Waqf Amendment Bill 2025: लोकसभा ने वक्फ विधेयक को दी मंजूरी, समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े
सरकार और विपक्ष के बीच लगभग 12 घंटे लंबी गरमागरम बहस के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को बहुमत से बुधवार को देर रात लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक के समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। विधेयक पारित करने के लिए सदन आधी रात के बाद भी बैठा रहा।

- ओवैसी ने बिल की प्रति फाड़ी
- केंद्र ने विपक्ष की सारी आपत्तियों का जवाब दिया
- आज राज्यसभा में पेश होगा बिल
- वक्फ बिल मस्जिद-दरगाह छीनने और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं
- विपक्ष के बीच खूब हुई गरमागरम बहस
नई दिल्ली। सरकार और विपक्ष के बीच लगभग 12 घंटे लंबी गरमागरम बहस के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को बहुमत से बुधवार को देर रात लोकसभा से पारित हो गया। विधेयक के समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। विधेयक पारित करने के लिए सदन आधी रात के बाद भी बैठा रहा।
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#WATCH वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में पारित हुआ। विधेयक के पक्ष में 288 वोट, विधेयक के खिलाफ 232 वोट पड़े। pic.twitter.com/AfsRASxQ6m
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 2, 2025
सरकार ने मुस्लिमों को आश्वस्त किया
विपक्ष द्वारा विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताये जाने सहित सरकार ने एक-एक आपत्तियों का जवाब दिया और आशंकाएं दूर की। सरकार ने मुस्लिमों को आश्वस्त किया कि यह बिल उनकी मस्जिद एवं दरगाह छीनने और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं है, बल्कि संपत्तियों के नियमन और प्रबंधन के लिए लाया गया है।
नया कानून अधिसूचना निकलने के दिन से ही प्रभावी होगा
नया कानून अधिसूचना निकलने के दिन से ही प्रभावी होगा। वक्फ संशोधन विधेयक को असंवैधानिक कहने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि वक्फ संपत्ति से संबंधित कानून दशकों से अस्तित्व में है। अदालतों द्वारा इसे रद नहीं किया गया है और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल हल्के में नहीं किया जाना चाहिए। कहा कि दुनिया में अल्पसंख्यकों के लिए भारत से ज्यादा सुरक्षित कोई देश नहीं है। विधेयक पर विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई, केसी वेणुगोपाल, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद सावंत ने संशोधन पेश किया, जिसे सदन ने खारिज कर दिया। वहीं, रिजीजू के संशोधन को स्वीकार कर लिया।
बिल के प्रमुख प्रावधान
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव।
जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों की जांच का अधिकार।
"वक्फ बाय यूजर" की अवधारणा को हटाना।
सभी वक्फ संपत्तियों को केंद्रीय डेटाबेस में पंजीकृत करने की अनिवार्यता।
ट्रिब्यूनल का फैसले अंतिम नहीं होगा, हाई कोर्ट में अपील का प्रावधान।
इन बदलावों को सरकार पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे "मुस्लिम विरोधी" कह रहा है।यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को बेहतर करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच गहरा मतभेद देखने को मिला। एआइएमआइएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून को मुसलमानों पर हमला बताते हुए विधेयक की प्रति फाड़ दी।
एनडीए सहयोगियों का रुख
एनडीए के सहयोगी दलों जैसे जेडी(यू), टीडीपी और शिवसेना ने लोकसभा में बिल का समर्थन किया। जेडी(यू) नेता राजीव रंजन सिंह ने कहा कि यह बिल मुस्लिम विरोधी नहीं है, बल्कि वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए है। अब इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं, जहां आज इस बिल पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, राज्यसभा में संख्याबल की कमी के कारण सरकार को कुछ क्षेत्रीय दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
