गुजरात: मेट्रीमोनियल साइट पर ‘आदित्य’ बनकर बिछाया जाल, करीम के लैपटॉप से 8 हजार फोटो-वीडियो बरामद
गुजरात के अहमदाबाद में मेट्रीमोनियल पोर्टल पर आदित्य पटेल बनकर महिलाओं को फंसाने वाले करीम रफीक भाई सिपाही को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में उसके लैपटॉप से 100 महिलाओं के 8000 फोटो-वीडियो और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क और आर्थिक मददगारों की जांच कर रही है।
अहमदाबाद (Threesocieties.com Desk): गुजरात में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां मेट्रीमोनियल पोर्टल पर खुद को ‘आदित्य पटेल’ बताकर महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाले करीम रफीक भाई सिपाही को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच के दौरान उसके मोबाइल और लैपटॉप से बड़ी मात्रा में फोटो, वीडियो और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिसके बाद पुलिस कई पहलुओं पर जांच कर रही है।
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पुलिस के अनुसार आरोपी ने मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर आदित्य पटेल के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर खुद को आईटी इंजीनियर और सफल कारोबारी बताया था। वह विशेष रूप से परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को निशाना बनाता था। आरोप है कि उसने कम से कम 20 महिलाओं को अपनी झूठी पहचान और भावनात्मक कहानियों के जरिए प्रभावित किया।
पत्नी और बेटा होने के बावजूद खुद को बताया विधुर
जांच में सामने आया है कि करीम शादीशुदा है और उसका 20 वर्षीय बेटा भी है। इसके बावजूद वह महिलाओं को यह बताता था कि उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है और वह निसंतान विधुर है। इसी सहानुभूति का फायदा उठाकर वह महिलाओं का विश्वास जीतने की कोशिश करता था।
मोबाइल और लैपटॉप से मिला चौंकाने वाला डेटा
अहमदाबाद अपराध शाखा की जांच में आरोपी के मोबाइल से 20 महिलाओं के फोटो और वीडियो मिले हैं। वहीं उसके लैपटॉप से करीब 100 महिलाओं से जुड़े 8000 फोटो और वीडियो बरामद किए गए हैं। पुलिस अब फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की मदद से इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
फर्जी दस्तावेजों का भी खुलासा
पुलिस को आरोपी के पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी मिले हैं। ड्राइविंग लाइसेंस आदित्य पटेल के नाम से बनाया गया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये दस्तावेज कहां और किसकी मदद से तैयार किए गए।
ट्रू कॉलर से खुली आरोपी की पोल
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक महिला ने पुलिस को सूचना दी। महिला के अनुसार आरोपी ने बातचीत के दौरान उससे 70 हजार रुपये की आर्थिक मदद मांगी थी। शक होने पर महिला ने उसका मोबाइल नंबर ट्रू कॉलर पर जांचा, जहां उसका असली नाम सामने आ गया। इसके बाद महिला ने अपराध शाखा को शिकायत दी और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
संभावित नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच बेहद संवेदनशीलता के साथ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। साथ ही उसे आर्थिक सहायता देने वाले लोगों की भी पहचान की जा रही है।
पीड़ित महिलाओं की पहचान रहेगी गोपनीय
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी भी पीड़ित महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। डिजिटल उपकरणों से बरामद सामग्री का विश्लेषण जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल अदालत ने आरोपी करीम रफीक भाई सिपाही को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जता रही है।






