दिल्ली हर्ष फायरिंग केस में बिहार के BJP MLA राजू कुमार सिंह दोषी करार, कोर्ट ने भेजा हिरासत में, 9 जून को सजा
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2018 हर्ष फायरिंग केस में भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। महिला डॉक्टर की मौत के मामले में कोर्ट ने हिरासत में लेने का आदेश दिया, जबकि पत्नी समेत तीन आरोपी बरी हो गए।
HighLights
- दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने BJP विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराया
- 2018 न्यू ईयर पार्टी में हर्ष फायरिंग से हुई थी महिला डॉक्टर की मौत
- कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत माना दोषी
- दोषसिद्धि के बाद विधायक को हिरासत में लेने का आदेश
- 9 जून को होगी सजा पर सुनवाई
नई दिल्ली/पटना ( Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति और भाजपा के लिए बड़ा झटका सामने आया है। साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए तत्काल हिरासत में लेने का आदेश जारी किया। अब इस मामले में 9 जून को सजा सुनाई जाएगी।
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यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिहार की राजनीति पहले से कई मुद्दों पर गर्म है। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
न्यू ईयर पार्टी में चली गोली, महिला डॉक्टर की गई जान
पूरा मामला 31 दिसंबर 2018 की रात आयोजित न्यू ईयर पार्टी से जुड़ा है। आरोपों के अनुसार दक्षिण दिल्ली के एक फार्महाउस में जश्न के दौरान की गई हर्ष फायरिंग में चली गोली महिला चिकित्सक डॉ. अर्चना गुप्ता को लगी थी।गोली लगने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाना में मामला दर्ज हुआ और यह केस राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं को लेकर उस समय भी गंभीर सवाल उठे थे कि आखिर सार्वजनिक आयोजनों में हथियारों का प्रदर्शन और लापरवाही कब तक जारी रहेगी।
लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला
करीब आठ वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और अभियोजन पक्ष की दलीलों के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि राजू कुमार सिंह की भूमिका अपराध में स्थापित होती है।कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-2 के तहत दोषी माना। यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां आरोपी को यह जानकारी होती है कि उसके कार्य से किसी की मौत हो सकती है, लेकिन हत्या की स्पष्ट मंशा साबित नहीं होती।इसके अलावा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत भी दोषी ठहराया।
पत्नी समेत तीन सह-आरोपियों को राहत
अदालत ने इस मामले में विधायक की पत्नी रेनू सिंह सहित तीन अन्य आरोपियों को राहत दी है।कोर्ट ने रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इनके खिलाफ आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हो सके।
अभियोजन ने कहा- साक्ष्य स्पष्ट, बचाव ने बताया निर्दोष
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि गवाहों के बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितियां स्पष्ट रूप से आरोपी की भूमिका को साबित करती हैं।वहीं बचाव पक्ष लगातार यह दलील देता रहा कि विधायक निर्दोष हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
9 जून को सजा पर सुनवाई, राजनीतिक असर संभव
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण सजा निर्धारण का है। अदालत ने 9 जून को सजा पर सुनवाई की तारीख तय की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत कड़ी सजा सुनाती है तो इसका असर केवल विधायक के राजनीतिक करियर पर नहीं बल्कि बिहार की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। फैसले के बाद विपक्ष भाजपा पर हमलावर हो गया है, हालांकि खबर लिखे जाने तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
हर्ष फायरिंग पर सख्त संदेश
राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला केवल एक राजनीतिक व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं बल्कि हर्ष फायरिंग जैसी खतरनाक प्रवृत्ति के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।अदालत ने स्पष्ट किया कि लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हथियारों के इस्तेमाल से किसी की जान जाती है तो कानून ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेगा। अब सबकी नजर 9 जून पर टिकी है, जब अदालत यह तय करेगी कि दोषी विधायक को कितनी सजा मिलेगी।






