झारखंड में माओवादियों को बड़ा झटका: प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का निधन, रांची RIMS में ली अंतिम सांस

झारखंड के कुख्यात माओवादी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का रांची RIMS में निधन। एक करोड़ के इनामी इस नक्सली नेता पर 200 से अधिक वारदातों का आरोप था।

झारखंड में माओवादियों को बड़ा झटका: प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का निधन, रांची RIMS में ली अंतिम सांस
प्रशांत बोस उर्फ किशन दा(फाइल फोटो)।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ का शुक्रवार को निधन हो गया। वह रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

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करीब 75-80 वर्षीय बोस की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने सुबह करीब 10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

जेल में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत

प्रशांत बोस की शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। पहले जेल अस्पताल ले जाया गया, वहां से तुरंत RIMS रेफर किया गया। डॉक्टरों की टीम ने इलाज किया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की निगरानी में पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया है।

 नहीं है कोई अपना, प्रशासन करेगा अंतिम संस्कार

जेल प्रशासन के अनुसार प्रशांत बोस के परिवार में कोई नजदीकी सदस्य मौजूद नहीं है। एक भाई विदेश में बताया जा रहा है। 72 घंटे तक इंतजार किया जाएगा, कोई नहीं आने पर प्रशासन करेगा अंतिम संस्कार
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

उनकी मौत के बाद झारखंड समेत कई राज्यों में अलर्ट जारी कर दी गयी है।  सुरक्षा एजेंसियां संभावित प्रतिक्रिया को लेकर सतर्क हो गयी है। नक्सली गतिविधियों पर नजर तेज कर दी गयी है।

एक करोड़ का इनामी, 200+ वारदातों का मास्टरमाइंड

प्रशांत बोस देश के सबसे बड़े माओवादी नेताओं में गिने जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार:

उन पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था
झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में सक्रियता
200 से अधिक नक्सली घटनाओं में संलिप्तता
माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और रणनीतिकार

उन्हें संगठन का “थिंक टैंक” भी माना जाता था।

2021 में हुई थी गिरफ्तारी

प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले में टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उनके साथ उनकी पत्नी शीला मरांडी भी थीं। दोनों लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में टॉप वांटेड थे। गिरफ्तारी के बाद से वह रांची जेल में बंद थे और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। प्रशांत बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के जादवपुर स्थित 7/12 सी विजयगढ़ कालोनी का निवासी था। 

प्रशांत बोस माओवादियों का देश का दूसरा सबसे बड़े नेता था। बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना व महाराष्ट्र में उनकी सक्रियता थी। वह इन राज्यों में भाकपा माओवादियों के गुरिल्ला आर्मी का नेतृत्व करता था। वर्ष 2004 से पहले वह माओवादियों के प्रमुख बन गया था। उसकी सक्रियता 90 के दशक में बढ़ी और इसके बाद हत्या, आपराधिक साजिश सहित सैकड़ों माओवादी घटनाओं में उनकी संलिप्तता रही। सारंडा में 16 जवानों की शहादत सहित कई बड़ी घटनाओं में उसकी संलिप्तता का आरोप था।

माओवादी संगठन में बड़ी भूमिका

प्रशांत बोस CPI (माओवादी) के दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते थे। ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ के सचिव थे। कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों का संचालन करते थे। MCCI से लेकर CPI (माओवादी) गठन तक अहम भूमिका थी। प्रशांत बोस के नेतृत्व में कई बड़े हमले और रणनीतिक फैसले लिए गए थे।

माओवादी संगठन में प्रशांत बोस का अहम पहचान
प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वे संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे और ‘ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो’ के सचिव भी था। संगठन के भीतर उसे ‘किशन दा’, ‘मनीष’ और ‘बूढ़ा’ के नाम से जाना जाता था। उसका नाम रणनीतिक फैसलों और संगठन की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका के लिए जाना जाता था।

प्रशांत बोस काआपराधिक रिकॉर्ड
प्रशांत बोस के खिलाफ एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 200 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड था। उसके नेतृत्व में कई बड़े हमले और संगठनात्मक निर्णय लिए गए, जो नक्सली गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे।

पश्चिम बंगाल के जादवपुर इलाके के रहने वाले थे प्रशांत

प्रशांत बोस वर्ष 2004 में सीपीआई-एमएल (पीपुल्स वॉर) के साथ विलय होकर सीपीआई (माओवादी) बनने से पहले वे माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एमसीसीआई) के प्रमुख थे। वे उन प्रमुख विचारकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने क्रांतिकारी ताकतों के पुनर्मिलन की प्रक्रिया का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप सीपीआई (माओवादी) जैसे प्रभावशाली संगठन का गठन हुआ। किशन दा सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति, पोलित ब्यूरो और केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सदस्य थे। साथ ही वे माओवादी पार्टी के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (ईआरबी) के सचिव भी थे। ईआरबी सचिव के रूप में वे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालते थे। प्रशांत बोस लगभग 80 वर्ष के थे। वे झारखंड के सारंडा जंगल क्षेत्र से सक्रिय थे। प्रशांत बोस पश्चिम बंगाल के जादवपुर इलाके के रहने वाले थे। उन्हें निर्भय, किशन, काजल और महेश जैसे उपनामों से भी जाना जाता था।

धनबाद की माओवादी शीला मरांडी से की थी शादी 
प्रशांत बोस ने धनबाद के टुंडी की रहने वाली माओवादी शीला मरांडी से शादी की थी। शाली भी भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी सदस्य थीं। नवंबर 2021 में प्रशांत बोस के साथ शीला मरांडी की भी गिरफ्तारी हुई थी।