थोड़े बदले-बदले से थे विपक्षी दलों के स्वर
विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में जदयू, तेदेपा एवं लोजपा (आर) समेत राजग के समस्त सहयोगी दल पूरी तरह एकजुट दिखे, जबकि पहले से कड़े प्रतिरोध का दावा करते आ रहे विपक्षी दलों के स्वर थोड़े बदले-बदले से थे। कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी समेत कई दलों को विधेयक से नहीं, बल्कि संशोधन के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति थी। हालांकि दोनों खेमों ने अपने-अपने सदस्यों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था।बहस पर चर्चा का समय पहले आठ घंटा निर्धारित था। इसे पहले दो घंटे और फिर डेढ़ घंटे के लिए बढ़ाया गया। लोकसभा में लगभग 12 घंटे तक चली मैराथन बहस का जवाब देते हुए रिजीजू ने कहा कि विधेयक पारित होने के बाद गरीब मुसलमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देंगे।
विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को मुस्लिम विरोधी बताया
रिजीजू ने विपक्षी सदस्यों द्वारा विधेयक को मुस्लिम विरोधी बताए जाने को खारिज कर दिया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सभी मुद्दों पर अच्छी तरह से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद कुछ सदस्य सच को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। कुछ नेता कह रहे हैं कि विधेयक असंवैधानिक है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे कैसे कह सकते हैं कि विधेयक असंवैधानिक है। अगर यह असंवैधानिक था, तो अदालत ने इसे रद क्यों नहीं किया?
असदुद्दीन ओवैसी ने विभिन्न मुद्दे उठाये
रिजीजू ने कहा कि एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विभिन्न मुद्दे उठाए और आरोप लगाया कि वक्फ में मुसलमानों के बच्चों के लिए प्रविधान किया जा रहा है। हिंदुओं के लिए कोई प्रविधान क्यों नहीं किया जा रहा है? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि हिंदुओं के लिए पहले से ही प्रविधान है। इस पर दूसरा कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले रिजीजू ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इंपावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया।वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बिल लाने को जरूरी बताते हुए रिजीजू ने कहा कि अगर ऐसा नहीं करते तो जिस इमारत (संसद भवन) में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ दावा कर सकता था, क्योंकि 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन सरकार ने दिल्ली की 123 संपत्तियां वक्फ को दे दी थीं। अगर केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार नहीं बनती तो कई अन्य संपत्तियों पर वक्फ का कब्जा हो सकता था।
वोट के लिए 70 वर्षों से मुस्लिमों को किया जा रहा है गुमराह
रिजीजू ने उस भ्रम को भी स्पष्ट किया, जिसमें कहा जाता है कि रेल और सेना के बाद वक्फ के पास सबसे ज्यादा जमीन है। कहा कि रेल और सेना की जमीन देश की है, किंतु वक्फ की संपत्ति निजी है। वोट के लिए 70 वर्षों से मुस्लिमों को गुमराह किया जा रहा है।सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिजीजू ने कहा कि 2006 में देश में 4.9 लाख वक्फ संपत्तियां थीं, जिनकी कुल आय 163 करोड़ थी। अभी 8.72 लाख संपत्तियां हैं, लेकिन आमदनी सिर्फ तीन करोड़ ही बढ़ी है। उचित इस्तेमाल से वक्फ की आमदनी बढ़ेगी, जिससे मुस्लिमों को फायदा होगा। अभी तक वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपना बता देता था। अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई की उस आपत्ति को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गैर सरकारी संस्थाओं से सुझाव नहीं लिए गए और विपक्ष के एक भी संशोधन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया।
गोगोई ने सरकार पर लगाये आरोप
गोगोई ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर हमला करने, अल्पसंख्यकों को बदनाम करने, उन्हें मताधिकार से वंचित करने और समाज को विभाजित करने का प्रयास है। इस पर अमित शाह ने कहा कि संप्रग सरकार ने 2013 में सिर्फ चार घंटे की चर्चा के बाद वक्फ विधेयक को पास कर दिया था, लेकिन इस बार संयुक्त संसदीय समिति में 113 घंटे की चर्चा एवं 92 लाख से ज्यादा सुझावों पर विचार के बाद कानून बनाया जा रहा है।
