भरत तिवारी के लिए बिलौटी में न्याय की हुंकार, महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, 'पिता ने कहा- दोषियों को मिले सजा

भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में हजारों लोग जुटे। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी पहुंचे। भरत तिवारी के पिता ने दोषियों को सजा देने की मांग की, जबकि युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का एलान किया।

भरत तिवारी के लिए बिलौटी में न्याय की हुंकार, महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, 'पिता ने कहा- दोषियों को मिले सजा
'न्याय चाहिए, सिर्फ सस्पेंशन नहीं'—गूंजा जनआक्रोश।

HighLights

  • जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की मौजूदगी से कार्यक्रम को मिला बड़ा राजनीतिक महत्व
  • भरत तिवारी के पिता काशी नाथ तिवारी ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग 
  • कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भी कार्यक्रम में मौजूदगी रही
  • युवाओं ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान 

आरा (Threesocieties.com Desk): भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलौटी गांव रविवार को उस समय बिहार की राजनीति और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन गया, जब चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही गांव और आसपास के इलाकों में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था और देखते ही देखते पूरा इलाका तिरंगों, पोस्टरों और न्याय की मांग वाले नारों से गूंज उठा।

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महापंचायत में शामिल होने के लिए भोजपुर के विभिन्न प्रखंडों के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित कई राज्यों से लोगों के पहुंचने का दावा किया गया। आयोजन समिति के अनुसार दोपहर तक एक हजार से अधिक वाहनों का काफिला बिलौटी गांव पहुंच चुका था, जबकि कार्यक्रम में शामिल होने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।

प्रशांत किशोर के पहुंचते ही बढ़ा उत्साह

महापंचायत को उस समय और अधिक राजनीतिक महत्व मिल गया, जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही समर्थकों और युवाओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया और पूरे आयोजन स्थल पर हलचल बढ़ गई। अब सभी की निगाहें प्रशांत किशोर के संबोधन और इस मामले में उनकी रणनीति पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर बढ़ती जनभागीदारी आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में भी असर डाल सकती है।

युवाओं ने कहा- यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं

महापंचायत में शामिल युवाओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल भरत तिवारी को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके परिवार को न्याय दिलाना भी है। युवाओं का कहना था कि यह मामला केवल एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था में आम लोगों के विश्वास का सवाल बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन विभिन्न चरणों में जारी रहेगा।

पिता ने कहा- दोषियों को मिले कड़ी सजा

इस बीच भरत तिवारी के पिता काशी नाथ तिवारी की तबीयत बिगड़ने की भी खबर सामने आई। बावजूद इसके उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपने बेटे के लिए न्याय की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि केवल पुलिसकर्मियों के निलंबन से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए। परिवार का कहना है कि वे शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं।

पोस्टरों और नारों से गूंजा बिलौटी गांव

महापंचायत से पहले बड़ी संख्या में समर्थक तिरंगा लेकर भरत तिवारी के घर पहुंचे और "भरत तिवारी अमर रहें" के नारे लगाए। गांव से लेकर बक्सर-आरा फोरलेन तक जगह-जगह पोस्टर और बैनर लगाए गए थे, जिनमें भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग की गई थी।कई जगहों पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी देखने को मिली। पूरे गांव का माहौल आंदोलनकारी और भावनात्मक नजर आया।

कई संगठनों की मौजूदगी की चर्चा

महापंचायत में करणी सेना, परशुराम महासभा, हिंदू महासभा, ब्राह्मण महासभा और हिंदू जागरण मंच सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की चर्चा रही। कार्यक्रम स्थल पर विशाल पंडाल, भोजन, पेयजल और पार्किंग की व्यवस्था की गई थी, जबकि स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें व्यवस्था संभालने में जुटी हुई थीं।

प्रदेश की बड़ी सामाजिक-राजनीतिक घटना बनती महापंचायत

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर लगातार बढ़ रही जनभागीदारी ने बिलौटी की इस महापंचायत को बिहार की चर्चित सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा और सरकार तथा प्रशासन की प्रतिक्रिया पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहेंगी।