मध्य प्रदेश: डेढ़ करोड़ में ‘रिश्तों’ का समझौता! भोपाल फैमिली कोर्ट में पत्नी ने पति को प्रेमिका संग भेजा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां पत्नी ने पति को उसकी प्रेमिका के साथ रहने की अनुमति डेढ़ करोड़ रुपये के समझौते में दे दी। जानिए इस समझौते के पीछे की पूरी कहानी।

मध्य प्रदेश: डेढ़ करोड़ में ‘रिश्तों’ का समझौता! भोपाल फैमिली कोर्ट में पत्नी ने पति को प्रेमिका संग भेजा
बच्चों के भविष्य हेतु पांच साल बाद हुआ फैसला।
  • घर और 27 लाख लेकर दिया तलाक
  • मध्य प्रदेश में रिश्तों का अनोखा सौदा
  • बच्चों के भविष्य के लिए हुआ फैसला

भोपाल (Threesocieties.com Desk)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां एक पत्नी ने अपने पति को उसकी प्रेमिका के साथ रहने की अनुमति दे दी। बदले में उसे एक मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए गए। यह पूरा समझौता करीब डेढ़ करोड़ रुपये में तय हुआ।

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पांच साल तक चला विवाद, बेटियों ने उठाया कदम

मामला एक सरकारी विभाग में कार्यरत 42 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे अपने ही कार्यालय की एक महिला अधिकारी से प्रेम हो गया। महिला अधिकारी उससे करीब 10 वर्ष बड़ी बताई जा रही है। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और पति का अपने परिवार से दूरी बनाना शुरू हो गया। घर में रोजाना झगड़े होने लगे, जिसका असर दंपती की 16 और 12 वर्षीय बेटियों पर पड़ने लगा। पारिवारिक कलह से परेशान होकर बड़ी बेटी ने कुटुंब न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अदालत ने माता-पिता को काउंसलिंग के लिए बुलाया।

काउंसलिंग में पति ने कबूला सच

काउंसलिंग के दौरान पति ने साफ कहा कि वह अपनी सहकर्मी के साथ रहना चाहता है और पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार है। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह बेटियों से प्रेम करता है, लेकिन पत्नी के साथ नहीं रह सकता। काउंसलिंग प्रक्रिया करीब पांच वर्षों तक चली। विशेषज्ञों ने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए समझौते का रास्ता सुझाया।

पत्नी और बेटियों की शर्तें क्या थीं?

लगातार काउंसलिंग के बाद पत्नी ने आर्थिक सुरक्षा की मांग रखी। उसने अपने और बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक मकान और 27 लाख रुपये नकद देने की शर्त रखी। चौंकाने वाली बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। बताया गया कि उसने स्वयं आगे आकर आर्थिक जिम्मेदारी ली और तय रकम तथा मकान उपलब्ध कराया।

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया शुरू

समझौते के बाद अब पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से विवाह विच्छेद (तलाक) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अदालत की निगरानी में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

सामाजिक बहस का विषय बना मामला

यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक मूल्यों, रिश्तों की परिभाषा और आर्थिक सुरक्षा की प्राथमिकता को भी दर्शाता है। सवाल यह भी उठता है कि क्या रिश्तों का अंत अब भावनाओं से अधिक व्यावहारिक समझौतों पर निर्भर होता जा रहा है?

Threesocieties.com इस तरह के सामाजिक और कानूनी मामलों पर लगातार नजर बनाए हुए है।