वक्फ में एक भी गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होगा
वक्फ कानून में संशोधन के नाम पर धार्मिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि वक्फ में एक भी गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होगा। सिर्फ वक्फ परिषद एवं वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम होंगे, जिनका काम धार्मिक हस्तक्षेप का नहीं होगा, बल्कि उन संपत्तियों के प्रबंधन का होगा जो दान में मिली है। वह देखेगा कि संपत्तियों का सदुपयोग हो रहा है या नहीं। वक्फ में महिलाएं और शिया-सुन्नी की भागीदारी बढ़ेगी और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व होगा।
ओवैसी ने फाड़ी वक्फ संशोधन बिल की कॉपी, महात्मा गांधी का उदाहरण दिया
एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान वक्फ संशोधन विधेयक की कॉपी फाड़ दी। असदुद्दीन ओवैसी ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए वक्फ बिल के खिलाफ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस में भाग लेते हुए ओवैसी ने महात्मा गांधी का उदाहरण दिया, जब वे दक्षिण अफ्रीका में थे। उन्होंने कहा कि अगर आप इतिहास पढ़ेंगे, तो आप देखेंगे कि उन्होंने (महात्मा गांधी ने) श्वेत दक्षिण अफ्रीका के कानूनों के बारे में कहा था, 'मेरी अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं करती' और उन्होंने इसे फाड़ दिया।कहा कि गांधी की तरह, मैं भी इस कानून को फाड़ रहा हूं। यह असंवैधानिक है। भाजपा इस देश में मंदिर और मस्जिद के नाम पर विभाजन पैदा करना चाहती है। मैं इसकी निंदा करता हूं और आपसे 10 संशोधनों को स्वीकार करने का अनुरोध करता हूं।
बीजेपी एमपी जगदम्बिका पाल ने उठाया सवाल
वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और बीजेपी एमपी जगदम्बिका पाल ने लोकसभा में चल रही बहस के दौरान कहा कि असदुद्दीन ओवैसी इस विधेयक को असंवैधानिक कहते हैं, लेकिन उन्होंने विधेयक को फाड़कर असंवैधानिक काम किया है... मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि विधेयक क्यों फाड़ दिया?
शिवसेना यूबीटी ने भी विधेयक के कई प्रविधानों का विरोध किया
तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और शिवसेना यूबीटी जैसे विपक्षी दलों ने भी विधेयक के कई प्रविधानों का विरोध किया। गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि कांग्रेस वक्फ में सुधारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस बिल में कई ऐसे प्रविधान हैं जिनका राजनीतिक उद्देश्य है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार मुसलमानों को धार्मिक प्रमाण पत्र देगी तो क्या अन्य धर्मों से भी प्रमाण पत्र मांगे जाएंगे? उन्होंने जेपीसी में व्यापक चर्चा के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रिजीजू के दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों के सुझावों को नजरअंदाज किया गया और ऐसे लोग भी चर्चा के लिए आए जिन्हें वक्फ की कोई जानकारी नहीं थी।
कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया
कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता का दिखावा कर रही है, जबकि उसका असली मकसद सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करना है। उन्होंने संघ परिवार के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल न होने के मुद्दे पर सत्तापक्ष को घेरा। गोगोई ने कहा कि जिस कौम ने 1857 में मंगल पांडे के साथ बलिदान दिया और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया, भाजपा उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना चाहती है।
वक्फ संशोधन विधेयक संविधान विरोधी: इमरान मसूद
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक संविधान विरोधी है। सरकार वक्फ संपत्तियों को छह महीने के भीतर कैसे पंजीकृत कर सकती है, जबकि पिछले 10 वर्षों में यह कार्य नहीं किया जा सका।