झारखंड में पहली बार एक साथ दो जिलों के पुलिस कप्तानों पर गिरी गाज, कानून-व्यवस्था पर CM हेमंत का बड़ा एक्शन

झारखंड में पहली बार कानून-व्यवस्था में लापरवाही के आरोप में एक साथ दो जिलों के पुलिस कप्तानों को हटाया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस बड़े फैसले ने पुलिस और प्रशासनिक महकमे में स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध नियंत्रण में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी।

झारखंड में पहली बार एक साथ दो जिलों के पुलिस कप्तानों पर गिरी गाज, कानून-व्यवस्था पर CM हेमंत का बड़ा एक्शन
हेमंत सरकार का सख्त संदेश: अपराध पर नियंत्रण नहीं तो कार्रवाई तय।

      Highlights:

  • झारखंड के इतिहास में पहली बार एक साथ दो जिलों के SSP और SP हटाए गए।
  • जमशेदपुर के SSP और सरायकेला के SP को मुख्यालय अटैच किया गया।
  • कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में विफलता को कार्रवाई का आधार बनाया गया।
  • 2017 में भी सरायकेला में DC-SP की जोड़ी पर बड़ी कार्रवाई हुई थी।
  • मुख्यमंत्री ने पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे को कड़ा संदेश दिया है।

रांची(Threesocieties.com Desk): झारखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक का सबसे बड़ा और सबसे सख्त प्रशासनिक संदेश दिया है। राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब अपराध नियंत्रण और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने के आरोप में एक साथ दो जिलों के पुलिस कप्तानों को उनके पदों से हटाया गया है।

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मुख्यमंत्री ने मंगलवार देर रात जमशेदपुर के एसएसपी पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया। दोनों अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इस कार्रवाई को राज्य सरकार द्वारा अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अपनाए गए "जीरो टॉलरेंस" दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले की व्यापक चर्चा है, क्योंकि यह केवल दो अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं बल्कि पूरे पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

नौ साल पहले भी सरायकेला बना था बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र

सरायकेला-खरसावां जिला इससे पहले भी राज्य की सबसे चर्चित प्रशासनिक कार्रवाइयों का गवाह रह चुका है। लगभग नौ वर्ष पहले इसी जिले में छह महीने के भीतर दो बार डीसी और एसपी स्तर के अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई हुई थी।इन घटनाओं ने न केवल राज्य प्रशासन को झकझोर दिया था, बल्कि पूरे देश में झारखंड प्रशासन की कार्यशैली पर बहस छेड़ दी थी।

2017 में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक, हटाए गए थे डीसी और एसपी

एक जनवरी 2017 को खरसावां शहीद पार्क में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई थी। मामले की जांच तत्कालीन मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारियों ने की थी।जांच रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां मिलने के बाद तत्कालीन डीसी के. श्रीनिवासन और एसपी संजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया था। दिलचस्प तथ्य यह था कि आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार ने मात्र 26 दिन पहले ही जिले के एसपी का पदभार संभाला था, लेकिन सुरक्षा चूक के मामले में उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।

बच्चा चोर की अफवाह और चार लोगों की हत्या के बाद निलंबित हुए थे डीसी-एसपी

19 मई 2017 को सरायकेला के राजनगर थाना क्षेत्र में बच्चा चोर गिरोह की अफवाह ने भयावह रूप ले लिया था। उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के चार लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। घटना के दौरान स्थानीय लोग लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन आरोप था कि जिला प्रशासन समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंचा। जब तक प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब तक भीड़ वारदात को अंजाम दे चुकी थी।

जांच में यह भी सामने आया था कि प्रशासन को पहले से सतर्क रहने के निर्देश मिले थे, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जांच रिपोर्ट के आधार पर डीसी रमेश सी. घोलप और एसपी राकेश बंसल को निलंबित कर मुख्यालय अटैच कर दिया था। उस समय डीडीसी आकांक्षा रंजन को जिले के डीसी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

हेमंत सरकार का स्पष्ट संदेश: फील्ड में रहें मुस्तैद, नहीं तो कार्रवाई तय

मंगलवार देर रात हुई कार्रवाई को झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने संकेत दे दिया है कि अपराध नियंत्रण, जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अब किसी भी तरह की लापरवाही या जवाबदेही से बचने की गुंजाइश नहीं होगी। एक साथ दो जिलों के पुलिस कप्तानों को हटाने का फैसला राज्य के बाकी जिलों के अधिकारियों के लिए एक बड़ा "वेक-अप कॉल" माना जा रहा है।

सरकार का संदेश स्पष्ट है—फील्ड में सक्रिय रहें, अपराधियों पर नियंत्रण रखें और जनता के प्रति जवाबदेह बनें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक इतिहास में यह फैसला लंबे समय तक एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।