झारखंड भाजपा की नई टीम पर बवाल: पुराने चेहरों का कब्जा, हारे-निष्क्रिय नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी!

झारखंड भाजपा की नई प्रदेश कमेटी में पुराने नेताओं का दबदबा, हारे और निष्क्रिय चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर उठे सवाल।

झारखंड भाजपा की नई टीम पर बवाल: पुराने चेहरों का कब्जा, हारे-निष्क्रिय नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी!
निष्क्रिय और चुनाव हारे नेताओं को भी पद मिले।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड भाजपा की नई प्रदेश कमेटी के गठन के साथ ही संगठन के भीतर और बाहर सवालों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा घोषित इस कमेटी में पुराने चेहरों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।

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नई कमेटी के 24 सदस्यों में से 13 सदस्य ऐसे हैं, जो पिछली कमेटी में भी शामिल थे। यानी आधे से ज्यादा पदों पर वही चेहरे दोबारा नजर आ रहे हैं। यह कमेटी पूर्व अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल की निरंतरता जैसी दिख रही है।

पुराने चेहरों पर ज्यादा भरोसा

प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए राकेश प्रसाद राज्य गठन (2000) के समय से ही किसी न किसी पद पर सक्रिय रहे हैं। वहीं नीलकंठ सिंह मुंडा और आभा महतो को भी फिर से उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि इनकी सक्रियता पर सवाल उठते रहे हैं। बालमुकुंद सहाय को तीसरी बार उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि हालिया निकाय चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। मनोज सिंह, बालमकुंद सहाय व भानु प्रताप शाही तीनों पलामू प्रमंडल से ही हैं। तीनों पहले भी पदाधिकारी रह चुके हैं। 

हारे हुए नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी

नई कमेटी में कई ऐसे नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है, जो हाल के चुनावों में हार चुके हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:

भानु प्रताप शाही
गीता कोड़ा
गणेश मिश्रा
नीलकंठ सिंह मुंडा

इन नामों को शामिल किए जाने पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या संगठन में नए और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है?

नए चेहरे भी, लेकिन प्रभाव पर सवाल

हालांकि पार्टी ने कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया है, लेकिन उनकी जमीनी पकड़ को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शालिनी बैसखियार और कृष्णा महतो जैसे नामों को पहली बार प्रदेश स्तर पर जगह मिली है, जिन्हें कई वरिष्ठ नेता भी कम जानते हैं।

 विवादों के बीच भी मिला मौका

धनबाद में लोकसभा व विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी कैंडिडेट के खिलाफ जाने वाले एक नेता को फिर से पदाधिकारी बनाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि संबंधित नेता क्षेत्र में मेयर चुनाव में पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ा था। नेताजी के वार्ड व बूथ में कैंडिडेट पूरी तरह पिछल गयी थी।

पदों का फेरबदल, चेहरे वही

प्रदीप वर्मा को महामंत्री से उपाध्यक्ष बना दिया गया, जबकि गीता कोड़ा को प्रवक्ता से प्रमोट कर उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे साफ है कि बदलाव सिर्फ पदों का हुआ है, चेहरे वही हैं।

कोषाध्यक्ष और कार्यालय मंत्री बरकरार

प्रदेश कोषाध्यक्ष दीपक बंका और कार्यालय मंत्री हेमंत दास को उनके पद पर बरकरार रखा गया है। संगठन के अंदर यह चर्चा है कि उनके मजबूत संपर्कों ने उन्हें पद पर बनाए रखा।

 ब्रह्मर्षि समाज को उपाध्यक्ष या महामंत्री जैसे प्रमुख पदों पर जगह नहीं

झारखंड भाजपा के नई टीम में ब्रह्मर्षि (भूमिहार) समाज को उपाध्यक्ष या महामंत्री जैसे प्रमुख पदों पर जगह नहीं मिलने से असंतोष की चर्चा भी शुरू हो गई है। पिछली टीम में कालीचरण सिंह उपाध्यक्ष थे, लेकिन इस बार समाज से किसी को जगह नहीं मिली। इससे ब्रह्मर्षि (भूमिहार) समाज के लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। 

अध्यक्ष का बचाव

प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कमेटी का बचाव करते हुए कहा कि इसमें अनुभवी और नए दोनों तरह के कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है। 19 जिलों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है और आगे मोर्चा व प्रकोष्ठों का गठन भी किया जाएगा।

निष्कर्ष

झारखंड भाजपा की नई कमेटी में अनुभव और संतुलन की बात जरूर कही जा रही है, लेकिन पुराने चेहरों की पुनरावृत्ति और हारे हुए नेताओं को जिम्मेदारी देने से संगठन की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह टीम पार्टी को मजबूत करती है या अंदरूनी असंतोष को और बढ़ाती है।