निरसा में एलिवेटेड फ्लाईओवर पर सियासी संग्राम, ढुल्लू महतो का पलटवार- "अरूप का काम सिर्फ रंगदारी वसूलना"
धनबाद के निरसा में 400 करोड़ रुपये के एलिवेटेड फ्लाईओवर निर्माण को लेकर भाजपा सांसद ढुल्लू महतो और विधायक अरूप चटर्जी के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। सांसद ने विधायक पर रंगदारी और विकास विरोधी राजनीति का आरोप लगाया, जबकि विधायक ने स्थानीय लोगों को रोजगार और सम्मान नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
HighLights :
- निरसा के 400 करोड़ रुपये के एलिवेटेड फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पिछले डेढ़ महीने से बंद
- भाजपा सांसद ढुल्लू महतो और विधायक अरूप चटर्जी के बीच जुबानी जंग तेज
- सांसद ने विधायक पर विकास कार्य रोकने और रंगदारी वसूली का आरोप लगाया
- विधायक ने स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने और ठेकेदारों पर माफिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया
- परियोजना को लेकर श्रेय की राजनीति के बीच क्षेत्र में सियासी तनाव बढ़ा
धनबाद(Threesocieties.com Desk): दिल्ली-कोलकाता ग्रैंड ट्रंक रोड पर निरसा क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 400 करोड़ रुपये की लागत वाले एलिवेटेड फ्लाईओवर निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। भाजपा सांसद ढुल्लू महतो और निरसा विधायक अरूप चटर्जी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। परियोजना का निर्माण कार्य पिछले लगभग डेढ़ महीने से बंद पड़ा है, जबकि दोनों जनप्रतिनिधि इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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सांसद ढुल्लू महतो ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक अरूप चटर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक क्षेत्र के विकास कार्यों को बाधित कर रहे हैं और केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि निरसा के विकास में बाधा डालना जनता के हितों के खिलाफ है और यदि कोई भी व्यक्ति सरकारी विकास योजनाओं में अवरोध पैदा करेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
"अनुकंपा की राजनीति करने वालों को विकास की समझ नहीं"
ढुल्लू महतो ने विधायक पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि "अनुकंपा पर विधायक बनने वालों को जनता की समस्याओं और विकास की जरूरतों का सही आकलन नहीं होता।" उन्होंने दावा किया कि फ्लाईओवर परियोजना को धरातल पर लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और इसके सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक निर्माण एजेंसी से संपर्क और हस्तक्षेप की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोई आर्थिक मांग या आपत्ति है तो उसे खुलकर सामने आना चाहिए, लेकिन विकास कार्यों को रोकना उचित नहीं है।
विधायक अरूप चटर्जी का जवाब- "यह रोजगार और सम्मान की लड़ाई"
दूसरी ओर विधायक अरूप चटर्जी ने सांसद के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एलिवेटेड फ्लाईओवर परियोजना की मंजूरी सांसद बनने से पहले ही मिल चुकी थी और इसका टेंडर भी पहले ही जारी हो चुका था। उन्होंने दावा किया कि परियोजना को स्वीकृति दिलाने के लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय स्तर पर कई बैठकों में प्रयास किया था।
विधायक ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य कर रही एजेंसी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को न तो निर्माण सामग्री की आपूर्ति में मौका मिला और न ही श्रमिकों के रूप में रोजगार उपलब्ध कराया गया। अरूप चटर्जी ने कहा, "हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अधिकार और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। जब तक मुख्य ठेकेदार सामने नहीं आता और स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।"
डेढ़ महीने से बंद है निर्माण कार्य
जानकारी के अनुसार, फ्लाईओवर निर्माण के शुरुआती चरण में सड़क किनारे पेड़ों की कटाई और गार्ड वॉल निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। इसी दौरान स्थानीय संगठनों और वाम दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने परियोजना में स्थानीय रोजगार, पर्यावरणीय मंजूरी और पेड़ों की कटाई के लिए जारी एनओसी को लेकर सवाल उठाए। इन मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और उसके बाद से निर्माण स्थल पर काम पूरी तरह ठप है। करीब 45 दिनों से परियोजना स्थल पर मशीनें और श्रमिक नहीं दिखाई दे रहे हैं।
विकास बनाम राजनीति की बहस
निरसा का एलिवेटेड फ्लाईओवर जीटी रोड पर जाम की समस्या को कम करने और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है। लेकिन फिलहाल यह परियोजना विकास से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी और श्रेय लेने की होड़ का केंद्र बन गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार, निर्माण एजेंसी और स्थानीय प्रशासन इस गतिरोध को कैसे समाप्त करते हैं और क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इस परियोजना को कब तक फिर से पटरी पर लाया जा सकेगा।






