लोहगढ़ किले पर प्यार, धोखा और मौत की साजिश! सिया गोयल के इशारे पर चेतन चौधरी ने दिया केतन अग्रवाल को धक्का

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, मंगेतर सिया गोयल ने लोहगढ़ किले पर इशारा किया और प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन को खाई में धक्का दे दिया। हत्या से पहले रेकी, रिहर्सल और गूगल सर्च के जरिए पूरी साजिश रची गई थी।

लोहगढ़ किले पर प्यार, धोखा और मौत की साजिश! सिया गोयल  के इशारे पर चेतन चौधरी ने दिया केतन अग्रवाल को धक्का
सिया-चेतन की साजिश का पुलिस ने किया खुलासा।

       HighLights

  • 18 जून को लोहगढ़ किले की खाई में गिरने से हुई थी केतन अग्रवाल की मौत
  • पुलिस का दावा- सिया गोयल के इशारे पर चेतन चौधरी ने केतन को पीछे से धक्का दिया
  • आरोप है कि सिया जानबूझकर बैठ गई ताकि गिरते समय केतन उसे पकड़ न सके
  • हत्या से पहले दोनों ने लोहगढ़ किले की रेकी और कथित तौर पर रिहर्सल भी की थी
  • पुलिस के अनुसार, गूगल पर "डेथ पॉइंट" और "बिना शक के हत्या कैसे करें" जैसे सर्च किए गए
  • घटना के छह दिन के भीतर पुलिस ने सिया और चेतन को गिरफ्तार कर लिया
  • दोनों आरोपी एक-दूसरे को साजिश का मास्टरमाइंड बता रहे हैं

पुणे (Threesocieties.com Desk): महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस जांच के दौरान ऐसे खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। पुलिस का दावा है कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर मंगेतर सिया गोयल ने एक सुनियोजित योजना के तहत पानी पीने और जूते का फीता बांधने का बहाना बनाकर रास्ते में बैठ गई, जिसके बाद पीछे चल रहे उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया।

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जांच अधिकारियों के अनुसार, सिया का बैठ जाना भी साजिश का हिस्सा था ताकि गिरते समय केतन उसे पकड़कर खुद को बचा न सके। पुलिस का कहना है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि पहले से बनाई गई हत्या की योजना का हिस्सा था।

एक दिन पहले कैफे में बनी थी कथित साजिश

पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले यानी 17 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में मिले थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी मुलाकात में केतन की हत्या की कथित योजना को अंतिम रूप दिया गया था।पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी वारदात से पहले भी लोहगढ़ किले पर पहुंचे थे और वहां कथित तौर पर ऐसी जगहों की पहचान की थी, जहां घटना को हादसा साबित करना आसान हो सके। पुलिस अब उस स्थान की तलाश कर रही है, जहां दोनों ने कथित रूप से हत्या की रिहर्सल की थी।

टोल प्लाजा से बचने के लिए स्कूटर से पहुंचा चेतन

जांच में यह भी सामने आया है कि चेतन चौधरी पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहगढ़ किले तक स्कूटर से पहुंचा था। पुलिस का मानना है कि उसने जानबूझकर कार का इस्तेमाल नहीं किया ताकि टोल प्लाजा पर उसकी आवाजाही का कोई रिकॉर्ड न बन सके।पुलिस के मुताबिक, किले पर चढ़ते समय चेतन ने हूडी पहन रखी थी, जिसे उसने वहां पहुंचने के बाद उतार दिया और घटना के बाद वापस लौटते समय फिर से पहन लिया। वारदात के बाद वह उसी स्कूटर से पुणे लौट गया।

पुलिस ने कराया सीन रीक्रिएशन

रविवार को पुलिस दोनों आरोपियों को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां केतन का डमी बनाकर पूरे घटनाक्रम को दोहराया गया। जांच अधिकारी इस प्रक्रिया के जरिए घटना की परिस्थितियों और आरोपियों के बयानों की पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं।

वकील ने पुलिस के दावों पर उठाए सवाल

सिया गोयल के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने पुलिस के दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि पुलिस हिरासत में आरोपी द्वारा दिया गया बयान अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शुरुआत में पुलिस ने इसे हादसा माना था, तो बाद में इसे हत्या का मामला किस आधार पर बनाया गया। वकील का कहना है कि सिया से पर्याप्त पूछताछ हो चुकी है और अब उसे और अधिक पुलिस रिमांड में रखने की आवश्यकता नहीं है।

गूगल सर्च हिस्ट्री भी जांच के दायरे में

पुलिस जांच में यह भी दावा किया गया है कि सिया और चेतन ने इंटरनेट पर लोहगढ़ किले के तथाकथित "डेथ पॉइंट", खाइयों तक पहुंचने के रास्ते और हत्या को हादसा दिखाने से जुड़े विषयों पर जानकारी जुटाई थी। हालांकि इन डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है।

छह दिन में गिरफ्तारी, एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप

18 जून को हुई घटना के बाद पुलिस ने छह दिनों के भीतर सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपी एक-दूसरे को कथित साजिश का मास्टरमाइंड बता रहे हैं। पुलिस दोनों को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ कर चुकी है।

31 मई को कथित रूप से बना प्लान, 18 जून को हुई मौत

पुलिस के अनुसार, केतन अग्रवाल को ट्रैकिंग और पहाड़ों पर घूमने का शौक था। जांच में दावा किया गया है कि इसी दौरान सिया के मन में लोहगढ़ किले को लेकर हत्या की योजना बनी। इसके बाद कई बार किले जाने का प्रयास किया गया और आखिरकार 18 जून को घटना हुई। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अदालत में आरोप सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाएंगे। पुणे पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े अन्य सबूतों को मजबूत करने में जुटी हुई है।