• चंद्रयान-3 ने शनिवार को चांद की कक्षा में किया था प्रवेश

बेंगलुरु। Chandrayaan-3 शनिवार को चांद की कक्षा में प्रवेश किया था। Chandrayaan-3 को चंद्रमा की कक्षा  में प्रवेश करने के एक दिन बाद रविवार को  ISRO ने चांद का 'चंद्रयान-3 द्वारा देखा गया' वीडियो जारी किया।

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इसरो ने वीडियो को कैप्शन के साथ डाला, 'चंद्रयान -3 मिशन: चंद्रमा, जैसा कि चंद्रयान-3 द्वारा चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश के दौरान देखा गया।' वीडियो में चंद्रमा को नीले हरे रंग में कई गड्ढों के साथ दिखाया गया है। इसरो ने कहा है कि इसने चंद्रमा की कक्षा के अंदर चंद्रयान-3 को उसके और नजदीक पहुंचाने की कवायद सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इंजनों की रेट्रोफायरिंग ने यान को चंद्रमा की सतह के करीब ला दिया है, जो अब 170 किमी x 4313 किमी है। कक्षा को और कम करने का अगला ऑपरेशन नौ अगस्त को दोपहर एक से दो बजे के बीच निर्धारित है।

चंद्रयान-3 को 22 दिन पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिए प्रक्षेपित किया गया था। चंद्रयान-3 को बिना गड़बड़ी के चंद्रमा के करीब लानेवाली प्रक्रिया बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष इकाई से पूरी हुई। इसके बाद चंद्रयान-3 ने इसरो को संदेश भेजा, 'मैं चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महसूस कर रहा हूं।'  चंद्रयान का चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के महत्वाकांक्षी 600 करोड़ रुपयेके मिशन में बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। 14 जुलाई को प्रक्षेपित होने के बाद सेअंतरिक्ष यान ने चंद्रमा की लगभग दो-तिहाई दूरी तय कर ली है। अगले 18 दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इसरो ने
उपग्रह से मिले संदेश को अपने केंद्रों के साथ शेयर किया, जिसमें लिखा था, 'एमओएक्स, इस्ट्रैक, यह चंद्रयान-3 है। मैं चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महसूस कर रहा हूं।' संदेश में कहा गया, 'चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा मेंस्थापित हो गया है। मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), आईएसटीआरएसी (इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंडएं कमांड नेटवर्क), बेंगलुरु से इसे निर्देशित किया गया।'

इसरो ने कहा कि अगला अभियान कार्य रविवार रात 11 बजे किया जायेगा। इसके तहत चंद्रयान-3 की कक्षा को घटाया जायेगा। 14 जुलाई को प्रक्षेपण के बाद सेतीन हफ्तों में इसरो चंद्रयान-3 को पृथ्वी सेदूर चंद्रमा की कक्षा की तरफ उठाने का कार्यकर रहा था। इसके बाद एक अगस्त को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया में यान को पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा की ओर सफलतापूर्वक भेजा गया।