बिहार: खान सर फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: मारपीट के 20 मिनट बाद चली गोली, ‘सेल्फ डिफेंस’ की थ्योरी पर सवाल
पटना के चर्चित खान सर फायरिंग केस में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की केस डायरी के अनुसार मारपीट की घटना के 20 मिनट बाद बॉडीगार्ड्स ने गोली चलाई थी। CCTV फुटेज और पुलिस जांच के बाद आत्मरक्षा का दावा सवालों के घेरे में है। 20 जून को गिरफ्तारी रोक अवधि समाप्त होने से मामले में नया मोड़ आ सकता है।
पटना (Threesocieties.com Desk): चर्चित शिक्षक और खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर एक बार फिर कानूनी विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। दो जून की रात हुई फायरिंग की घटना को लेकर पुलिस की केस डायरी में हुए नए खुलासे ने उनके पक्ष को कमजोर कर दिया है। जांच में सामने आया है कि मारपीट और तोड़फोड़ की घटना के लगभग 20 मिनट बाद गोली चलाई गई थी, जिससे आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) का दावा संदेह के घेरे में आ गया है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह फायरिंग तत्काल खतरे से बचने के लिए नहीं, बल्कि इलाके में दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है। इसी वजह से मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
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CCTV फुटेज ने बदली जांच की दिशा
घटना के बाद दर्ज कराई गई प्राथमिकी में फायरिंग का कोई जिक्र नहीं था। खान सर के मैनेजर द्वारा दर्ज कराए गए आवेदन में केवल मारपीट और तोड़फोड़ की बात कही गई थी। हालांकि, पुलिस ने जब आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो उसमें खान सर के दोनों बॉडीगार्ड्स प्रदीप और तालेबर सिंह हथियार से फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया और फायरिंग के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू की।
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आत्मरक्षा के दावे पर पुलिस ने उठाए सवाल
फुटेज सामने आने के बाद खान सर की ओर से कहा गया कि गोलीबारी आत्मरक्षा में की गई थी। लेकिन पुलिस की केस डायरी में दर्ज तथ्यों के अनुसार मारपीट की घटना रात 10:10 बजे हुई, जबकि गोली लगभग 10:30 बजे चलाई गई।पुलिस का तर्क है कि यदि तत्काल जान का खतरा था तो फायरिंग उसी समय होती। 20 मिनट के अंतराल के कारण आत्मरक्षा की दलील कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि पुलिस ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।
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बॉडीगार्ड्स के बयान से बढ़ी मुश्किलें
जांच के दौरान हिरासत में लिए गए दोनों अंगरक्षकों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि फैजल खान के निर्देश पर फायरिंग की थी। हालांकि इन बयानों की सत्यता का अंतिम फैसला अदालत में होगा, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने फैजल खान और दोनों बॉडीगार्ड्स के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
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20 जून पर टिकी सबकी नजर
इस पूरे मामले में 20 जून बेहद महत्वपूर्ण तारीख मानी जा रही है। इसी दिन खान सर की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक की अवधि समाप्त हो रही है। साथ ही उनके दोनों बॉडीगार्ड्स की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह 20 जून या उससे पहले हर हाल में केस डायरी प्रस्तुत करे। ऐसे में अदालत के सामने पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की अहम परीक्षा होगी।
अदालत में साबित करना होगा ‘सेल्फ डिफेंस’
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मरक्षा का दावा केवल बयान देने भर से स्वीकार नहीं होता। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि घटना के समय तत्काल और गंभीर खतरा मौजूद था तथा हमलावर ऐसे हथियारों से लैस थे जिनसे जान को वास्तविक खतरा था।यदि बचाव पक्ष यह साबित नहीं कर पाता, तो फायरिंग को गैरजरूरी बल प्रयोग माना जा सकता है।
रौशन आनंद करेंगे अदालत का रुख
मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब रौशन आनंद ने पुलिस पर शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया। उनके वकील निरंजन कुमार सिंह ने कहा है कि अब वे सीधे अदालत में परिवाद (कंप्लेंट केस) दायर करेंगे। रौशन आनंद ने फैजल खान और कोल्ड स्टोरेज व्यवसायी डॉ. आरएस प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके भाई प्रिंस यादव की नेपाल में साजिश के तहत हत्या कराई गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में बंद प्रदीप और तालेबर सिंह के माध्यम से उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
क्या होगा अगला कदम?
फिलहाल इस मामले की निगाहें 20 जून की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में पेश होने वाली केस डायरी, CCTV फुटेज और दोनों पक्षों के तर्क यह तय करेंगे कि खान सर को आगे कानूनी राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी। बिहार के चर्चित मामलों में शामिल यह केस आने वाले दिनों में और अधिक सुर्खियां बटोर सकता है।






