झारखंड में वन भूमि पर बड़ा एक्शन! 32 हजार एकड़ अतिक्रमण हटाने की तैयारी, जंगल बचाने को बनेगा लैंडबैंक
झारखंड में वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ वन एवं पर्यावरण विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। करीब 32 से 50 हजार एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे की जांच के लिए अभिलेखों की स्टडी और लैंडबैंक बनाने की योजना शुरू की गई है।
रांची (Threesocieties.com Desk)। झारखंड में तेजी से बढ़ रहे वन भूमि अतिक्रमण को लेकर वन एवं पर्यावरण विभाग अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। विभाग ने राज्य भर में वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत सबसे पहले पुराने सरकारी अभिलेखों का गहन अध्ययन कराया जायेगा ताकि वन भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
यह भी पढ़ें:धनबाद में ‘जीरो बैलेंस’ बैंक अकाउंट्स का बड़ा खेल! 17 खातों से ₹1.46 करोड़ की साइबर ठगी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगभग 50 हजार एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा होने का अनुमान है। हालांकि वन विभाग आधिकारिक तौर पर करीब 32 हजार एकड़ जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि करता है। विभाग का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में वन भूमि के अवैध हस्तांतरण, जंगलों को काटकर खेती करने और सड़कों के किनारे दुकानों या रिसॉर्ट बनाने जैसी गतिविधियों के कारण अतिक्रमण तेजी से बढ़ा है।
अभिलेखों की स्टडी से शुरू होगा अभियान
वन एवं पर्यावरण विभाग ने अपने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को वन भूमि से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। विभाग का लक्ष्य है कि पुराने रिकॉर्ड का पुनरीक्षण कर वन भूमि की स्पष्ट पहचान की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध हस्तांतरण या कब्जे को रोका जा सके। हाल ही में रांची के कांके अंचल से सटे वन क्षेत्र में स्थानीय अंचलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई है। इससे विभाग को राज्यभर में ऐसे अभियान चलाने का आधार मिला है।
नेशनल हाईवे किनारे बने रिसॉर्ट और दुकानों पर भी नजर
वन विभाग को हाल के दिनों में नेशनल हाईवे के किनारे बने कई रिसॉर्ट्स, होटल और दुकानों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिली हैं। विभाग इन मामलों की भी जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर जंगल की जमीन को काटकर खेती या व्यवसायिक गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं, जिससे पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
वन प्रबंधन समिति को किया जायेगा मजबूत
वन भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने के लिए विभाग वन प्रबंधन समितियों को मजबूत करने की योजना बना रहा है। इसके तहत जंगल से सटे गांवों के अधिक से अधिक लोगों को समिति में शामिल किया जायेगा। इससे स्थानीय स्तर पर वन भूमि पर होने वाली गतिविधियों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी और ग्रामीणों के सहयोग से अतिक्रमण रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही इन समितियों को पौधरोपण, जंगल संरक्षण और पर्यावरण आधारित रोजगार से भी जोड़ा जायेगा।
विभाग बनायेगा अपना लैंडबैंक
वन एवं पर्यावरण विभाग भविष्य के लिए वन भूमि का डिजिटल लैंडबैंक भी तैयार करेगा। इसके लिए सभी वन भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
इस लैंडबैंक का उपयोग
बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान
पर्यावरण संरक्षण योजनाओं
और संरचनात्मक विकास कार्यों
के लिए किया जाएगा। विभाग ने अपनी 10 वर्ष की कार्ययोजना में इसे प्रमुख लक्ष्य के रूप में शामिल किया है।
कई जिलों में बड़ी मात्रा में वन भूमि पर कब्जा
विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के कई जिलों में बड़ी मात्रा में वन भूमि पर अवैध कब्जा है। इनमें रांची, खूंटी, चतरा, बोकारो, धनबाद, लातेहार, सारंडा, कोडरमा, गढ़वा और चाईबासा समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। कुछ क्षेत्रों में हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अतिक्रमण की गई वन भूमि के प्रमुख एरिया
रांची: पूर्वी प्रभाग – 2135.014 हेक्टेयर • वन्यजीव प्रभाग – 56.007 हेक्टेयर
खूंटी: वन प्रभाग – 4596.044 हेक्टेयर
गुमला: वन प्रभाग – 30.018 हेक्टेयर
सिमडेगा: वन प्रभाग – 46.079 हेक्टेयर
रामगढ़: वन प्रभाग – 193.853 हेक्टेयर
बोकारो: वन प्रभाग – 285.0 हेक्टेयर
धनबाद: वन प्रभाग – 893.084 हेक्टेयर
लातेहार: वन प्रभाग – 334.399 हेक्टेयर
चतरा: • उत्तरी वन प्रभाग – 549.553 हेक्टेयर • दक्षिणी वन प्रभाग – 1207.007 हेक्टेयर
हज़ारीबाग: • वन्य जीव- 5.007 हेक्टेयर • पूर्वी वन प्रमंडल- 90.231 हेक्टेयर • पश्चिमी वन प्रमंडल- 450.90 हेक्टेयर
सारंडा: वन प्रमंडल- 5827.00 हेक्टेयर
लोहरदगा: 137.068 हेक्टेयर
दुमका: 76.070 हेक्टेयर
जामताड़ा: 76.00 हेक्टेयर
पोड़ैयाहाट: 25206.004 हेक्टेयर
चाईबासा: दक्षिणी वन प्रमंडल- 588.042 हेक्टेयर
धालधूम: वन प्रमंडल- 75.559 हेक्टेयर
कोडरमा: 1356.25 हेक्टेयर
गढ़वा: • उत्तरी 85.033 हेक्टेयर • दक्षिणी 126.088 हेक्टेयर
टाइगर परियोजना: • बफर क्षेत्र – 0.693 हेक्टेयर • कोर क्षेत्र – 1.006 हेक्टेयर
गोड्डा: 8.177 हेक्टेयर
जंगल बचाने की बड़ी चुनौती
झारखंड देश के प्रमुख वन क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में वन भूमि पर बढ़ता अतिक्रमण सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विभाग का मानना है कि अभिलेखों की सटीक जांच, स्थानीय सहभागिता और सख्त कार्रवाई से ही वन भूमि को अतिक्रमण से बचाया जा सकता है। आने वाले दिनों में राज्य के कई जिलों में वन विभाग का यह अभियान तेज होने की संभावना है।






