BCCL की महेशपुर साइलो प्लांट के नीचे ‘काला सुरंग नेटवर्क’! 350 करोड़ की परियोजना और रेलवे लाइन पर खतरा!
धनबाद के महेशपुर साइलो प्लांट के आसपास अवैध कोयला खनन ने बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। 350 करोड़ की परियोजना, रेलवे लाइन और 400 लोगों की आबादी भूमिगत सुरंगों के कारण खतरे में बताई जा रही है। CISF और BCCL की कार्रवाई में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
HighLights
- महेशपुर साइलो प्लांट के पास अवैध खनन से रेलवे लाइन और आबादी पर खतरा
- 350 करोड़ की परियोजना से महज 300 मीटर दूर मिले अवैध सुरंग नेटवर्क के संकेत
- बीसीसीएल, CISF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीसरी बार भरे गए मुहाने
- 400 से अधिक लोगों की आबादी खतरे के दायरे में, रेलवे पहले भी जता चुका है चिंता
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल में अवैध कोयला खनन का ‘ब्लैक टनल नेटवर्क’ एक बार फिर गंभीर चिंता का कारण बन गया है। इस बार मामला बरोरा क्षेत्र स्थित महेशपुर साइलो प्लांट के आसपास का है, जहां कथित तौर पर भूमिगत सुरंगों के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कोयला निकासी की जा रही थी। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि अब 350 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी साइलो परियोजना, रेलवे लाइन और आसपास रहने वाले करीब 400 लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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शनिवार को बीसीसीएल, बरोरा पुलिस और CISF की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर अवैध खनन से जुड़े कई मुहानों को बंद किया। बताया जा रहा है कि इन मुहानों के जरिए भूमिगत सुरंगें बनाकर कोयला निकाला जा रहा था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी दो बार ऐसे मुहाने भरे जा चुके हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
रेलवे लाइन और साइलो परियोजना पर बढ़ा खतरा
जानकारी के अनुसार, जिस इलाके में अवैध खनन चल रहा था, वहां से धनबाद–चंद्रपुरा रेलखंड की डबल रेलवे लाइन लगभग 300 मीटर की दूरी पर है। वहीं साइलो प्लांट का रेलवे ट्रैक कथित अवैध खनन मुहानों से लगभग 100 मीटर दूर बताया जा रहा है। इस रेलखंड से प्रतिदिन दो दर्जन से अधिक यात्री ट्रेनें और करीब 20 मालगाड़ियां गुजरती हैं। ऐसे में यदि भूमिगत सुरंगों से जमीन कमजोर हुई तो भविष्य में भू-धसान या रेलवे ट्रैक प्रभावित होने जैसी आशंकाएं बढ़ सकती हैं।

400 लोगों की आबादी खतरे के घेरे में
नौ सीम क्वार्टर कॉलोनी में रहने वाले करीब 400 लोग भी इस पूरे खतरे के दायरे में बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी को ठीक-ठीक अंदाजा नहीं है कि जमीन के नीचे सुरंगें आखिर कितनी दूर तक फैल चुकी हैं।
‘जोरिया’ की धारा बदलने का भी आरोप
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अवैध खनन को सुचारू रखने के लिए तस्करों ने साइलो परिसर के पास बहने वाली जोरिया की दिशा तक बदल दी, ताकि पानी खदानों में प्रवेश न कर सके और भूमिगत उत्खनन जारी रहे। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रेलवे पहले भी जता चुका था खतरा
महेशपुर साइलो के आसपास बढ़ती अवैध गतिविधियों को लेकर रेलवे विभाग पहले भी चिंता जता चुका है। बताया जाता है कि रेलवे की ओर से बीसीसीएल प्रबंधन को पत्र भेजकर ट्रैक और संबंधित संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर आशंका व्यक्त की गई थी। इसके बाद संयुक्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
सीएमडी के निरीक्षण के बाद तेज हुई कार्रवाई
तीन दिन पहले बीसीसीएल के सीएमडी ने महेशपुर साइलो परियोजना का निरीक्षण किया था और एक महीने के भीतर परियोजना को चालू करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया।
20 दिनों बाद फिर लौटा ‘काला कारोबार’
इधर बाघमारा क्षेत्र में भी लगभग 20 दिनों की शांति के बाद फिर से अवैध कोयला कारोबार सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने अंबे आउटसोर्सिंग के कांटा घर के पीछे झाड़ियों में छिपाकर रखे गए लगभग 31 टन अवैध कोयला बरामद किया। इस कार्रवाई में कंपनी कमांडर, पोस्ट कमांडर, QRT और आसूचना टीम शामिल रही। बरामद कोयले को जब्त कर प्रबंधन को सौंप दिया गया।
जवाब मांगते बड़े सवाल
तस्करों ने जमीन के नीचे आखिर कितनी दूर तक सुरंगें बना ली हैं?
दो बार मुहाने भरने के बावजूद अवैध खनन फिर कैसे शुरू हो जाता है?
लाखों रुपये के इस कथित कारोबार के पीछे कौन लोग हैं?
तीन वर्षों में बड़ी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
क्या भूमिगत सुरंगें रेलवे लाइन और कॉलोनी तक पहुंच चुकी हैं?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ लोगों के लालच की वजह से हजारों लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। यदि समय रहते व्यापक जांच, मजबूत सुरक्षा और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।






