छत्तीसगढ़ में है गैंगस्टर फहीम खान की मां और मौसी की हत्या का आरोपी भगोड़ा शब्बीर आलम , पुलिस रेड से पहले फरार

धनबाद के चर्चित वासेपुर गैंगवार और 2001 के डबल मर्डर केस के दोषी शब्बीर आलम का सुराग छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में मिला, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

छत्तीसगढ़ में है गैंगस्टर फहीम खान की मां और मौसी की हत्या का आरोपी भगोड़ा शब्बीर आलम , पुलिस रेड से पहले फरार
शब्बीर आलम पुलिस को फिर चकमा देकर फरार।

     HighLights:

  • 2001 में फहीम खान की मां और मौसी की हत्या मामले में दोषी है शब्बीर आलम
  • धनबाद पुलिस ने छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में की थी गिरफ्तारी की कोशिश
  • पुलिस पहुंचने से पहले ही फरार हो गया सजायाफ्ता अपराधी शब्बीर
  • 2018 में कोर्ट ने शब्बीर समेत सात आरोपियों को सुनाई थी उम्रकैद की सजा
  • वासेपुर गैंगवार में रंगदारी, कोयला और स्क्रैप कारोबार को लेकर हुई थीं कई हत्याएं

धनबाद (Threesocieties.com Desk): वासेपुर की खूनी गैंगवार से जुड़े ढाई दशक पुराने चर्चित दोहरे हत्याकांड के सजायाफ्ता आरोपी शब्बीर आलम का सुराग आखिरकार छत्तीसगढ़ में मिला, लेकिन धनबाद पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह एक बार फिर फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

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धनबाद के वासेपुर में वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में अपराध जगत के दो बड़े नाम फहीम खान और शब्बीर आलम के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी थी। रंगदारी, एजेंटी, कोयला और स्क्रैप के अवैध कारोबार को लेकर दोनों गुटों के बीच कई खूनी घटनाएं हुई थीं। इसी गैंगवार की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक 18 अक्टूबर 2001 को हुई दोहरे हत्याकांड की वारदात थी।

उस दिन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून पुराना बाजार जा रही थीं। इसी दौरान डायमंड क्रॉसिंग के पास अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। हमले में दोनों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया था।

घटना के बाद शब्बीर लंबे समय तक फरार रहा। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह रांची और अन्य इलाकों में छिपकर रह रहा है। कई वर्षों की तलाश के बाद वर्ष 2013 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बावजूद मामला अदालत में चलता रहा और वर्ष 2018 में धनबाद की अदालत ने शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद समेत सात आरोपियों को इस मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के बावजूद शब्बीर पुलिस की पकड़ से बाहर बना रहा।

हाल ही में धनबाद पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि शब्बीर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सरगुजा जिले के मोमिनपुर इलाके में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा है। बताया जाता है कि वह वर्षों से फर्जी पहचान के सहारे सामान्य जीवन बिता रहा था। सूचना के आधार पर धनबाद पुलिस की एक टीम सादे लिबास में अंबिकापुर पहुंची और उसे पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू की। हालांकि, पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही शब्बीर वहां से फरार हो गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस को स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।

शब्बीर के फरार होने के बाद धनबाद पुलिस ने तत्काल सरगुजा पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पूरे इलाके में नाकाबंदी कर तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शब्बीर की गिरफ्तारी के लिए कई संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रंगदारी और अवैध कारोबार से शुरू हुई थी दुश्मनी

फहीम खान और शब्बीर आलम के बीच दुश्मनी अचानक नहीं हुई थी। दोनों के बीच कोयला, स्क्रैप, एजेंटी और रंगदारी के अवैध कारोबार पर वर्चस्व को लेकर लंबे समय से संघर्ष चल रहा था। यही संघर्ष धीरे-धीरे खूनी गैंगवार में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोगों की जान गई। वासेपुर की इस गैंगवार ने न सिर्फ धनबाद बल्कि पूरे झारखंड के अपराध जगत को प्रभावित किया था। आज भी इस गैंगवार से जुड़े कई मामले अदालतों और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

अब एक बार फिर शब्बीर आलम के सामने आने के बाद इस चर्चित गैंगवार की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं और लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर पुलिस इस बार उसे कब तक गिरफ्तार कर पाती है।