ गैरमजरूआ और रैयती जमीन से अवैध मिट्टी व पत्थर की निकासी की पुष्टि हुई है।

यह भी पढ़ें:बंगाल और असम में जहां-जहां बाबूलाल मरांडी ने किया प्रचार, वहां खिला कमल! आदिवासी बेल्ट में BJP की जबरदस्त जीत

प्रशासनिक जांच के बाद मामला इतना गंभीर पाया गया कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ टंडवा थाना में FIR दर्ज कर दी गई है। इसके बाद निर्माण एजेंसियों और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है।

 जांच में क्या मिला?

उपायुक्त के निर्देश पर 30 अप्रैल को राजस्व टीम ने फुलवारिया और गोविंदपुर गांव में जांच की। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए— फुलवारिया (खाता 142, प्लॉट 349): 7.98 एकड़ गैरमजरूआ जमीन पर अवैध खनन किया गया है। गोविंदपुर (खाता 13, प्लॉट 85): करीब 3 एकड़ जमीन से भारी मिट्टी निकासी हुई है।  कई जगहों पर 14 से 32 फीट तक गहराई में खनन कियागया है। नदी किनारे से भी अवैध पत्थर निकासी हुई है। जांच में स्पष्ट हुआ कि यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से प्राकृतिक संसाधनों की लूट है।

कंपनियों को नोटिस, खनन पर तत्काल रोक

प्रशासन ने रेलवे निर्माण से जुड़ी कंपनियों— एरोकॉन, मिलिनियम, झांझरिया और रायल—को अवैध खनन तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। यह भी सामने आया कि पहले भी राजा कंस्ट्रक्शन कंपनी पर ऐसे ही मामले में करोड़ों का जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद दोबारा ऐसे मामलों का सामने आना प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े करता है।

किसानों की जमीन बर्बाद, नदी का अस्तित्व खतरे में

स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले को गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक संकट बताया है। मिश्रोल पंचायत के मुखिया सुवेश राम के अनुसार— जहां 2.5–3 फीट तक मिट्टी काटने की अनुमति होती है, वहां 10 फीट से अधिक खनन किया गया है।कई किसानों की जमीन अब खेती और निर्माण के लायक नहीं रही। केढ़नी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। भूदान में मिली जमीन भी पूरी तरह बर्बाद कर दी गई है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बड़ा सवाल: कौन जिम्मेदार?

यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है—

क्या प्रशासन की निगरानी में इतनी बड़ी लापरवाही हुई?
क्या कंपनियों को खुली छूट मिली हुई थी?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या रेलवे परियोजना के नाम पर संसाधनों की लूट हो रही है?