ममता बनर्जी को बड़ा झटका! TMC के 12 सांसद BJP के संपर्क में, बंगाल की राजनीति में भूचाल

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ी टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि TMC के 12 से 18 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट Threesocieties.com पर।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! TMC के 12 सांसद BJP के संपर्क में, बंगाल की राजनीति में भूचाल
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)।
  • TMC में ‘ऑपरेशन लोटस’ की आहट? 18 सांसदों के BJP में जाने की चर्चा से मचा हड़कंप
  •  ममता के करीबी सांसद भी छोड़ सकते हैं साथ, BJP की बढ़ सकती है ताकत
  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद सांसदों-विधायकों की नाराजगी
  • सांसदों के दल-बदल की चर्चा से बंगाल की राजनीति गरमाई

कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान उठता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं और जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं।

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सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से करीब 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी में हैं। इतना ही नहीं, 5 से 6 अन्य सांसदों से भी बातचीत जारी होने की खबर है। अगर यह संख्या बढ़कर 19-20 तक पहुंचती है तो दल-बदल विरोधी कानून से बचने का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि अभी तक इन दावों की किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ममता और अभिषेक के लिए बढ़ी चिंता

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं, उनमें कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं जिन्हें ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। यही कारण है कि इन अटकलों ने TMC नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक ढांचे, रणनीति और आइपैक की भूमिका को लेकर असंतोष बढ़ा है। कई नेता मानते हैं कि जमीनी राजनीति से दूरी और संगठन में सीमित लोगों की पकड़ के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

विधायकों और पार्षदों की बढ़ती नाराजगी

20 मई को चुनावी हार के बाद TMC द्वारा आयोजित प्रदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि 80 में से केवल 35 विधायक ही कार्यक्रम में पहुंचे। इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चाएं और तेज हो गईं। दूसरी ओर, डायमंड हार्बर नगर पालिका में TMC के आठ पार्षदों ने इस्तीफा देकर पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह वही इलाका माना जाता है जिसे अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

BJP की बढ़ सकती है ताकत

लोकसभा में भाजपा के पास फिलहाल 240 सांसद हैं और केंद्र सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में यदि TMC के सांसद बड़ी संख्या में भाजपा के साथ आते हैं, तो भाजपा की संसदीय ताकत और मजबूत हो सकती है।

सूत्रों का दावा है कि भाजपा की नजर केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यसभा में भी TMC सांसदों को साधने की कोशिशें जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बंगाल में TMC कमजोर होती है, तो भाजपा को राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का बड़ा अवसर मिल सकता है।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक से बढ़ीं अटकलें

राजनीतिक हलचल उस समय और तेज हो गई जब TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक बैठक में शामिल होने पहुंचीं। कल्याणी विश्वविद्यालय के एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस बैठक में कई अन्य विधायक भी मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि “प्रशासन सबका होता है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया। काकोली घोष दस्तीदार पहले ही लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाई जा चुकी हैं और उन्होंने बारासात जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था। ऐसे में उनके भाजपा में जाने की अटकलों को और बल मिल रहा है।

मॉनसून सत्र तक साफ हो सकती है तस्वीर

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सांसदों की संख्या और रणनीति को लेकर लगातार बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि संसद के मॉनसून सत्र तक स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि TMC नेतृत्व लगातार इन अटकलों को नियंत्रित करने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन लगातार बढ़ती चर्चाओं और नेताओं की नाराजगी ने बंगाल की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वास्तव में TMC में इतनी बड़ी टूट होगी या फिर यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।