उत्तर प्रदेश: बाहुबली से धर्मध्वजवाहक बने बृजेश सिंह! 220 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास में बजाया डमरू
वाराणसी के पूर्व एमएलसी और बाहुबली नेता बृजेश सिंह का नया धार्मिक अवतार सामने आया है। 220 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास की आधारशिला के दौरान वे डमरू बजाते नजर आए। मंदिर का 30 करोड़ की लागत से भव्य कॉरिडोर और 108 फीट ऊंचा शिखर बनाया जाएगा।
- पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह अब धार्मिक अवतार में नजर आये
- काशी के 220 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास का बीड़ा उठाते हुए डमरू बजाते दिखे
वाराणसी (Threesocieties.com Desk): पूर्वांचल समेत उत्तर भारत की राजनीति और अपराध जगत में कभी दबंग छवि के लिए चर्चित रहे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह अब पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक रंग में रंगे नजर आ रहे हैं। कभी मुख्तार अंसारी के साथ अदावत को लेकर सुर्खियों में रहने वाले बृजेश सिंह अब काशी के 220 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास के ध्वजवाहक बन गए हैं।
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शुक्रवार को वाराणसी के असि घाट स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला रखी गई। इस दौरान कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती की अगुवाई में कार्यक्रम संपन्न हुआ, जहां बृजेश सिंह का अलग ही धार्मिक स्वरूप देखने को मिला। वे डमरू दल के बीच पहुंचे और स्वयं डमरू बजाते हुए नजर आए।
एक साल पहले ट्रस्ट से जुड़े, अब संभाली पुनर्निर्माण की कमान
वर्ष 1802 में असि घाट के पास भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर स्थापित किया गया था। यह मंदिर काशी की प्रसिद्ध रथयात्रा परंपरा का केंद्र माना जाता है। यहीं से निकलने वाली रथयात्रा को काशी के लक्खा मेलों में शामिल किया जाता है और इसे त्योहारों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
समय के साथ संसाधनों की कमी, आर्थिक अभाव और अतिक्रमण के कारण मंदिर की पुरानी भव्यता धीरे-धीरे समाप्त होती चली गई। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने करीब एक साल पहले बृजेश सिंह को अपने साथ जोड़ा और उन्हें ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया।ट्रस्ट से जुड़ने के बाद बृजेश सिंह ने मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने, जमीन बचाने और पूरे क्षेत्र को एक भव्य धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।
30 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य कॉरिडोर
मंदिर के पुनर्विकास के पहले चरण के लिए ट्रस्ट ने 30 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है। योजना के अनुसार मंदिर परिसर को एक विशाल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, भोजनालय और सेवा केंद्र भी बनाए जाएंगे। फिलहाल मंदिर के शिखर की ऊंचाई 36 फीट है, जिसे बढ़ाकर 108 फीट किया जाएगा। यह निर्माण भगवान राम मंदिर की तर्ज पर जनसहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही परिसर में ‘काशी अन्नक्षेत्र’ की तर्ज पर भक्तों, साधुओं और निराश्रितों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। पूरे प्रोजेक्ट को तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
डमरू बजाते दिखे बृजेश सिंह
वैसाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी 1 मई को आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में बृजेश सिंह अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह के साथ मौजूद रहे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वे डमरू दल के बीच पहुंचे और स्वयं डमरू बजाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कभी बाहुबली छवि के लिए चर्चित रहे बृजेश सिंह का यह आध्यात्मिक रूप लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीति और शक्ति प्रदर्शन से अलग अब वे धार्मिक पुनर्जागरण के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं।
काशी की धार्मिक विरासत को नया वैभव
जगन्नाथ मंदिर का यह पुनर्विकास केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास माना जा रहा है। ट्रस्ट का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में यह मंदिर फिर से उसी गौरव के साथ स्थापित हो, जैसा इसका इतिहास रहा है। बृजेश सिंह का यह नया अवतार यह भी दिखाता है कि समय के साथ व्यक्तित्व और प्राथमिकताएं कैसे बदलती हैं—जहां कभी शक्ति और राजनीति केंद्र में थी, वहीं अब धर्म और सेवा उनका नया परिचय बनता दिख रहा है।






