3 साल की लक्षिता की हर बार टूट रही हड्डियां, करौली शंकर महादेव ने उठाया आजीवन इलाज का पूरा खर्च

कानपुर की तीन वर्षीय लक्षिता दुर्लभ बीमारी ऑस्टियोमायलाइटिस से जूझ रही है, जिसके कारण उसकी हड्डियां बार-बार टूट रही हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार के लिए करौली शंकर महादेव ने आजीवन इलाज का पूरा खर्च उठाने का ऐलान किया है।

3 साल की लक्षिता की हर बार टूट रही हड्डियां, करौली शंकर महादेव ने उठाया आजीवन इलाज का पूरा खर्च
करौली शंकर बने परिवार के लिए फरिश्ता।

    HighLights:

  • तीन साल की लक्षिता दुर्लभ बीमारी ऑस्टियोमायलाइटिस से पीड़ित है।
  • बीमारी के कारण अब तक उसकी हड्डियां तीन बार टूट चुकी हैं।
  • परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था और चौथे ऑपरेशन की चिंता सता रही थी।
  • करौली शंकर महादेव ने लक्षिता के आजीवन इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की।
  • डॉक्टरों के मुताबिक लक्षिता को आगे भी कई सर्जरी और लंबे इलाज की जरूरत पड़ेगी।

कानपुर(Threesocieties.com Desk): खेलने-कूदने और मुस्कुराने की उम्र में तीन साल की मासूम लक्षिता जिंदगी की एक ऐसी लड़ाई लड़ रही है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। दुर्लभ बीमारी ऑस्टियोमायलाइटिस से पीड़ित लक्षिता की हड्डियां इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि अब तक तीन बार टूट चुकी हैं और मंगलवार को उसका चौथा ऑपरेशन होना है।

यह भी पढ़ें: झारखंड यूथ कांग्रेस अध्यक्ष कुमार गौरव का पद होल्ड पर,प्रदेश प्रभारी से कथित दुर्व्यवहार के बाद एक्शन

इलाज के लिए परिवार अपनी जमा-पूंजी पहले ही खर्च कर चुका है। ऐसे मुश्किल समय में करौली शंकर महादेव (श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री करौली शंकर दास) परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आए हैं। उन्होंने न केवल लक्षिता के मौजूदा इलाज बल्कि उसके आजीवन चिकित्सा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।

डेढ़ साल की उम्र में सामने आई गंभीर बीमारी

नौबस्ता के मछरिया इलाके में रहने वाले गौरव पांडेय और गरिमा पांडेय की छोटी बेटी लक्षिता जून 2024 तक एक सामान्य बच्चे की तरह खेलती-कूदती थी। लेकिन अचानक आए बुखार के बाद उसकी जिंदगी बदल गई। बुखार तो ठीक हो गया, लेकिन संक्रमण के कारण वह ऑस्टियोमायलाइटिस नामक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई। यह बीमारी हड्डियों को कमजोर और संक्रमणग्रस्त बना देती है, जिससे मामूली चोट या दबाव में भी हड्डियां टूट सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और हर साल लाखों लोगों में केवल कुछ ही मरीजों में इसके मामले सामने आते हैं।

तीन बार टूटी हड्डी, चार ऑपरेशन की नौबत

सितंबर 2024 में लक्षिता के बाएं पैर की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उसे कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया। 26 दिनों तक चले इलाज के दौरान डॉक्टरों ने इस गंभीर बीमारी की पहचान की। पहले ऑपरेशन के बाद भी संक्रमण कम नहीं हुआ। डॉक्टरों ने संक्रमण बढ़ने पर पैर काटने तक की आशंका जताई। इसके बाद परिवार ने बेटी को एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया, जहां दिसंबर 2024 में दूसरा ऑपरेशन हुआ।

कुछ समय बाद पैर फिसलने से उसकी हड्डी दोबारा टूट गई और फरवरी 2025 में तीसरी सर्जरी करनी पड़ी। फिलहाल उसके पैर की हड्डी में संक्रमण मौजूद है, जिसके चलते मंगलवार को चौथा ऑपरेशन किया जाएगा। इस सर्जरी में संक्रमित हड्डी को निकालकर प्लेट लगाई जाएगी। डॉक्टरों के मुताबिक एक साल बाद फिर एक और ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

इलाज में खत्म हो गई परिवार की जमा-पूंजी

लक्षिता की मां गरिमा पांडेय बताती हैं कि बेटी की बीमारी से पहले वह किचन सर्विस सेंटर चलाती थीं, लेकिन बेटी की देखभाल और इलाज के कारण उन्हें अपना काम बंद करना पड़ा। लगातार ऑपरेशन और इलाज के खर्च ने परिवार को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। स्थिति यह हो गई कि चौथे ऑपरेशन के लिए पैसे जुटाना भी मुश्किल हो गया था।

समाजसेवियों की मदद से जगी उम्मीद

इसी दौरान समाजसेवी मुन्ना चौहान (केके सिंह) परिवार की मदद के लिए आगे आए और इलाज दोबारा शुरू हो सका। वर्तमान में आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राहुल कपूर लक्षिता का उपचार कर रहे हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत उस समय आई जब करौली शंकर महादेव ने लक्षिता के आजीवन इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा कर दी।

"बेटी के लिए भगवान बनकर आए"

लक्षिता की मां गरिमा पांडेय भावुक होकर कहती हैं कि उनके लिए मुन्ना चौहान और करौली शंकर महादेव किसी भगवान से कम नहीं हैं।उनका कहना है कि अगर यह मदद नहीं मिलती तो परिवार के लिए बेटी का इलाज जारी रखना लगभग असंभव हो गया था। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी एक दिन पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी जी सकेगी।

यह कहानी केवल एक बच्ची की बीमारी की नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और समाज में मौजूद मदद के उन हाथों की भी है, जो मुश्किल समय में किसी के जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाते हैं।