कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, CJI बोले- “कोई इमरजेंसी नहीं”,‘इतना भावुक मत बनिए’
सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की CBI जांच की मांग पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत ने कहा- “कोई आपात स्थिति नहीं है।” दूसरी ओर CJP के इंस्टाग्राम पर 2.29 करोड़ फॉलोअर्स हो चुके हैं। पार्टी के X अकाउंट ब्लॉक होने, वेबसाइट बंद होने और संस्थापक अभिजीत दीपके के आरोपों ने मामले को और गरमा दिया है।
- पांच दिन में डिजिटल तूफान बनी CJP
- X अकाउंट ब्लॉक, वेबसाइट बंद; अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
- CJP पर SC में सुनवाई, फाउंडर ने सरकार पर लगाए आरोप
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk) : सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब देश की न्यायपालिका और राजनीति दोनों के केंद्र में आ गई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने CJP से जुड़े लोगों की गतिविधियों की CBI जांच कराने की मांग पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ कहा कि फिलहाल ऐसी कोई “गंभीर आपात स्थिति” नहीं है, जिस पर तुरंत हस्तक्षेप की जरूरत हो। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा— “इसे इतनी भावुकता से मत लीजिए।”
अदालत में क्या हुआ?
एडवोकेट राजा चौधरी द्वारा दायर याचिका में मांग की गई थी कि: CJP से जुड़े फर्जी अधिवक्ताओं और कथित फर्जी लॉ डिग्रियों की जांच हो। सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के “कमर्शियलाइजेशन” पर कार्रवाई हो। सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की छवि खराब करने वालों की CBI जांच कराई जाए। सुनवाई के दौरान वकील एनके गोस्वामी ने कहा कि CJP न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है। इस पर CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि फिलहाल कोई असाधारण स्थिति नहीं बनी है।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक डिजिटल राजनीतिक व्यंग्य (सटायर) प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 16 मई 2026 को महाराष्ट्र के संभाजीनगर निवासी अभिजीत दीपके ने की थी। यह प्लेटफॉर्म तब वायरल हुआ, जब 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा में आई। उन्होंने कहा था कि कुछ युवा “कॉकरोच की तरह सिस्टम पर हमला कर रहे हैं।” इसके बाद सोशल मीडिया पर युवाओं ने उसी शब्द को विरोध और व्यंग्य के प्रतीक में बदल दिया। देखते ही देखते CJP एक डिजिटल मूवमेंट बन गया।
8 दिन में 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स
CJP ने सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड रफ्तार से लोकप्रियता हासिल की। आठ दिनों में इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 2.29 करोड़+ फॉलोअर्स हो चुके हैं। X (Twitter) पर नया अकाउंट बनने के बाद 2.27 लाख+ फॉलोअर्स हो गये हैं। वेबसाइट पर कथित तौर पर 10 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली ऑनलाइन याचिका पर 6 लाख+ साइन। दिलचस्प बात यह है कि BJP और कांग्रेस ने जहां वर्षों में इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स जुटाए, वहीं CJP ने महज कुछ दिनों में उन्हें पीछे छोड़ दिया।
X अकाउंट ब्लॉक, वेबसाइट बंद होने का दावा
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि: उनका इंस्टाग्राम पेज हैक हुआ है। X अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया और पार्टी की वेबसाइट बंद कर दी गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “आप अकाउंट को हैक कर सकते हैं, लेकिन आंदोलन को नहीं रोक सकते।” हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महाराष्ट्र में अभिजीत दीपके के घर के बाहर पुलिस तैनात
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अभिजीत दीपके के घर के बाहर एहतियातन पुलिस तैनात की गई है। डीसीपी पंकज अतुलकर ने कहा कि सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा और भीड़ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की गई है। हालांकि किसी आधिकारिक धमकी की पुष्टि नहीं हुई।
सोनम वांगचुक ने भी किया समर्थन
पर्यावरणविद और शिक्षाविद Sonam Wangchuk ने भी इस डिजिटल आंदोलन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “मैं खुद को ऑनरेरी कॉकरोच मानता हूं।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर #HonoraryCockroach ट्रेंड करने लगा।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के निवासी हैं। डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। अमेरिका की Boston University में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। और 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान Aam Aadmi Party के सोशल मीडिया कैंपेन से जुड़े रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे मीम-बेस्ड डिजिटल कैंपेनिंग में विशेषज्ञ माने जाते हैं।
क्या यह सिर्फ मजाक है या डिजिटल राजनीति का नया मॉडल?
विशेषज्ञ मानते हैं कि CJP का तेजी से उभरना सिर्फ मीम कल्चर नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी, बेरोजगारी, पेपर लीक और सिस्टम के प्रति असंतोष का डिजिटल विस्फोट भी हो सकता है। यह पहली बार है जब किसी व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इतने कम समय में मुख्यधारा की राजनीति, न्यायपालिका और राष्ट्रीय बहस को प्रभावित किया है।






