धनबाद मेयर चुनाव : BJP की मान-मनौव्वल बेअसर, संजीव सिंह नहीं माने, विधायक पत्नी रागिनी ने खोली नाराजगी की परतें
धनबाद मेयर चुनाव में भाजपा की मान-मनौव्वल नाकाम, संजीव सिंह चुनाव मैदान में डटे। विधायक पत्नी रागिनी सिंह ने पार्टी से नाराजगी की वजह बताई, संगठन पर भी उठाए सवाल।
- रागिनी सिंह बोलीं–‘आठ साल जेल में रहे पति संजीव सिंह, BJP ने नहीं ली सुध’
धनबाद (Threesocieties.com Desk)।धनबाद मेयर चुनाव को लेकर चल रहा सियासी सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति और झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने तमाम राजनीतिक दबाव और मान-मनौव्वल के बावजूद मेयर चुनाव से नाम वापस नहीं लिया। शुक्रवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होते ही यह साफ हो गया कि संजीव सिंह चुनावी मैदान में पूरी मजबूती के साथ डटे रहेंगे।
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संजीव सिंह के चुनाव मैदान में बने रहने से भाजपा के भीतर ही खलबली मच गई है। हालांकि झारखंड में नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहे हैं, इसके बावजूद भाजपा ने संजीव अग्रवाल को धनबाद मेयर का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। 4 फरवरी को संजीव अग्रवाल के नामांकन के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू की मौजूदगी ने पार्टी की गंभीरता भी दिखाई थी।
धनबाद से दिल्ली तक चला मान-मनौव्वल का दौर
संजीव सिंह ने 4 फरवरी को मेयर पद के लिए नामांकन किया था। इसके बाद प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक भाजपा में हलचल तेज हो गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे अरुण सिंह ने भी संजीव सिंह से फोन पर बात कर उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे।
शुक्रवार 6 फरवरी को नाम वापसी को लेकर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजरें संजीव सिंह पर टिकी थीं, लेकिन समय समाप्त होने तक उन्होंने अपना नाम वापस नहीं लिया। अब 23 फरवरी को मतदान होगा और धनबाद की राजनीति में मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
रागिनी सिंह ने खोली नाराजगी की वजह
गुरुवार को धनबाद जिला भाजपा कार्यालय में हुई कोर कमेटी की बैठक में विधायक रागिनी सिंह भी शामिल हुईं। बैठक में उन्होंने पति संजीव सिंह की नाराजगी के कारणों को खुलकर सामने रखा। रागिनी सिंह ने स्पष्ट कहा— “मेरे पति चुनाव लड़ रहे हैं, यह उनकी व्यक्तिगत लड़ाई है, लेकिन मैं भाजपा के साथ हूं।”
उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या मामले में संजीव सिंह को फंसाया गया, जिसके चलते वे आठ साल तक जेल में रहे। उस समय झारखंड में भाजपा की ही सरकार थी, वे भाजपा विधायक थे, लेकिन किसी बड़े नेता या मंत्री ने उनकी सुध नहीं ली, यहां तक कि जेल में मिलने तक नहीं गया।
जिला भाजपा संगठन पर भी उठे सवाल
रागिनी सिंह ने धनबाद भाजपा की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि “लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान जिन लोगों ने भाजपा के खिलाफ काम किया, उन्हें आज संगठन में पद और तव्वजों देकर सम्मानित किया जा रहा है।”
भाजपा सोर्सेज का कहना है कि रागिनी सिंह का इशारा बीजेपी के एक कथित प्रदेश स्तरीय नेता पर था। अपने बूथ पर एक सौ वोट नहीं दिलाने वाला यह नेता प्रदेश से लेकर जिला की राजनीति में विवाद खड़ा रहा है। धनबाद में वसूली करता है। एमपी व एक एमएलए समेत बीजेपी के वरीय नेताओं के खिलाफ विषपान करते रहता है। लोकसभा चुनाव में ढुलू महतो को टिकट मिलने पर नेताओं के बारे में अपमानजक भाषा का प्रयोग करता रहा।
बैठक में मौजूद पूर्व मंत्री अमर बाउरी, विधायक राज सिन्हा, विधायक शत्रुघ्न महतो, महानगर अध्यक्ष श्रवण राय, पूर्व जिलाध्यक्ष हरि प्रकाश लाटा सहित तमाम नेता रागिनी सिंह की बातें चुपचाप सुनते रहे।
भाजपा की रणनीति और संगठन की बैठक
इसी दिन धनबाद विधानसभा स्तरीय एक अहम बैठक विधायक राज सिन्हा के आवासीय कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी संजीव कुमार की जीत सुनिश्चित करना था। बैठक में चुनावी रणनीति, बूथ स्तर की तैयारी, जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई।पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने कहा कि भाजपा शुरू से ही नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर और ईवीएम से कराने की पक्षधर रही है, जबकि राज्य सरकार की मंशा लोकतांत्रिक नहीं रही।






