धनबाद: केंदुआ भूधंसान पर ‘सियासत’ गरम, 2 मई की हाईलेवल बैठक टली; धरना के बाद भी समाधान अधर में

धनबाद के केंदुआ में भूधंसान और गैस रिसाव को लेकर 2 मई को प्रस्तावित हाईलेवल बैठक जिला प्रशासन ने स्थगित कर दी। भाजपा विधायक राज सिन्हा के धरने के बाद बैठक की उम्मीद जगी थी, लेकिन स्थगन से प्रभावित लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

धनबाद: केंदुआ भूधंसान पर ‘सियासत’ गरम, 2 मई की हाईलेवल बैठक टली; धरना के बाद भी समाधान अधर में
भूधंसान और गैस रिसाव के कारण रोड बंद।
  • भूधंसान व गैस रिसाव पर ‘सियासत’ नहीं!

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झरिया कोयलांचल में भूमिगत आग, गैस रिसाव और भूधंसान का संकट कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह संकट आम लोगों की जिंदगी, सड़क संपर्क और सुरक्षा पर सीधा असर डालने लगे, तब यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं रह जाता—यह जनसुरक्षा और राजनीति, दोनों का विषय बन जाता है।

यह भी पढ़ें: धनबाद: अनाथ विद्यालय पोखरिया के तीन बच्चों ने रचा इतिहास, मैट्रिक में प्रथम श्रेणी से चमके आरती, दीपक और अनिल

धनबाद-बोकारो मुख्य पथ पर केंदुआ क्षेत्र में हुए भूधंसान और गैस रिसाव के कारण सड़क बंद कर दी गई है। इस सड़क के बंद होने से हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी है, वहीं राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अब इस पूरे मामले में 2 मई को प्रस्तावित महत्वपूर्ण हाईलेवल बैठक को जिला प्रशासन ने स्थगित कर दिया है, जिससे प्रभावित लोगों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

विधायक राज सिन्हा धरने पर बैठे, तीन दिन चला आंदोलन

सड़क चालू करवाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा 23 अप्रैल को केंदुआ पहुंचे और समर्थकों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। यह धरना लगातार तीन दिनों तक चला। स्थानीय लोगों ने भी विधायक के समर्थन में आवाज बुलंद की। बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने 2 मई को उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद विधायक ने अपना आंदोलन स्थगित किया। हालांकि अब बैठक ही टल जाने से फिर से असंतोष बढ़ने लगा है।

उपायुक्त के निर्देश पर अपर समाहर्ता ने जारी किया पत्र

धनबाद-रांची मुख्य सड़क पर हुए भूधंसान और गैस रिसाव की गंभीर घटना को लेकर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार द्वारा 2 मई को बैठक प्रस्तावित थी। इस बैठक में भूमिगत आग, गैस रिसाव, सड़क सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। लेकिन अब उपायुक्त आदित्य रंजन के निर्देश पर अपर समाहर्ता सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने पत्र जारी कर बैठक स्थगित कर दी है। इसकी सूचना संबंधित विभागों के साथ-साथ सांसदों और विधायकों को भी दे दी गई है।

प्रशासन ने कारण नहीं बताया, अंदरखाने ‘केंद्र’ का मामला

बैठक स्थगित करने के पीछे जिला प्रशासन ने कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आग और भूधंसान का मामला सीधे तौर पर केंद्र सरकार और खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जिला प्रशासन स्वयं कोई बड़ा निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। यह मामला सुरक्षा से जुड़ा है और किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर आ सकती है। यही वजह है कि अधिकारी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

पहले भी धरने की घोषणा कर चुके थे कई नेता

केंदुआ में भूधंसान और गैस रिसाव का मामला लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस मुद्दे पर निरसा विधायक अरूप चटर्जी और आजसू जिलाध्यक्ष मंटू महतो ने भी धरने की घोषणा की थी। 23 अप्रैल को दोनों नेताओं ने रणधीर वर्मा चौक पर धरना दिया था। दूसरी ओर विधायक राज सिन्हा ने सीधे केंदुआ के घटना स्थल के पास मोर्चा संभाला। उनका धरना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। अब बैठक स्थगित होने के बाद विपक्ष प्रशासन और बीसीसीएल दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

बेलगड़िया में किया जा रहा विस्थापन

भूधंसान और गैस रिसाव के बाद जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान बेलगड़िया टाउनशिप में स्थानांतरित किया जा रहा है। हालांकि कई परिवार अपने पुराने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पुनर्वास के साथ रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की भी गारंटी होनी चाहिए।

बैठक में शामिल होने वाले थे कई बड़े नाम

दो मई को प्रस्तावित बैठक में सांसद ढुलू महतो, विधायक राज सिन्हा, रागिनी सिंह, चंद्रदेव महतो, शत्रुघ्न महतो, मथुरा प्रसाद महतो, अरूप चटर्जी, महापौर संजीव सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।इसके अलावा बीसीसीएल के सीएमडी, DGMS, नगर आयुक्त, एसडीएम, पथ प्रमंडल के अधिकारी, पीबी एरिया के महाप्रबंधक और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी बैठक में शामिल होने वाले थे। बताया गया था कि DGMS की रिपोर्ट के आधार पर भूमिगत आग और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होनी थी।

फिलहाल सवाल वही—सड़क कब खुलेगी?

सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है—केंदुआ की बंद सड़क कब खुलेगी? स्थानीय लोग राहत चाहते हैं, जनप्रतिनिधि जवाब चाहते हैं और प्रशासन तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। धरना समाप्त हो चुका है, बैठक स्थगित हो चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। ऐसे में केंदुआ के लोग अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहते हैं।