धनबाद में बड़ा फर्जीवाड़ा! डीसी के नकली साइन से अल्ट्रासाउंड लाइसेंस लेने की कोशिश, डॉक्टर पर गंभीर आरोप

धनबाद में पीसीपीएनडीटी लाइसेंस हासिल करने के लिए पूर्व डीसी संदीप सिंह के फर्जी हस्ताक्षर इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। किडनी केयर अस्पताल के संचालक डॉ. मिहिर झा पर गंभीर आरोप लगे हैं। डीसी आदित्य रंजन ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

धनबाद में बड़ा फर्जीवाड़ा! डीसी के नकली साइन से अल्ट्रासाउंड लाइसेंस लेने की कोशिश, डॉक्टर पर गंभीर आरोप
पूर्व डीसी के नकली सिग्नेचर से आवेदन, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप।
  • पूर्व डीसी के नकली सिग्नेचर से किडनी केयर के संचालक डॉ. मिहिर झा ने दिया आवेदन
  • अल्ट्रासाउंड मशीन के लाइसेंस के लिए बड़ा फर्जीवाड़ा, डॉक्टर से कड़ी पूछताछ

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। किडनी केयर अस्पताल के संचालक डॉ. मिहिर कुमार झा पर पूर्व उपायुक्त (डीसी) संदीप सिंह के फर्जी हस्ताक्षर कर पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) लाइसेंस हासिल करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगा है। मामले के सामने आते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

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वर्तमान उपायुक्त आदित्य रंजन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जांच कमेटी का गठन कर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।

जनवरी 2026 में किया गया था आवेदन

जानकारी के अनुसार, किडनी केयर अस्पताल, जो अशर्फी अस्पताल और बिरसा मुंडा पार्क के समीप स्थित है, के संचालक डॉ. मिहिर कुमार झा ने जनवरी 2026 में अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के लिए पीसीपीएनडीटी लाइसेंस हेतु आवेदन किया था। आवेदन के साथ एक ऐसा पत्र संलग्न किया गया, जिस पर तत्कालीन डीसी संदीप सिंह के हस्ताक्षर बताए गए थे। लेकिन जब सिविल सर्जन कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की गई, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।

जांच में खुला फर्जीवाड़े का राज

नियमों के अनुसार, अल्ट्रासाउंड मशीन की अनुमति देने से पहले पीसीपीएनडीटी कमेटी की आधिकारिक बैठक होना जरूरी होता है। लेकिन रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि ऐसी कोई बैठक आयोजित ही नहीं हुई थी। इतना ही नहीं, जिस पत्र पर हस्ताक्षर थे, वह वर्तमान डीसी के बजाय पूर्व डीसी संदीप सिंह के नाम से था। इसके बाद अधिकारियों को दस्तावेजों पर संदेह हुआ और मामले की जांच शुरू की गई।

डॉक्टर ने झाड़ा पल्ला

पूछताछ के लिए सिविल सर्जन कार्यालय बुलाए गए डॉ. मिहिर झा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे कोई दस्तावेज जमा ही नहीं किए हैं। हालांकि प्रशासन उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिस पत्र पर पूर्व डीसी के कथित फर्जी हस्ताक्षर हैं, उसके बगल में मौजूद हस्ताक्षर डॉ. मिहिर के वास्तविक हस्ताक्षरों से काफी मेल खाते हैं। इसी आधार पर जांच एजेंसियां मामले को गंभीर मानकर आगे बढ़ रही हैं।

फॉरेंसिक जांच भी होगी

स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच टीम अब पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी में है। दस्तावेजों की विभागीय और तकनीकी स्तर पर जांच की जा रही है। अगले एक-दो दिनों में जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपे जाने की संभावना है।

जालसाजी साबित हुई तो होगी बड़ी कार्रवाई

यदि जांच में फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों की पुष्टि होती है, तो डॉ. मिहिर झा के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग की धाराओं में केस दर्ज हो सकता है। साथ ही अस्पताल के लाइसेंस और संचालन पर भी बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में पीसीपीएनडीटी लाइसेंस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।