जमशेदपुर : 19 साल बाद खुला अजय बर्मन हत्याकांड का राज: कोर्ट ने पलटी पुलिस की कहानी, टीएम ज्वेलर्स के मालिक पर FIR

जमशेदपुर के चर्चित अजय बर्मन हत्याकांड में 19 साल बाद बड़ा मोड़ आया है। अदालत ने पुलिस की मॉब लिंचिंग थ्योरी को खारिज करते हुए इसे सुनियोजित हत्या बताया है। टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन अडेसरा समेत कई आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलेगा।

जमशेदपुर : 19 साल बाद खुला अजय बर्मन हत्याकांड का राज: कोर्ट ने पलटी पुलिस की कहानी, टीएम ज्वेलर्स के मालिक पर FIR
कोर्ट ने कहा- मॉब लिंचिंग नहीं, सुनियोजित हत्या थी।

जमशेदपुर(Threesocieties.com Desk): झारखंड के जमशेदपुर में 19 साल पुराने बहुचर्चित अजय बर्मन हत्याकांड में अदालत के एक अहम फैसले ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। जिस घटना को पुलिस ने वर्षों तक "मॉब लिंचिंग" और रंगदारी विवाद का मामला बताकर बंद कर दिया था, उसे अदालत ने सुनियोजित हत्या करार दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन अडेसरा सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलेगा।

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कोर्ट ने खारिज की पुलिस की मॉब लिंचिंग थ्योरी

जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अरविंद कुमार-तृतीय की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की पूरी जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां यह साबित नहीं करतीं कि अजय बर्मन की मौत भीड़ की पिटाई से हुई थी।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घटना स्थल की भौतिक स्थिति और मेडिकल रिपोर्ट पुलिस के दावों से मेल नहीं खाती। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए तथ्यों को अविश्वसनीय मानते हुए हत्या की धारा बीएनएस 103(2) के तहत संज्ञान लिया।

पैसों के लेन-देन के लिए गया था अजय

मामले के अनुसार 11 मई 2007 को 28 वर्षीय सुनार अजय बर्मन अपने बकाया भुगतान की मांग करने गोलमुरी स्थित आकाशदीप प्लाजा में टीएम ज्वेलर्स की दुकान पहुंचा था। आरोप है कि इसी दौरान विवाद हुआ और दुकान के अंदर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।परिजनों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अजय के सिर पर स्टील के स्टूल से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में हत्या को छिपाने के लिए शव को दुकान के बाहर पार्किंग क्षेत्र में फेंक दिया गया।

पुलिस ने गढ़ी थी रंगदारी और बम की कहानी

घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि अजय बर्मन एक अन्य नाम से दुकान में पहुंचा था और वहां रंगदारी मांग रहा था। पुलिस के अनुसार उसके पास बम और हथियार भी थे। शोर मचने पर सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पीट-पीटकर मार डाला।इसी आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और 2010 में साक्ष्य के अभाव का हवाला देकर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। मामला लगभग बंद हो चुका था, लेकिन पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी।

अदालत ने उठाए कई अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि 24×24 फीट की सीमित जगह में 250 से 300 लोगों की भीड़ कैसे इकट्ठा हो सकती है। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी भीड़ ने हमला किया था तो सिर पर किसी ठोस वस्तु से एक तरफ लगी गहरी और सटीक चोट की व्याख्या कैसे की जाएगी। अदालत ने पुलिस की उस कहानी पर भी सवाल खड़ा किया जिसमें कहा गया था कि एक होमगार्ड ने अजय के हाथ से जिंदा बम छीनकर अपनी जेब में रख लिया था। कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय बताया। इसके अलावा प्राथमिकी और पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट में भी विरोधाभास पाए गए। एक दस्तावेज में घायल को एमजीएम अस्पताल ले जाने की बात कही गई, जबकि दूसरी रिपोर्ट में उसे मृत अवस्था में टीएमएच लाए जाने का उल्लेख था।

सीसीटीवी बंद होने से गहरा हुआ शक

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू घटना से ठीक पहले दुकान के सीसीटीवी कैमरों का बंद होना भी रहा। अदालत ने माना कि यह तथ्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े करता है और हत्या की साजिश की आशंका को मजबूत करता है।

19 साल तक न्याय के लिए संघर्ष

अजय बर्मन की पत्नी सुमित्रा बर्मन ने मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल के सहयोग से इस मामले को लगातार जीवित रखा। अधिवक्ताओं की टीम ने हाईकोर्ट से लेकर निचली अदालत तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। पीयूसीएल की स्वतंत्र जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद मामले की कई परतें खुलीं। लगातार प्रयासों के बाद अदालत का यह फैसला आया, जिसने पीड़ित परिवार को न्याय की नई उम्मीद दी है।

क्या होगा आगे?

अदालत द्वारा हत्या के आरोप में संज्ञान लिए जाने के बाद अब टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन अडेसरा और अन्य आरोपियों को अदालत में पेश होना होगा। आगे की सुनवाई में अभियोजन पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करेगा और मामले की विस्तृत सुनवाई होगी। करीब दो दशक बाद आए इस फैसले को न केवल अजय बर्मन के परिवार बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 19 वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद अब इस चर्चित मामले में न्याय की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ता दिखाई दे रहा है।