धनबाद के असर्फी हॉस्पिटल में 20 हजार के बकाया पर शव रोका, विधानसभा में धरने पर बैठीं झरिया MLA रागिनी सिंह
धनबाद के अशर्फी हॉस्पिटल में 20 हजार रुपये बकाया बिल के कारण शव रोके जाने के आरोप पर भाजपा विधायक रागिनी सिंह झारखंड विधानसभा परिसर में धरने पर बैठ गईं। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य मंत्री पर गंभीर सवाल उठाए।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मंगलवार को विधानसभा परिसर में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब भाजपा विधायक रागिनी सिंह धरने पर बैठ गईं। उन्होंने धनबाद के एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
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20 हजार रुपये के बकाया पर शव रोकने का आरोप
रागिनी सिंह ने आरोप लगाया कि धनबाद के अशर्फी अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से 20 हजार रुपये का बकाया बिल मांगा। परिजनों के पास तत्काल पैसे नहीं होने के कारण अस्पताल ने कथित तौर पर शव देने से इनकार कर दिया।विधायक ने इस घटना को अमानवीय और संवेदनहीन बताते हुए कहा कि किसी भी अस्पताल को पैसे के लिए इस तरह का कदम नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
विधानसभा परिसर में धरना
इस मुद्दे को लेकर रागिनी सिंह ने झारखंड विधानसभा परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस मामले में स्पष्ट कार्रवाई और जांच का आश्वासन नहीं देती, तब तक वे आवाज उठाती रहेंगी। धरने के दौरान उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के साथ इस तरह का व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री पर लगाया झूठ बोलने का आरोप
विधायक ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने सदन में इस मामले को लेकर सही जानकारी नहीं दी और सच्चाई को छिपाने की कोशिश की। रागिनी सिंह ने कहा कि अगर सरकार पारदर्शिता से काम करती है तो इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
निजी अस्पतालों पर सख्त नियम बनाने की मांग
भाजपा विधायक ने राज्य सरकार से मांग की कि झारखंड में निजी अस्पतालों के लिए स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि कई बार निजी अस्पताल मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक दबाव बनाते हैं। इसलिए सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में शव या मरीज को पैसे के कारण बंधक न बनाया जा सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है और कार्रवाई की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो आने वाले समय में निजी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर नए नियम भी बन सकते हैं।






