झाारखंड: होटवार जेल मामले में बड़ा खुलासा: प्रेग्नेंट नहीं है महिला कैदी, मेडिकल रिपोर्ट ने खोली सच्चाई
रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला कैदी के गर्भवती होने और यौन शोषण के आरोपों के बीच मेडिकल रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। सदर अस्पताल की जांच में महिला कैदी के प्रेग्नेंट नहीं होने की पुष्टि हुई है, जिससे फैली अफवाहों पर विराम लग गया है।
रांची (Threesocieties.com Desk): राजधानी रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जुड़े कथित यौन शोषण और महिला कैदी के गर्भवती होने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले कई दिनों से यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ था। जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, महिला कैदियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। लेकिन अब सामने आई मेडिकल रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी है।
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जानकारी के अनुसार, जेल में बंद 23 वर्षीय महिला कैदी ने कुछ दिन पहले पेट में तेज दर्द की शिकायत की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जेल प्रशासन ने बिना देर किए उसे रांची सदर अस्पताल भेजा। वहां डॉक्टरों की टीम ने युवती की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की। जांच में अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी मेडिकल प्रक्रियाएं शामिल थीं।
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जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि महिला कैदी गर्भवती नहीं है। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा कि पेट दर्द की वजह गर्भावस्था नहीं, बल्कि दूसरी शारीरिक समस्या थी। मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद उन तमाम दावों और चर्चाओं पर विराम लग गया, जिनमें महिला कैदी के गर्भवती होने की बात कही जा रही थी।
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दरअसल, बीते दिनों सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हुई थी कि जेल के भीतर महिला कैदी के साथ कथित तौर पर यौन शोषण हुआ है और वह गर्भवती हो गई है। खबर सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार और जेल प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की आलोचना होने लगी थी।
हालांकि अब मेडिकल रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट आने के बाद जेल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों का कहना है कि बिना पुष्टि के फैलाई गई अफवाहों ने जेल प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया। प्रशासन का दावा है कि महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर जेल में सभी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है।
वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन अब सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों की भी जांच कर सकता है। अधिकारियों का मानना है कि अधूरी जानकारी और अपुष्ट दावों के कारण स्थिति अनावश्यक रूप से संवेदनशील बन गई थी।
फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया है कि महिला कैदी के गर्भवती होने की खबर पूरी तरह गलत थी। अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप पर भी विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।






