- ममता बनर्जी नहीं रहीं मुख्यमंत्री
- पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग
- 15 साल पुरानी TMC सरकार खत्म
कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्यपाल आर.एन. रवि ने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया, जिसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत पूरी मंत्री परिषद संवैधानिक रूप से पदमुक्त हो गई।
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कोलकाता गजट में जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए विधानसभा भंग की। इस फैसले के बाद 15 साल से लगातार सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया। राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला के हस्ताक्षर से जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा गया कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही वर्तमान मंत्रिपरिषद भी भंग मानी जाएगी। इसके बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
दो दिनों तक राज्यपाल संभालेंगे कार्यभार
सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक अगले दो दिनों के लिए राज्यपाल प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे। इस दौरान राजभवन और मुख्य सचिवालय के जरिए प्रशासनिक फैसले लिए जाएंगे। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 2011 में वाममोर्चा को सत्ता से हटाकर ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं और उसके बाद लगातार तीन बार सत्ता में रहीं।
इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं ममता
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं थीं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव “हारी नहीं है, बल्कि उनसे सीटें छीनी गई हैं।” इसी बयान के बाद राज्य में सियासी तनातनी और बढ़ गई थी। हालांकि संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने और पूरी कैबिनेट को बर्खास्त करने का फैसला लिया। इसके बाद बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।
ब्रिगेड ग्राउंड में हो सकता है शपथ ग्रहण
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। रवींद्र जयंती के अवसर पर होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।इसके अलावा भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसपीजी, कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों को अलर्ट पर रखा गया है।
15 साल का ‘दीदी युग’ खत्म?
ममता बनर्जी का कार्यकाल बंगाल की राजनीति में बड़े बदलावों, कल्याणकारी योजनाओं और कई विवादों के लिए जाना जाता है। उनके शासनकाल में राज्य में राजनीतिक हिंसा, केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार चर्चा में रहे। अब विधानसभा भंग होने और कैबिनेट हटने के बाद बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन और सत्ता हस्तांतरण पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।