धनबाद सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में उठाया BSL विस्तार और तालागाड़िया को सैटेलाइट स्टेशन बनाने का मुद्दा

लोकसभा में सांसद ढुलू महतो ने बोकारो स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तालागाड़िया रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन बनाने का मुद्दा उठाया। इससे झारखंड के औद्योगिक विकास और रेल सुविधाओं को नई गति मिलने की उम्मीद।

धनबाद सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में उठाया BSL विस्तार और तालागाड़िया को सैटेलाइट स्टेशन बनाने का मुद्दा
सांसद ढुलू महतो (फाइल फोटो)।
  •  लोकसभा में उठी बोकारो स्टील प्लांट विस्तार की मांग
  • सांसद ढुलू महतो ने सरकार का खींचा ध्यान

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रेल सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने खास तौर पर बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा तालागाड़िया रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

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धनबाद सांसद ढुलू महतो ने कहा कि इन दोनों परियोजनाओं का सीधा असर झारखंड के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

बोकारो स्टील प्लांट की क्षमता बढ़ाने का मुद्दा लोकसभा में उठा

सांसद ढुलू महतो ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से बोकारो स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता से संबंधित सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि बोकारो स्टील प्लांट को मूल रूप से 10 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य के साथ स्थापित किया गया था, लेकिन करीब 55 वर्षों बाद भी इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 5 मिलियन टन के आसपास ही क्यों बनी हुई है। उन्होंने सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि—

क्या जनप्रतिनिधियों की ओर से उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव मिला है?

बोकारो स्टील प्लांट की मौजूदा आधारभूत संरचना को देखते हुए विस्तार की क्या योजना है?

राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत प्रस्तावित विस्तार कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है?

इससे क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

स्टील मंत्रालय ने दिया जवाब

स्टील मंत्रालय की ओर से दिए गए उत्तर में बताया गया कि इस्पात क्षेत्र एक विनियमन-मुक्त क्षेत्र है और उत्पादन क्षमता से जुड़े निर्णय संबंधित सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा अपनी व्यावसायिक रणनीति, निवेश प्राथमिकताओं, आधुनिकीकरण कार्यक्रम और तकनीकी-आर्थिक आकलन के आधार पर लिए जाते हैं।

मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) अपने सभी एकीकृत इस्पात संयंत्रों में चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण एवं विस्तार कार्यक्रम लागू कर रहा है। वर्तमान में बोकारो स्टील प्लांट की कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 5.25 मिलियन टन प्रति वर्ष है। साथ ही SAIL के निदेशक मंडल ने बोकारो स्टील प्लांट के लिए 2.65 मिलियन टन प्रति वर्ष की ब्राउनफील्ड विस्तार परियोजना को भी स्वीकृति दी है।

औद्योगिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण

सांसद ढुलू महतो ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट का विस्तार झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वी भारत के औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से—

बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे

स्थानीय उद्योग और व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा

क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयेगी

तालागाड़िया रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन बनाने की मांग

सांसद ढुलू महतो द्वारा पहले लोकसभा में उठाए गए मुद्दे के संदर्भ में रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने पत्र के माध्यम से जानकारी दी है कि तालागाड़िया रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार इस प्रस्ताव के तहत कई पहलुओं का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं—

यात्रियों की संख्या

यातायात का रुझान

स्टेशन की आय

भविष्य की संभावनाएं

फिलहाल चार ट्रेन सेवाएं उपलब्ध

वर्तमान में तालागाड़िया रेलवे स्टेशन पर चार ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित भोजूडीह रेलवे स्टेशन से आनंद विहार–पुरी नंदनकानन एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली और भुवनेश्वर के लिए रेल संपर्क उपलब्ध है। वहीं भोजूडीह–महुदा–बोकारो सेक्टर में भी ट्रेन सेवाएं संचालित हो रही हैं। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी स्टेशन पर ट्रेन ठहराव का निर्णय यातायात की मांग, परिचालनिक व्यवहार्यता और तकनीकी मानकों के आधार पर लिया जाता है।

क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध

सांसद ढुलू महतो ने कहा कि धनबाद संसदीय क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार और औद्योगिक विकास उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने विश्वास जताया कि बोकारो स्टील प्लांट के विस्तार और तालागाड़िया स्टेशन के विकास से क्षेत्र को विकास की नई गति मिलेगी।साथ ही उन्होंने कहा कि धनबाद संसदीय क्षेत्र के विकास से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को वे संसद में मजबूती से उठाते रहेंगे।

अनुबंध श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ का मुद्दा
धनबाद सांसद माननीय ढुलू महतो ने लोकसभा में औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत अनुबंध श्रमिकों (Contract Workers) की सुरक्षा, स्वास्थ्य लाभ और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से उन श्रमिकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की जो संवेदनशील एवं जोखिमपूर्ण औद्योगिक कार्यों में कार्यरत हैं। सांसद ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि समान कार्य करने के बावजूद क्या अनुबंध श्रमिकों को स्थायी कर्मचारियों के समान चिकित्सा लाभ और सुरक्षा प्राप्त हो रही है।

अनुबंध श्रमिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठाया महत्वपूर्ण प्रश्न

सांसद द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार से यह जानकारी मांगी गई कि क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि जोखिमपूर्ण औद्योगिक कार्यों में लगे अनुबंध श्रमिक स्थायी कर्मचारियों के समान कार्य करते हुए भी कई बार समुचित चिकित्सा लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में चिकित्सा सुरक्षा के अंतर को दूर करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत समान चिकित्सा लाभ का प्रावधान
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से दिए गए उत्तर में बताया गया कि कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 तथा वर्तमान में लागू सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security) के तहत कर्मचारियों, जिनमें अनुबंध श्रमिक भी शामिल हैं, को ईएसआई (ESIC) योजना के अंतर्गत चिकित्सा सुरक्षा प्रदान की जाती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा लाभ की पात्रता के मामले में स्थायी और अनुबंध श्रमिकों के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है।

ईएसआई योजना के अंतर्गत श्रमिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा

सरकार ने जानकारी दी कि जिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों में दस या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं तथा जिनकी मासिक आय निर्धारित सीमा (₹21,000 तक) के भीतर है, उन्हें ईएसआई योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त जीवन के लिए जोखिमपूर्ण या संवेदनशील व्यवसायों में कार्यरत श्रमिकों को भी, यदि उनकी आय निर्धारित सीमा के भीतर है, चिकित्सा सुरक्षा का लाभ दिया जाता है।

मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी तय

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुबंध श्रमिकों को ईएसआई योजना के अंतर्गत चिकित्सा लाभ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) की होती है, चाहे श्रमिक सीधे नियुक्त हों या किसी ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत हों। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है तो सक्षम प्राधिकारियों द्वारा निरीक्षण और शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाती है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था

स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के साथ समझौता किया है, जिसके माध्यम से ईएसआई लाभार्थी आवश्यकता पड़ने पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) से संबद्ध अस्पतालों में भी उपचार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों की स्वास्थ्य सुविधाओं का भी उपयोग कर चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता को और व्यापक बनाया जा रहा है।

सांसद  कहा कि देश के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक अनुबंध व्यवस्था के तहत कार्य करते हैं और कई बार उन्हें जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें समान सुविधाएं दिलाने के लिए वे संसद में निरंतर आवाज उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है और उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और प्रभावी बनाकर श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा और सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य करती रहेगी।