झारखंड: ED कोर्ट से हेमंत सोरेन को बड़ा झटका, जमीन घोटाला केस में डिस्चार्ज याचिका खारिज; अब चलेगा मुकदमा
रांची के चर्चित बड़गाई जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है। ED कोर्ट ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और अब उनके खिलाफ आरोप तय कर मुकदमा चलाया जाएगा।
HighLights
- ED कोर्ट ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज की
- 8.46 एकड़ बड़गाई जमीन घोटाला मामले में चलेगा मुकदमा
- कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के पर्याप्त आधार
- 140 पन्नों के फैसले में अदालत ने दी विस्तृत टिप्पणी
- हाई कोर्ट में फैसले को चुनौती देने का विकल्प खुला
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित बड़गाई जमीन घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है। ईडी की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ आरोप तय करने और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
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बरियातू रोड स्थित कथित 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े इस मामले में ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। इससे पहले 3 जून को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।अदालत ने लगभग 140 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और इस स्तर पर आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा जमीन घोटाला मामला?
यह मामला रांची के बड़गाई अंचल की चर्चित जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि यह जमीन अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए हासिल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत भी सामने आई है। ईडी के अनुसार, जांच के दौरान तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से कई मूल दस्तावेज और रजिस्टर बरामद हुए, जिनमें इस जमीन का उल्लेख मिला। एजेंसी का आरोप है कि पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही और जमीन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
हेमंत सोरेन ने क्या कहा था?
हेमंत सोरेन की ओर से अदालत में कहा गया कि उनका इस कथित अपराध से कोई संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि न तो जमीन रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज हुआ और न ही उनके नाम पर कोई कथित फर्जी दस्तावेज बना। लयाचिका में यह भी कहा गया कि ईडी जिन गवाहों के बयान पेश कर रही है, वे मुख्य रूप से सुनी-सुनाई बातों पर आधारित हैं। इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद अब अदालत अगले चरण में आरोप तय करेगी। इसके बाद ट्रायल की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
अब तक की बड़ी टाइमलाइन
• वर्ष 2024: बड़गाई जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई, बाद में जमानत मिली।
• 5 दिसंबर 2025: विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल की गई।
• 3 जून 2026: दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई।
• 8 जून 2026: अदालत ने डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जा रहे इस मामले पर अब सबकी नजर अगले कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी।
फ्लैश बैक
मामला रांची के बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि यह जमीन हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से कब्जाई थी। आरोप है कि सोरेन ने 2010-11 में मूल कब्जाधारियों को जबरन बेदखल कर यह जमीन हड़प ली और बाद में भू-राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें इसी जमीन का जिक्र था। ईडी के अनुसार, सोरेन के सहयोगी अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय से इस जमीन की वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए।
हेमंत सोरेन की ओर से कहा गया था कि यह जमीन कथित अपराध से जुड़ी नहीं है। 2010-11 में कब्जे की बात है, जबकि आरोपित भानु प्रताप प्रसाद 2019 में ही रांची पोस्टिंग पर आया। इस जमीन पर कोई फर्जीवाड़ा पूरा नहीं हुआ। न तो रजिस्टर में सोरेन का नाम दर्ज किया गया और न ही कोई जाली दस्तावेज उनके नाम से बना। ईडी ने जिन गवाहों के बयानों का हवाला दिया, वे सुनी सुनाई बातों पर आधारित हैं। इसलिए प्रार्थी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।






