700 दागियों की परेड से गूंजा धनबाद पुलिस लाइन, SSP की दो टूक- सुधर जाओ, वरना अगली मुलाकात जेल में होगी
धनबाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुधार के लिए 700 दागियों की ऐतिहासिक परेड कराई। एसएसपी प्रभात कुमार ने अपराध छोड़ने की चेतावनी देते हुए कहा कि नहीं सुधरे तो अगली मुलाकात जेल में होगी।
HighLights:
- धनबाद पुलिस ने पहली बार 700 दागियों की एक साथ परेड कराई।
- सभी को अपराध से दूर रहने और पुलिस का सहयोग करने की शपथ दिलाई गई।
- दागियों की फोटोग्राफी कर रिकॉर्ड अपडेट किया गया।
- एसएसपी ने चेतावनी दी कि दोबारा अपराध करने वालों की जगह जेल होगी।
- जिले में 3000 से अधिक दागी पुलिस की निगरानी सूची में शामिल हैं।
- अपराध से दूरी साबित करने पर दागियों का नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया भी बताई गई।
धनबाद (Threesocieties.com Desk): अपराध पर लगाम लगाने और समाज की मुख्यधारा से भटके लोगों को सुधार की राह पर वापस लाने के उद्देश्य से धनबाद पुलिस ने एक ऐसी पहल की है, जिसकी चर्चा पूरे झारखंड में हो रही है। जिले में पहली बार करीब 700 दागियों को एक साथ पुलिस लाइन बुलाकर उनकी परेड कराई गई और उन्हें अपराध से दूर रहने तथा कानून का पालन करने की शपथ दिलाई गई।
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पुलिस का दावा है कि झारखंड में इतने बड़े पैमाने पर दागियों की सामूहिक परेड का यह पहला मामला है। इस पहल का उद्देश्य केवल अपराधियों पर निगरानी रखना ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना और अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना भी है।
अपराधियों के पुनर्वास का संदेश
जिले के सभी थाना क्षेत्रों से लगभग 700 दागियों को गुरुवार को धनबाद पुलिस लाइन में एकत्र किया गया। पुलिस लाइन का दृश्य किसी रैली जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन इस बार भीड़ किसी राजनीतिक कार्यक्रम की नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया से जुड़े लोगों की थी।धनबाद पुलिस ने इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि कानून का डर और सुधार का अवसर दोनों साथ-साथ चलेंगे। जो लोग अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं, उन्हें पुलिस हर संभव सहयोग देगी, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परेड के दौरान हुई फोटोग्राफी और रिकॉर्ड अपडेट
परेड के दौरान सभी दागियों की फोटोग्राफी कराई गई और उनके रिकॉर्ड को अपडेट किया गया। इसके साथ ही सभी से अपराध न करने, कानून का सम्मान करने और पुलिस प्रशासन को सहयोग करने की शपथ भी दिलाई गई।कार्यक्रम में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव और ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब मौजूद रहे। अधिकारियों ने दागियों को समझाया कि अपराध का रास्ता अंततः जेल और बर्बादी की ओर ही ले जाता है।
एसएसपी की दो टूक- एक मौका दिया जा रहा है
एसएसपी प्रभात कुमार ने दागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि समाज में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि अच्छा नहीं लगता कि लोग दागियों की सूची में शामिल हों। इस पहल का मकसद केवल इतना है कि लोग अपराध की दुनिया छोड़कर सामान्य और सम्मानजनक जीवन जिएं। एसएसपी ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल एक मौका है और दोबारा अवसर नहीं मिलेगा। यदि कोई व्यक्ति अपराध की गतिविधियों में दोबारा शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले में 3000 से अधिक दागी पुलिस की निगरानी में
धनबाद जिले में वर्तमान में 3000 से अधिक लोग पुलिस की दागी सूची में शामिल हैं। फिलहाल पहले चरण में 700 लोगों को बुलाया गया है, जबकि आने वाले दिनों में शेष लोगों को भी इसी तरह बुलाकर चेतावनी और परामर्श दिया जाएगा। पुलिस ने दागियों को यह भी बताया कि यदि वे वास्तव में अपराध से दूरी बना चुके हैं, तो अपने संबंधित थानों में जाकर इसकी जानकारी दें। थाना प्रभारी उनकी गतिविधियों की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार करेंगे और संतोषजनक स्थिति मिलने पर जिला स्तर पर उनके नाम दागियों की सूची से हटाने पर विचार किया जाएगा।
चरित्र प्रमाण-पत्र और पासपोर्ट पर भी पड़ेगा असर
एसएसपी ने दागियों को चेताया कि यदि उनका नाम पुलिस रिकॉर्ड में बना रहता है, तो चरित्र प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट सत्यापन और सरकारी नौकरियों में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और अपराध की राह पर लौटने वालों के लिए अब किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
"नहीं सुधरे तो अगली मुलाकात जेल में होगी"
कार्यक्रम के दौरान एसएसपी का सबसे सख्त संदेश यही था कि यदि चेतावनी के बाद भी कोई व्यक्ति अपराध की दुनिया नहीं छोड़ता, तो उसकी अगली मुलाकात जेल में होगी। उन्होंने दागियों से अपने-अपने इलाकों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने की भी अपील की और कहा कि समाज और जिले की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर गुंडागर्दी, रंगदारी और असामाजिक गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिला बदर जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।
झारखंड में मिसाल बन सकती है यह पहल
अपराध नियंत्रण के लिए आमतौर पर गिरफ्तारी और छापेमारी जैसे कदम उठाए जाते हैं, लेकिन धनबाद पुलिस ने सुधार और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए एक अलग मॉडल पेश किया है। यदि यह पहल सफल होती है, तो भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।
फिलहाल, धनबाद पुलिस का संदेश बिल्कुल साफ है— कानून का पालन करें, अपराध छोड़ें और सम्मानजनक जीवन जिएं, क्योंकि अब पुलिस की नजर हर दागी पर है।






