झारखंड में वेतन घोटाला! 14 ट्रेजरी से 31.47 करोड़ की फर्जी निकासी, सिपाही से DSP तक ने महीने में दो बार उठाई सैलरी
झारखंड के 33 में से 14 ट्रेजरी में वेतन घोटाले की पुष्टि हुई है। 614 कर्मचारियों ने एक ही महीने में दो बार वेतन लिया। सिपाही से लेकर DSP तक शामिल, कुल 31.47 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी सामने आई।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सरकारी वेतन भुगतान प्रणाली में बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य की 33 ट्रेजरी में से अब तक 14 ट्रेजरी में वेतन मद में फर्जी निकासी की पुष्टि हुई है। महालेखाकार (AG) की जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिस विभाग में सिपाही से लेकर DSP स्तर तक के अधिकारियों ने एक ही महीने में दो बार वेतन लिया। इतना ही नहीं, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है।
यह भी पढ़ें: न सड़क, न हेलीकॉप्टर... सिर्फ आस्था के सहारे होती थी केदारनाथ यात्रा, आनंद महिंद्रा ने शेयर की 1882 की दुर्लभ तस्वीर
महालेखाकार ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर इस वित्तीय अनियमितता की गंभीर जानकारी दी है। अब तक की जांच में कुल 31 करोड़ 47 लाख 46 हजार 877 रुपये की संदिग्ध निकासी सामने आई है।
614 कर्मचारियों ने एक महीने में दो बार लिया वेतन
जांच रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2021 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 614 सरकारी कर्मचारियों ने एक ही महीने का वेतन दो बार लिया। इनमें सिपाही, ASI, DSP, सहायक शिक्षक, चपरासी समेत कई कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों को दोबारा वेतन देने में 7.67 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निकासी की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी 614 कर्मचारियों को दोबारा वेतन देने का काम एक ही DDO (Drawing and Disbursing Officer) द्वारा किया गया।
DSP से लेकर सिपाही तक शामिल
महालेखाकार की रिपोर्ट में कई पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने एक महीने का वेतन दो बार लिया।
इनमें प्रमुख नाम हैं—
DSP नौशाद आलम
DSP राजेश यादव
DSP मणिभूषण प्रसाद
DSP मुकेश कुमार महतो
सिपाही राकेश कुमार चौधरी
सिपाही अशोक संजय
सिपाही चंदन कुमार तिवारी
सिपाही अरविंद यादव
सिपाही शंकर राम
सिपाही सुरेंद्र कुमार राम
पलामू SP कार्यालय में जनवरी 2024 से 2025 के बीच 10 लोगों ने दो बार वेतन लिया, जिनमें 6 सिपाही और 4 DSP शामिल हैं। इन्हें कुल 5.15 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया गया।
गुमला और सरायकेला में फर्जी Payee ID से निकासी
गुमला ट्रेजरी से लगनू उरांव के नाम पर जनवरी 2024 से नवंबर 2024 तक 29.39 लाख रुपये निकाले गए। यह राशि पालकोट रोड, गुमला स्थित SBI खाते में ट्रांसफर की गई। इसी तरह सरायकेला ट्रेजरी से तुलसी सोय के नाम पर जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 तक 21.22 लाख रुपये निकाले गए। दोनों मामलों में जांच में पाया गया कि निकासी के लिए दो-दो अलग-अलग Payee ID का इस्तेमाल किया गया था, जिससे फर्जी भुगतान का संदेह और गहरा हो गया है।
शिक्षक, ASI और चपरासी भी जांच के घेरे में
दुमका में पदस्थापित सहायक शिक्षक शैलजा नंद झा ने अगस्त 2023, सितंबर 2023 और जनवरी 2024 से मार्च 2024 तक का वेतन दो बार लिया। पहली बार 3.64 लाख रुपये जुलाई 2024 में निकाले गए, जबकि दूसरी बार दिसंबर 2024 में उसी अवधि का भुगतान फिर किया गया। इसी तरह—
ASI राजेश कुमार ने अक्टूबर 2024 का वेतन दो बार लिया
चपरासी अन्नु कुमारी ने जुलाई 2024 का वेतन दो बार लिया
इस मामले में जिला कल्याण पदाधिकारी DDO थे।
14 ट्रेजरी से फर्जी निकासी का पूरा ब्योरा
ट्रेजरी राशि
हजारीबाग 19.34 करोड़
बोकारो 5.12 करोड़
रांची 1.67 करोड़
देवघर 1.59 करोड़
पलामू 1.11 करोड़
गोड्डा 48.60 लाख
जमशेदपुर 38.92 लाख
तेनुघाट 35.11 लाख
गुमला 28.39 लाख
चाईबासा 26.21 लाख
महेशपुर 24.25 लाख
खूंटी 22.45 लाख
सरायकेला 21.22 लाख
रामगढ़ 17.37 लाख
14 कोषागारों से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी
एजी की ऑडिट रिपोर्ट में आया है, जिसमें 14 जिलों के कोषागारों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी उजागर हुई है। इतना ही नहीं, जालसाजों ने संबंधित जिले के एसपी के नाम पर भी खाता खोलकर उस खाते से अवैध निकासी की है। उस खाते में अवैध तरीके से केवल अवैध वेतन की निकासी ही नहीं हुई है, बल्कि जिला पुलिस में विभिन्न डेवलपमेंट मद में एसपी के नाम से आई राशि की भी निकासी कर ली गई और वह पकड़ में नहीं आया।
एजी की रिपोर्ट के बाद वित्त विभाग ने भी पूरे मामले पर नजर रखे हुए है और उस रिपोर्ट का सत्यापन करवा रहा है। बताया जा हा है कि राज्य के 33 कोषागारों में से 14 कोषागारों से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। सैकड़ों पुलिसकर्मियों व अन्य सरकारी कर्मियों ने सिस्टम की तकनीकी खामियों का सहारा लेकर एक ही महीने में दो-दो बार वेतन व एरियर की निकासी कर ली है।
रिपोर्ट के अनुसार फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने से कुल 31.47 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई है, जिसमें दो-दो बार वेतन भुगतान से 7.67 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। जिन्होंने दोहरे वेतन भुगतान का लाभ लिया है, उनमें डीएसपी स्तर के अधिकारी नौशाद आलम, मणिभूषण प्रसाद, राजेश यादव, मुकेश कुमार महतो भी शामिल हैं।
614 कर्मियों-पदाधिकारियों ने खेल को अंजाम दिया
एजी की रिपोर्ट में जिन 14 जिलों में गड़बड़ी उजागर हुई है, उनमें हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, तेनुघाट, गुमला, चाईबासा, महेशपुर, खूंटी, सरायकेला और रामगढ़ शामिल हैं। ऑडिट के अनुसार कुल 614 कर्मियों-पदाधिकारियों ने इस पूरे खेल को अंजाम दिया है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
महालेखाकार की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। IFMS (Integrated Financial Management System) और पेमेंट मॉड्यूल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस सिस्टम की गहन जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला और भी बड़ा रूप ले सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?






