रेयर अर्थ टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम: IIT(ISM) धनबाद और रूस मिलकर बनाएंगे भविष्य की खनिज तकनीक

IIT(ISM) धनबाद के टेक्समिन फाउंडेशन और रूस के रोसाटॉम-गिरेडमेट के बीच रेयर अर्थ टेक्नोलॉजी, लिथियम बैटरी रीसाइक्लिंग और क्रिटिकल मिनरल्स रिसर्च को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत और खनिज क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

रेयर अर्थ टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम: IIT(ISM) धनबाद और रूस मिलकर बनाएंगे भविष्य की खनिज तकनीक
धनबाद से ग्लोबल टेक्नोलॉजी मिशन।

          HighLights        

  • IIT(ISM) और रूस के बीच रेयर अर्थ व क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा सहयोग समझौता
  • लिथियम-आयन बैटरियों की रीसाइक्लिंग से कोबाल्ट, निकेल और लिथियम रिकवरी पर फोकस
  • AI और डिजिटल ट्विन तकनीक आधारित स्मार्ट प्रोसेसिंग प्लांट विकसित होंगे
  • आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती देने के लिए संयुक्त रिसर्च और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
  • पुराने खनन डंप और लो-ग्रेड अयस्कों से महत्वपूर्ण खनिज निकालने पर काम

धनबाद (Threesocieties.com Desk): दुनिया भर में रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी) धातुओं और क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच IIT(ISM) धनबाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी साझेदारी की है। IIT(ISM) के टेक्समिन फाउंडेशन और रूस के रोसाटॉम तथा गिरेडमेट के बीच हुए समझौते को भारत के खनिज और तकनीकी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सहयोग रेयर अर्थ टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल्स और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट को नई गति देगा।

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ऊर्जा परिवर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यह समझौता भारत के लिए भविष्य की तकनीकों को विकसित करने और खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

लिथियम बैटरियों की रीसाइक्लिंग पर रहेगा फोकस

समझौते के तहत लिथियम-आयन बैटरियों की रीसाइक्लिंग के लिए हाइड्रोमेटलर्जिकल तकनीकों पर काम किया जाएगा। इसके माध्यम से कोबाल्ट, निकेल और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक विकसित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैटरी उद्योग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर को भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है।

पुराने खनन डंप और कम ग्रेड अयस्कों से निकाले जाएंगे महत्वपूर्ण खनिज

इस साझेदारी के तहत पुराने खदानों के कचरे, अपशिष्ट पदार्थों और निम्न श्रेणी के अयस्कों से भी महत्वपूर्ण खनिज निकालने की तकनीकों का विकास किया जाएगा। इससे ऐसे संसाधनों का उपयोग संभव होगा जिन्हें अब तक आर्थिक रूप से उपयोगी नहीं माना जाता था।

AI आधारित स्मार्ट प्रोसेसिंग प्लांट होंगे विकसित

समझौते में डिजिटल ट्विन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और सेंसर आधारित तकनीकों को शामिल करते हुए स्मार्ट प्रोसेसिंग प्लांट विकसित करने की योजना भी शामिल है। इससे खनिज प्रसंस्करण को अधिक कुशल, सुरक्षित और आर्थिक बनाया जा सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत मिशन को मिलेगा बल

IIT(ISM) के उप निदेशक और टेक्समिन के परियोजना निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने कहा कि यह समझौता व्यापक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का ढांचा तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट, एडवांस्ड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंटीग्रेशन के जरिए उद्योगों के लिए तैयार समाधान विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) और रूस की दुर्लभ धातु उद्योग विकास परियोजनाओं के अनुरूप है।

किन क्षेत्रों में होगा संयुक्त अनुसंधान

इस सहयोग के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा:

• NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट तकनीक का विकास
• लिथियम-आयन बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी
• पुराने खनन डंप और कम ग्रेड अयस्कों से खनिज निकालने की तकनीक
• रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी आधारित टेक्नोलॉजी वैलिडेशन
• संयुक्त पीएचडी रिसर्च और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान
• डिजिटल ट्विन आधारित स्मार्ट प्रोसेसिंग प्लांट विकास
• एडवांस्ड मैटेरियल्स और संयुक्त R&D को मजबूत करना

खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल रिसर्च तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत को रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारत के खनन, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।