झारखंड: सारंडा में ऑपरेशन ‘मेगाबुरु: एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत 15 माओवादी मारे गये

झारखंड के सारंडा जंगल में ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ के तहत सुरक्षाबलों ने 1 करोड़ के इनामी माओवादी अनल दा समेत 15 नक्सलियों को ढेर किया। यह झारखंड के 25 वर्षों का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन माना जा रहा है।

झारखंड: सारंडा में ऑपरेशन ‘मेगाबुरु: एक करोड़ के इनामी अनल दा समेत 15 माओवादी मारे गये
अनल दा उर्फ पतिराम मांझी (फाइल फोटो)।
  • हथियारों का जखीरा बरामद

चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा के घने जंगलों में गुरुवार को सुरक्षाबलों ने नक्सल उन्मूलन अभियान में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। विशेष अभियान ‘मेगाबुरु’ के तहत हुई भीषण मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी मेंबर और एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी समेत कुल 15 माओवादियों को मार गिराया गया।

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यह मुठभेड़ छोटानागरा / किरीबुरु थाना क्षेत्र में हुई, जहां कोबरा-209 बटालियन, सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।

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सुबह 6.30 बजे शुरू हुई मुठभेड़, घंटों चली गोलीबारी

गुरुवार सुबह करीब 6.30 बजे सुरक्षाबलों की टीम जैसे ही जंगल में नक्सलियों के ठिकाने के करीब पहुंची, खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। यह मुठभेड़ कई घंटों तक चली, जिसमें अनल दा के दस्ते की कोबरा-209 बटालियन से सीधी भिड़ंत हुई।

हथियार, विस्फोटक और सामान बरामद

मुठभेड़ स्थल से 15 माओवादियों के शव, अत्याधुनिक ऑटोमैटिक हथियार, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री व  दैनिक उपयोग के सामान बरामद किये हैं। प्रारंभिक जांच में 11 माओवादियों की पहचान कर ली गई है। इनमें भाकपा (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर अनल दा के अलावा अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, राजेश मुंडा, बुलबुल अयदा, बबीता, पूर्णिमा, सुरजमुनी और जोंगा शामिल हैं। इन सभी पर झारखंड, ओडिशा और केंद्रीय एजेंसियों के दर्जनों गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। कई नक्सली लंबे समय से मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थे। इलाके में हिंसक वारदातों के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे थे।

 मारे गये 15 माओवादियों में 11 की हुई पहचान
अनल उर्फ पतिराम मांझी (सेंट्रल कमेटी सदस्य) : झारखंड में एक करोड़ रुपये का इनामी (झारखंड), ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख रुपये का इनामी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी में 15 लाख रुपये का इनामी है। इसपर कुल 149 कांड हैं। यह झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के झरहा गांव का था।।
अनमोल उर्फ सुशांत (बिहार झारखंड स्पेशन एरिया कमेटी सदस्य) : झारखंड में 25 लाख रुपये का इनामी, ओडिशा में 65 लाख रुपये का इनामी है। इसपर कुल 149 कांड दर्ज हैं। यह झारखंड के बोकारो जिले के नावाडीह थाना क्षेत्र के बंसी टोला का रहने वाला था।
अमित मुंडा (रीजनल कमेटी सदस्य) : यह झारखंड में 15 लाख रुपये का इनामी है। इसपर ओडिशा में 43 लाख रुपये का इनाम व राष्ट्रीय जांच एजेंसी में चार लाख रुपये का इनाम है। इसके विरुद्ध कुल 96 दर्ज हैं। यह रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र के तमराना गांव का निवासी था।
पिंटू लोहरा (सब जोनल कमांडर) : यह झारखंड में पांच लाख रुपये का इनामी है। इसपर कुल 47 कांड दर्ज हैं। यह मूल रूप से झारखंड के रांची जिले के सोनाहातू थाना क्षेत्र के बारीसालडीह का रहने वाला था।
लालजीत उर्फ लालु (सब जोनल कमांडर) : यह झारखंड में पांच लाख रुपये का इनामी है। यह मूल रूप से पश्चिमी सिंहभूम जिले के किरीबुरू थाना क्षेत्र के धारणादिरी का रहने वाला।
राजेश मुंडा (एरिया कमेटी सदस्य) : इसपर कुल 14 कांड हैं। यह खूंटी जिले के अड़की थाना क्षेत्र के माईलपिड़ी गांव का निवासी था।
बुलबुल अलदा (एरिया कमेटी सदस्य) : इसपर कुल आठ कांड दर्ज हैं। यह पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर थाना क्षेत्र के ईलीगढ़ा का रहने वाला था।
बबिता (एरिया कमेटी सदस्य) : इसपर कुल 16 कांड दर्ज हैं। यह सरायकेला-खरसांवा जिले के कुचाई थाना क्षेत्र के कोर्रा की रहने वाली थी।
पूर्णिमा (एरिया कमेटी सदस्य) : इसपर कुल पांच कांड दर्ज हैं। यह पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोईलकेरा थाना क्षेत्र के ईचागोड़ा की रहने वाली थी।
सूरजमुनी : सदस्य।
जोंगा (सदस्य) : इसपर एक केस है। यह पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोईलकेरा थाना क्षेत्र के बोईपाई की रहने वाली थी।
समीर सोरेन : सदस्य।
सोमवारी : सदस्य।

