Jharkhand: सारंडा जंगल में ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ जारी, सुरक्षा बलों ने 36 घंटे में 16 माओवादियों को किया ढेर
सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन। 36 घंटे में 16 माओवादी ढेर, कुख्यात अनल दा भी मारा गया। ऑपरेशन मेगाबुरु से झारखंड में नक्सलवाद को करारा झटका।
HighLights
- कुख्यात पतिराम मांझी उर्फ अनल दा समेत कई बड़े नक्सली मारे गये
- ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ के तहत 1,000 से अधिक जवानों की तैनाती
- 13 माओवादियों की पहचान, शेष की प्रक्रिया जारी
- सारंडा में निर्णायक कार्रवाई, नक्सलियों का आखिरी गढ़ टूटा
चाईबासा/रांची।(Threesocieties.com Desk)। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में एक और माओवादी ढेर कर दिया गया है। इलाके में 36 घंटे से अधिक समय तक चले ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ के तहत अब तक कुल 16 माओवादी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, जिनमें कई कुख्यात और करोड़ों के इनामी नक्सली शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: धनबाद : बीसीसीएल अधिकारियों व मजदूरों पर देवप्रभा आउटसोर्सिंग समर्थकों का जानलेवा हमला, 12 घायल
घने जंगलों में चल रही इस भीषण मुठभेड़ में कोबरा बटालियन-209, झारखंड पुलिस, CRPF और अन्य सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। राहत की बात यह रही कि इस अभियान में किसी भी सुरक्षाकर्मी के हताहत होने की सूचना नहीं है। ह ऑपरेशन केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सारंडा झारखंड में नक्सलियों का आखिरी प्रमुख गढ़ था, जहां अब उनकी ताकत काफी कमजोर हो गई है।
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया सूचना मिली थी कि सारंडा क्षेत्र में करीब 60–65 माओवादियों का सक्रिय दस्ता मौजूद है, जिसका नेतृत्व पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर कर रहा है। इसी इनपुट के आधार पर गुरुवार सुबह अभियान शुरू किया गया।मुठभेड़ के दौरान कुख्यात माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा उर्फ तूफान दा के दस्ते को घेर लिया गया। घंटों चली गोलीबारी में पहले 15 और बाद में एक और माओवादी को मार गिराया गया, जिससे कुल संख्या 16 हो गई।
मारे गए बड़े माओवादी नेताओं में शामिल
अनल उर्फ पतिराम मांझी – CPI (माओवादी) सेंट्रल कमेटी सदस्य
झारखंड में ₹1 करोड़, ओडिशा में ₹1.20 करोड़ और NIA का इनामी
अनमोल उर्फ सुशांत – स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य
अमित मुंडा – रीजनल कमेटी सदस्य
पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लल्लू – सब जोनल कमांडर
कुल 16 में से 5 महिलाएं भी शामिल, 13 की पहचान पूरी
इन माओवादियों पर कुल मिलाकर करीब 3.97 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
अब भी जारी है सर्च ऑपरेशन
मुठभेड़ के बाद भी पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कुछ माओवादी घायल अवस्था में जंगल में छिपे हो सकते हैं। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाकर पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
अमित शाह का बड़ा बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अभियान को बड़ी जीत बताते हुए कहा— “दशकों से भय का पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले पूरी तरह समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं। बचे हुए नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें।”
क्यों खास है ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’
झारखंड पुलिस और CRPF का अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान
सारंडा, जिसे नक्सलियों का अंतिम मजबूत गढ़ माना जाता था
केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत लक्ष्य से पहले बड़ी कामयाबी
ऐसे पड़ा ऑपरेशन मेगाबुरु का नाम
इस अभियान का नाम इलाके के नाम से रखा गया। जहां यह अभियान चला, उस जगह का नाम मेघाहातूबुरू है। सुरक्षा बलों ने इसे अंग्रेजी और हिंदी के संयोजन से ‘मेगाबुरु’ नाम दिया। मेगा का मतलब है बड़ा बुरु का मतलब है पहाड़ इस प्रकार, मेगाबुरु का अर्थ हुआ- बड़े पहाड़ पर चलने वाला अभियान। यह अभियान झारखंड में माओवादी खात्मे के इतिहास में सबसे बड़ा और निर्णायक माना जा रहा है।






