झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत,727 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे
झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मिल गई है। 32.20 करोड़ रुपये बरामदगी और टेंडर कमीशन मामले में दोनों मई 2024 से जेल में बंद थे। मंगलवार को हो सकती है रिहाई।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति से जुड़ी सबसे चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन मामले में सोमवार को बड़ा मोड़ आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल को जमानत दे दी। दोनों मई 2024 से जेल में बंद थे और अब लगभग दो साल बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
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बताया जा रहा है कि मंगलवार को ईडी कोर्ट से रिलीज ऑर्डर होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचने के बाद दोनों जेल से बाहर आ सकते हैं। आलमगीर आलम 727 दिनों बाद जबकि उनके पीए संजीव लाल 735 दिनों बाद जेल से बाहर आएंगे।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और न ही उनके आवास से कोई नकदी बरामद हुई थी। आलमगीर आलम के वकीलों ने कोर्ट को यह भी बताया कि पूर्व मंत्री की तबीयत लगातार खराब चल रही है, इसलिए उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
ईडी ने किया था जमानत का विरोध
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में दावा किया कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बाद कमीशन का पैसा मंत्री तक पहुंचता था। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि संजीव लाल के यहां से मिली डायरी में कथित कमीशन बंटवारे का उल्लेख था और उसमें मंत्री के हिस्से का भी जिक्र किया गया था। ईडी ने यह आशंका भी जताई थी कि यदि आरोपियों को जमानत दी गई तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को राहत प्रदान कर दी।
32.20 करोड़ रुपये की बरामदगी से मचा था हड़कंप
यह मामला मई 2024 में उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब ईडी ने ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल और उनके करीबी जहांगीर आलम के ठिकानों से 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इसके अलावा संजीव लाल के घर से 10.05 लाख रुपये नकद और एक डायरी भी मिली थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, डायरी में कमीशन के पैसों का हिसाब-किताब दर्ज था और नामों की जगह कथित तौर पर कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया था।
पूछताछ के बाद हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने 6 मई 2024 को छापेमारी की थी। इसके अगले दिन 7 मई को संजीव लाल और जहांगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में लंबी पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से तीनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।
करोड़ों की संपत्ति भी हो चुकी है जब्त
ईडी अब तक इस मामले में कई बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। जांच एजेंसी ने संजीव लाल की 4.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। वहीं जहांगीर आलम के ठिकाने से मिली 32.20 करोड़ रुपये की नकदी भी जब्त कर ली गई थी। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की करीब 39 करोड़ रुपये की संपत्ति भी ईडी अटैच कर चुकी है।
कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने की खबर के बाद आलमगीर आलम के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है। उनके करीबी नेताओं का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अब सच सामने आएगा।






