“एक अफसर, तीन ताज! झारखंड में ‘पावर’ पर सवाल—हाईकोर्ट पहुंचा IAS के. श्रीनिवासन का मामला”

झारखंड हाई कोर्ट में IAS के. श्रीनिवासन की ऊर्जा सचिव, JUVNL CMD और JBVNL MD के तीन पदों पर नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिका में हितों के टकराव और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

“एक अफसर, तीन ताज! झारखंड में ‘पावर’ पर सवाल—हाईकोर्ट पहुंचा IAS के. श्रीनिवासन का मामला”
झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की नौकरशाही में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां एक ही आईएएस अधिकारी को तीन-तीन अहम पद सौंपे जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मुद्दे ने अब कानूनी रूप ले लिया है और मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।

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आईएएस अधिकारी के. श्रीनिवासन को ऊर्जा सचिव के साथ-साथ झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) के CMD और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के प्रबंध निदेशक (MD) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी नियुक्ति को चुनौती देते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

हाईकोर्ट में क्या है याचिका का आधार?

याचिकाकर्ता अब्दुल बारी ने अदालत में दायर याचिका में राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक ही अधिकारी को तीन महत्वपूर्ण पद देना नियमों के खिलाफ है। यह IAS कैडर नियमावली 1954 और मौलिक नियम FR-49 का उल्लंघन है। इससे प्रशासनिक संतुलन और पारदर्शिता प्रभावित होती है।
 ‘हितों के टकराव’ का बड़ा मुद्दा

याचिका में सबसे बड़ा सवाल Conflict of Interest (हितों के टकराव) को लेकर उठाया गया है।

ऊर्जा सचिव नीति बनाते हैं
JUVNL के CMD उत्पादन और प्रबंधन देखते हैं
JBVNL के MD वितरण और उपभोक्ता सेवाओं की जिम्मेदारी संभालते हैं

ऐसे में एक ही व्यक्ति द्वारा तीनों भूमिकाएं निभाना निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। याचिका में इसे भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के खिलाफ भी बताया गया है।

प्रशासनिक क्षमता पर भी उठे सवाल

याचिका में कहा गया है कि ये तीनों पद फुल-टाइम जिम्मेदारी वाले हैं। एक अधिकारी पर इतना बोझ डालना कार्यकुशलता को प्रभावित करेगा, इससे फैसलों की गुणवत्ता और कार्यान्वयन दोनों पर असर पड़ेगा।
पुराने विवादों का भी जिक्र

याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग में कार्यकाल के दौरान विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने श्रीनिवासन की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (CR) में नकारात्मक टिप्पणी की थी जिसमें टेंडर प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल थे।

 किन्हें बनाया गया प्रतिवादी?

इस मामले में झारखंड के कार्मिक विभाग के सचिव और  IAS के. श्रीनिवासन को प्रतिवादी बनाया गया है।

अब क्या होगा आगे?

यह मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यदि अदालत इस नियुक्ति को नियमों के खिलाफ पाती है, तो राज्य सरकार के प्रशासनिक फैसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है।