BNSS लागू, लेकिन जांच पर संकट! पुलिस की मनमानी के खिलाफ हाई कोर्ट में PIL
BNSS लागू होने के बाद भी झारखंड में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सेवानिवृत्त DSP अवधेश सिंह ने केस डायरी और गवाह बयान में अनियमितताओं को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
- रिटायर्ड DSP ने पुलिस कार्यशैली को दी कोर्ट में चुनौती
- BNSS के पालन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप
- केस डायरी और गवाह बयान में गड़बड़ी का आरोप
धनबाद (Threesocieties.com Desk): देश में 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना था। लेकिन झारखंड में इसके अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की कथित मनमानी और लापरवाही के कारण अनुसंधान (Investigation) प्रभावित होने का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है।
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इसी मुद्दे को लेकर झारखंड पुलिस के सेवानिवृत्त डीएसपी अवधेश सिंह ने झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।
क्या है BNSS और क्यों है महत्वपूर्ण?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) ने पुराने CrPC की जगह ली है। इसका मकसद है—
ई-एफआईआर और डिजिटल रिकॉर्डिंग को बढ़ावा
वीडियो ट्रायल की सुविधा
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को मान्यता
जांच और सुनवाई की समय-सीमा तय करना
अनावश्यक गिरफ्तारी पर रोक
सरकार का दावा है कि इससे न्याय प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन में खामियां सामने आ रही हैं।
PIL में क्या लगाए गए हैं आरोप?
याचिका में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं—
1. केस डायरी में गड़बड़ी
कांड दैनिकी (Case Diary) को लेकर कहा गया है कि: इसे कंप्यूटर पर बिना सीरियल नंबर के लिखा जा रहा है। BNSS के तहत पेज नंबरिंग (pagination) अनिवार्य है, लेकिन पालन नहीं हो रहा है। किसी भी समय इसमें बदलाव संभव है।
2. गवाहों के बयान पर सवाल
गवाहों के बयान घटनास्थल पर दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। थाने में बैठकर कंप्यूटर पर तैयार किए जा रहे हैं। रिकॉर्ड में झूठा दर्शाया जाता है कि बयान घटनास्थल पर लिया गयाहै।
3. जांच की विश्वसनीयता पर असर
इन अनियमितताओं से— केस डायरी की सत्यता संदिग्ध हो रही है। साक्ष्यों की मौलिकता पर सवाल उठ रहे हैं। न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कानूनी लड़ाई की शुरुआत
यह जनहित याचिका वरीय अधिवक्ता शैलेश के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि— BNSS के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए। पुलिस की मनमानी पर रोक लगे।
बड़ा सवाल: कानून बदला, सिस्टम क्यों नहीं?
BNSS को लागू करने का उद्देश्य न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाना था, लेकिन अगर जमीनी स्तर पर ही नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है। अब निगाहें झारखंड हाई कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या दिशा-निर्देश देता है और क्या इससे पुलिस जांच प्रणाली में सुधार हो पाता है या नहीं।






