चार महीने में ही मोहभंग! 22 पार्षदों ने खोला मोर्चा, धनबाद नगर निगम में बगावत के सुर

धनबाद नगर निगम में मेयर संजीव सिंह और निगम प्रशासन के खिलाफ 22 वार्ड पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने विकास कार्यों में उपेक्षा, सफाई व्यवस्था की बदहाली और जनसमस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए एकता मंच बनाकर आंदोलन की चेतावनी दी है।

चार महीने में ही मोहभंग! 22 पार्षदों ने खोला मोर्चा, धनबाद नगर निगम में बगावत के सुर
हमारी नहीं सुन रहे मेयर और अधिकारी'।

      HighLights:

  • धनबाद नगर निगम चुनाव के महज चार महीने बाद ही मेयर के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आई।
  • 55 में से 22 वार्ड पार्षदों ने निगम प्रशासन और मेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
  • पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्य ठप हैं और उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
  • सफाईकर्मियों की संख्या में कटौती और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर जताई नाराजगी।
  • 1 जुलाई को बेकारबांध में डिप्टी मेयर के नेतृत्व में अगली बैठक होगी।
  • पार्षदों ने "एकता मंच" बनाकर आंदोलन तेज करने का फैसला लिया।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद नगर निगम चुनाव के महज चार महीने बाद ही नगर निगम की राजनीति में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। फरवरी 2026 में मेयर पद पर निर्वाचित हुए संजीव सिंह के नेतृत्व पर अब सवाल उठने लगे हैं। निगम के 55 वार्ड पार्षदों में से 22 पार्षदों ने विकास कार्यों में उपेक्षा, जनसमस्याओं की अनदेखी और अधिकारियों की मनमानी का आरोप लगाते हुए निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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रविवार देर शाम वार्ड संख्या-41 स्थित पाथरबंग्ला के आयुष्मान केंद्र में आयोजित आपात बैठक में पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ एकजुटता दिखाई। बैठक की अध्यक्षता वार्ड संख्या-13 की पार्षद कर्मी देवी ने की, जबकि संचालन वार्ड संख्या-10 के पार्षद देवाशीष पासवान ने किया।

मेयर और नगर आयुक्त पर लगाए गंभीर आरोप

बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की बात न तो मेयर सुन रहे हैं और न ही नगर आयुक्त। उनका कहना था कि निगम में अधिकारियों और कर्मचारियों की बातों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि वार्डों की वास्तविक समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि क्षेत्र की जनता पानी, सड़क, नाली और सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन इन मुद्दों पर कोई प्रभावी पहल नहीं हो रही है। इसके चलते उन्हें अपने ही वार्डों में लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।

सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों पर उठे सवाल

बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि पहले से ही बदहाल सफाई व्यवस्था को सुधारने के बजाय सफाईकर्मियों की संख्या में लगातार कटौती की जा रही है। वहीं सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं।पार्षदों ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को भी जटिल बताते हुए कहा कि आम लोगों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

'एकता मंच' बनाकर लड़ेंगे अधिकार की लड़ाई

निगम प्रशासन के रवैये से नाराज पार्षदों ने अब अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर एक साझा मंच बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत "एकता मंच" का गठन किया जाएगा, जो निगम में पार्षदों की आवाज को मजबूती से उठाएगा।पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि निगम प्रशासन और मेयर ने अपने कामकाज के तरीके में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

एक जुलाई को बेकारबांध में अगली बैठक

आगामी बोर्ड बैठक से पहले 1 जुलाई को धनबाद के बेकारबांध में डिप्टी मेयर के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें आंदोलन की रूपरेखा, एकता मंच के गठन और आगे की रणनीति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्षदों की नाराजगी इसी तरह बढ़ती रही, तो यह मामला आने वाले दिनों में धनबाद नगर निगम की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

बैठक में जय कुमार, सुजीत कुमार सिंह, शैलेंद्र सिंह, अनुरंजन सिंह, वीरेंद्र यादव, मुनिलाल रविदास, संजय यादव, आफताब आलम, अजीत महतो, निरंजन कुमार, रश्मि राज, निसार आलम, मो. अलीम और शमीम अख्तर सहित कई पार्षद और उनके प्रतिनिधि मौजूद थे।