धनबाद से पटना तक बढ़ा संजीव सिंह का सियासी दायरा! बिहार के मंत्रियों से मुलाकात के बाद तेज हुई चर्चाएं

धनबाद मेयर संजीव सिंह की बिहार में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता चर्चा में है। पटना में मंत्रियों से मुलाकात और लगातार बिहार दौरों के बाद कोयलांचल की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं।

धनबाद से पटना तक बढ़ा संजीव सिंह का सियासी दायरा! बिहार के मंत्रियों से मुलाकात के बाद तेज हुई चर्चाएं
आरा से पटना तक एक्टिव हुए संजीव सिंह।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के मेयर और सिंह मेंशन घराने के प्रमुख चेहरों में शामिल संजीव सिंह एक बार फिर अपने राजनीतिक कदमों को लेकर चर्चा में हैं। पटना दौरे के दौरान उन्होंने बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. अशोक चौधरी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान और पूर्णिया के कसबा विधानसभा क्षेत्र के विधायक निशांत सिंह से मुलाकात की। हालांकि इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन कोयलांचल की राजनीति में इस मुलाकात के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।

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संजीव सिंह ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि पटना में मंत्रियों के आवास पर शिष्टाचार मुलाकात हुई और विभिन्न समसामयिक तथा जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है?

क्या बिहार के बहाने कोयलांचल की राजनीति साधने की तैयारी?

धनबाद को लंबे समय से ‘मिनी बिहार’ कहा जाता रहा है। यहां बड़ी संख्या में बिहार मूल के लोगों का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सक्रियता बढ़ाकर संजीव सिंह कोयलांचल की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

राजनीतिक गलियारों में दो तरह की चर्चाएं हैं। पहली यह कि बिहार के जरिए कोयलांचल के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश हो रही है। दूसरी चर्चा यह कि क्या सिंह मेंशन की नजर भविष्य में बिहार की राजनीति, खासकर आरा लोकसभा क्षेत्र की तरफ फिर से जा सकती है।

आरा दौरे के बाद बढ़ी चर्चाएं

हाल ही में संजीव सिंह बिहार के आरा पहुंचे थे, जहां उन्होंने ब्रह्मेश्वर मुखिया की पुण्यतिथि कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उस दौरान भी उनके बिहार दौरे ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया था। अब पटना में मंत्रियों से मुलाकात ने उन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।कोयलांचल में कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लगातार बिहार के दौरे केवल संयोग नहीं माने जा सकते। हालांकि संजीव सिंह की तरफ से अब तक इसे केवल सामाजिक और शिष्टाचार मुलाकात बताया गया है।

सिंह मेंशन और आरा का पुराना रिश्ता

वैसे देखा जाए तो सिंह मेंशन का बिहार, विशेषकर आरा से पुराना संबंध रहा है। संजीव सिंह के पिता और कोयलांचल की राजनीति के बड़े चेहरे रहे स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह ने भी आरा से लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव परिणाम आने से पहले उनका निधन हो गया था।पुराने राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उस समय आरा लोकसभा चुनाव में कोयलांचल से बड़ी संख्या में समर्थक और गाड़ियों के काफिले बिहार पहुंचे थे। यही वजह है कि जब भी सिंह मेंशन की बिहार में सक्रियता बढ़ती है, राजनीतिक चर्चाएं स्वतः शुरू हो जाती हैं।

जेल से वापसी के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

करीब आठ साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद साक्ष्य के अभाव में अदालत से बरी होकर बाहर आने के बाद संजीव सिंह ने तेजी से अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई। मेयर चुनाव जीतने के बाद से लगातार वे अपने जनसंपर्क, क्षेत्रीय विस्तार और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में लगे हुए हैं।

अब लगातार बिहार दौरों और बड़े नेताओं से मुलाकातों के बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में कोयलांचल की राजनीति में कोई नया समीकरण बनने वाला है, या फिर यह केवल सामाजिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कवायद भर है। फिलहाल, इन सवालों का जवाब भविष्य की राजनीति ही देगी।