 कौन था अनल दा? माओवादी संगठन का बड़ा रणनीतिकार

विशेष अभियान ‘मेगाबुरु’ के तहत हुई भीषण मुठभेड़ में मारा गया नक्सली नेता अनल दा उर्फ पतिराम मांझी भाकपा (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था और संगठन का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था।

नक्सली गतिविधियों में 1987 से सक्रिय

झारखंड में 1 करोड़, ओडिशा में 1.20 करोड़ और NIA द्वारा 15 लाख का इनाम

IED ब्लास्ट, हत्या, हथियार लूट और सुरक्षाबलों पर हमलों में सीधी भूमिका

गिरिडीह, सारंडा, कोल्हान बेल्ट में नेटवर्क मजबूत करने वाला चेहरा

उसके खात्मे को माओवादी संगठन के लिए गंभीर रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अनल दा के मारे जाने से माओवादी संगठन की रणनीतिक क्षमता कमजोर हुई है। सारंडा–कोल्हान क्षेत्र में उनका नेटवर्क बिखर गया है। झारखंड में बड़े कद के माओवादी अब गिने-चुने रह गये हैं। पुलिस ने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील भी की है।

झारखंड में बड़े माओवादी लगभग खत्म

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के बाद झारखंड में बड़े कद के माओवादी नेता न के बराबर बचे हैं। यह कार्रवाई राज्य गठन के बाद नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा सफल ऑपरेशन माना जा रहा है।

झारखंड के 25 वर्षों में सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन

मुठभेड़ के बाद पूरे सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अतिरिक्त बलों की तैनाती के साथ घने जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि भागे हुए नक्सलियों को पकड़ा जा सके। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में माओवादियों का एक साथ मारा जाना झारखंड के इतिहास में अभूतपूर्व है। इसे सारंडा–कोल्हान बेल्ट में माओवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।

 पहले भी ढेर हो चुके हैं बड़े नक्सली

इससे पहले भी झारखंड में कई एक करोड़ के इनामी माओवादी मारे गये या पकड़े गये हैं—

प्रशांत बोस – पोलित ब्यूरो सदस्य (गिरफ्तार)

सुधाकर – CCM (सरेंडर)

प्रयाग मांझी उर्फ विवेक – मुठभेड़ में मारा गया (अप्रैल 2025)

अनुज उर्फ सहदेव सोरेन – मुठभेड़ में मारा गया (सितंबर)

आज अनल दा का खात्मा उसी कड़ी की सबसे बड़ी कड़ी बन गया है।

कई नामों से जाना जाता था पतिराम

विशेष अभियान ‘मेगाबुरु’ के तहत हुई भीषण मुठभेड़ में मारे गए नक्सली नेता का असली नाम पतिराम था। लेकिन वह अपने संगठन में अनल दा, तूफान, रमेश और गोपाल दा जैसे कई नामों से जाना जाता था। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र का रहने वाला था। भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी का अहम सदस्य माना जाता था।

भाकपा माओवादी संगठन का बड़ा रणनीतिकार

अनल दा को माओवादी संगठन का बड़ा रणनीतिकार माना जाता था। नक्सली हमले कहां और कैसे करना है? इसकी प्लानिंग वही तैयार करता था। इसी कारण से वह लंबे समय से सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में शामिल था। अनल दा लगभग 1987 से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। उसने पीरटांड़ इलाके से अपने नेटवर्क की शुरुआत की और धीरे-धीरे झारखंड और बिहार के कई जिलों में संगठन का विस्तार किया।1987 से 2000 के बीच पीरटांड़, टुंडी और तोपचांद क्षेत्रों में वह गोपाल दा के नाम से काफी प्रभावशाली हो गया था। उस दौर में इन इलाकों में नक्सलवाद चरम पर था। पुलिस के साथ-साथ ग्रामीण भी उससे खौफ खाते थे।

जेल गया, बाहर आते ही दोबारा नक्सली गतिविधियों में हुआ एक्टिव

संगठन ने वर्ष 2000 में संगठन ने अनल दा को बिहार के जमुई भेजा था। वहां वह एक बार गिरफ्तार हुआ और बाद में गिरिडीह जेल लाया गया। बेल पर बाहर आने के बाद उसने फिर से नक्सली गतिविधियां शुरू कर दीं। जेल से बाहर आने के बाद उसकी पकड़ संगठन में और मजबूत हो गयी। जेल से रिहा होने के बाद अनल दा को रांची और गुमला जिले की जिम्मेदारी सौंपी गयी। यहां उसने संगठन को नए सिरे से मजबूत किया। उसकी रणनीतिक समझ और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उसे भाकपा माओवादी की केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया। झारखंड में नक्सली हिंसा के पीछे अनल दा की बड़ी भूमिका रही है। उसकी मौत से माओवादी संगठन को गहरा झटका लगा है। माना जा रहा है कि इससे झारखंड में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और सुरक्षाबलों का मनोबल और मजबूत होगा।

कैसे हुई मुठभेड़?

गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे, सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने सारंडा जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खुद को घिरा देख माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में घंटों चली मुठभेड़ के बाद 15 माओवादी मारे गये। कुछ नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, जिनकी तलाश जारी है।

गांव में सन्नाटा, डर और खामोशी

अनल दा की मौत की खबर के बाद उसके पैतृक गांव दीवानडीह झरहा (गिरिडीह) में सन्नाटा पसरा है। खपरैल के मकान, बंद दरवाजे और चुप्पी इस बात की गवाही देते हैं कि उग्रवाद की जड़ें सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन से भी जुड़ी हैं।