कंपनी बंद या दिवालिया हुई तो भी नहीं डूबेगा कर्मचारियों का PF-ग्रेच्युटी का पैसा, NCLAT के फैसले ने बदल दिए नियम
NCLAT ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि कंपनी के बंद या दिवालिया होने पर भी कर्मचारियों को उनका पूरा PF और ग्रेच्युटी मिलेगा, चाहे कंपनी ने अलग फंड बनाया हो या नहीं। यह फैसला जेट एयरवेज मामले में आया है।
HighLights:
- दिवालिया या बंद हो चुकी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलेगा पूरा PF और ग्रेच्युटी
- अलग PF या ग्रेच्युटी फंड नहीं होने पर भी कर्मचारियों का अधिकार सुरक्षित रहेगा
- National Company Law Appellate Tribunal ने कर्मचारियों के हित में दिया बड़ा फैसला
- Jet Airways के पूर्व कर्मचारियों के मामले में आया ऐतिहासिक निर्णय
- State Bank of India (SBI) समेत वित्तीय लेनदारों की अपील खारिज
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): देशभर के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा देने वाला फैसला सामने आया है। दिवालिया मामलों की सुनवाई करने वाली अपीलीय संस्था National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी बंद हो जाती है या दिवालिया घोषित हो जाती है, तब भी कर्मचारियों का प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी का पैसा सुरक्षित रहेगा।
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ट्रिब्यूनल ने कहा है कि कर्मचारियों को उनका पूरा PF और ग्रेच्युटी भुगतान किया जाएगा, भले ही कंपनी ने इसके लिए अलग से कोई फंड या अकाउंट नहीं बनाया हो। यह राशि कंपनी की परिसमापन संपत्ति (Liquidation Estate) का हिस्सा नहीं मानी जाएगी और कर्मचारियों को इसका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
जेट एयरवेज मामले में आया ऐतिहासिक फैसला
यह महत्वपूर्ण फैसला दिवालिया हो चुकी एयरलाइन Jet Airways के सैकड़ों पूर्व कर्मचारियों द्वारा दायर दावों पर सुनवाई के दौरान आया। मामले में कर्मचारियों ने तर्क दिया था कि उनका प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का बकाया भुगतान दिवालिया प्रक्रिया के दौरान कंपनी की परिसमापन संपत्ति का हिस्सा नहीं होना चाहिए और उन्हें यह राशि पूरी तरह मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर, State Bank of India (SBI) सहित अन्य वित्तीय लेनदारों का कहना था कि ऐसी सुरक्षा केवल उसी स्थिति में लागू होगी, जब कंपनी ने पहले से अलग प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी फंड बनाया हो। हालांकि, NCLAT ने वित्तीय लेनदारों की इस दलील को खारिज कर दिया और कर्मचारियों के अधिकारों को सर्वोपरि माना।
नवंबर 2024 में शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, नवंबर 2024 में जलान-फ्रिट्श कंसोर्टियम का रेजोल्यूशन प्लान विफल होने के बाद जेट एयरवेज को लिक्विडेशन प्रक्रिया में भेज दिया गया था। इसके बाद कर्मचारियों ने दावा किया कि उनका PF और ग्रेच्युटी भुगतान Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की धारा 36(4)(a)(iii) के तहत संरक्षित है और इसे कंपनी की परिसमापन संपत्ति में शामिल नहीं किया जा सकता।
NCLAT ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि: "लिक्विडेटर कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होगा। यह भुगतान कर्मचारियों को संबंधित कानूनों के तहत किया जाएगा और इसे लिक्विडेशन एस्टेट का हिस्सा नहीं माना जाएगा।" इसका मतलब साफ है कि कंपनी के दिवालिया होने की स्थिति में भी कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी पर किसी बैंक, वित्तीय संस्था या अन्य लेनदार का दावा नहीं होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय देश के लाखों कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा। कई बार कंपनियां वित्तीय संकट में आने के बाद कर्मचारियों का PF और ग्रेच्युटी भुगतान रोक देती थीं या उसे परिसमापन प्रक्रिया में शामिल कर दिया जाता था। अब इस फैसले के बाद कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार और अधिक मजबूत हो गए हैं और दिवालिया प्रक्रिया के दौरान भी उनके सामाजिक सुरक्षा लाभ सुरक्षित रहेंगे।
वेतन बकाये पर नहीं मिली राहत
हालांकि NCLAT ने कर्मचारियों की उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें जनवरी से मार्च 2019 तक के वेतन बकाये को भी परिसमापन संपत्ति से बाहर रखने की मांग की गई थी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि वेतन संबंधी दावों का निपटारा IBC के तहत निर्धारित "वॉटरफॉल मैकेनिज्म" के अनुसार किया जाएगा और उन्हें PF तथा ग्रेच्युटी जैसी प्राथमिक सुरक्षा प्राप्त नहीं होगी।
देशभर के कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में दिवालिया होने वाली कंपनियों के लाखों कर्मचारियों के लिए मिसाल बनेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आर्थिक संकट या कंपनी बंद होने की स्थिति में भी कर्मचारियों की जीवनभर की बचत और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
NCLAT का यह निर्णय भारतीय कॉर्पोरेट दिवालिया कानून में कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।






