9 साल तक जोड़े ₹10 के सिक्के, फिर खरीद ली ₹1.10 लाख की बाइक; सिक्के गिनते-गिनते शोरूम स्टाफ भी थक गया
तेलंगाना के कोन्डे राघुपति ने 9 साल तक ₹10 के सिक्के जमा कर ₹1.10 लाख की Hero Splendor Plus बाइक खरीदी। शोरूम में सिक्के गिनने में पांच कर्मचारियों को चार घंटे लगे। जानिए पूरी प्रेरणादायक कहानी।
HighLights:
- 9 साल तक ₹10 के सिक्के जमा कर खरीदी ₹1.10 लाख की बाइक
- तेलंगाना के वेलिमिनेडु गांव के रहने वाले हैं कोन्डे राघुपति
- शोरूम स्टाफ को सिक्के गिनने में लगे करीब चार घंटे
- पांच कर्मचारियों ने मिलकर पूरी राशि का किया सत्यापन
- सोशल मीडिया पर वायरल हुई परिवार की मेहनत और बचत की कहानी
हैदराबाद (Threesocieties.com Desk): कहते हैं कि बड़ी मंजिल तक पहुंचने के लिए छोटे.छोटे कदम ही सबसे मजबूत आधार बनते हैं। तेलंगाना के एक साधारण परिवार ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया। राज्य के नलगोंडा जिले के चित्याला मंडल स्थित वेलिमिनेडु गांव के निवासी कोन्डे राघुपति ने लगातार 9 वर्षों तक ₹10 के सिक्के जमा किए और आखिरकार इन्हीं सिक्कों से ₹1.10 लाख की नई Hero Splendor Plus बाइक खरीदकर सबको हैरान कर दिया।
यह भी पढ़ें:पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ Breath Analyzer रिपोर्ट पर नहीं छीन सकते नौकरी, ASI की बर्खास्तगी रद्द
राघुपति की यह अनोखी कहानी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग उनकी मेहनत धैर्य और बचत की आदत की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
2017 से शुरू हुई थी बचत की अनोखी यात्रा
राघुपति ने वर्ष 2017 में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मिलकर ₹10 के सिक्के जमा करने का फैसला किया था। परिवार का सपना था कि एक दिन अपनी मेहनत की कमाई और छोटी.छोटी बचत से नई मोटरसाइकिल खरीदी जायेगी। हर बार जब भी उनके पास ₹10 का सिक्का आता, वह उसे खर्च करने के बजाय अलग रख देते। देखते ही देखते वर्षों में सिक्कों का बड़ा संग्रह तैयार हो गया।
अफवाहों के बावजूद नहीं छोड़ी बचत
देश के कई हिस्सों में समय.समय पर यह अफवाह फैलती रही कि ₹10 के सिक्के मान्य नहीं हैं। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक कई बार स्पष्ट कर चुका है कि ₹10 के सभी वैध सिक्के लीगल टेंडर हैं और उन्हें लेने से इनकार नहीं किया जा सकता। इन अफवाहों के बावजूद राघुपति और उनके परिवार ने सिक्के जमा करना बंद नहीं किया। उनका विश्वास और धैर्य आखिरकार रंग लाया।
शोरूम पहुंचीं सिक्कों से भरी थैलियां
जब बाइक खरीदने का समय आया तो राघुपति सिक्कों से भरी कई थैलियां लेकर तेलंगाना के श्री विनायक मोटर्स शोरूम पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारी और अन्य ग्राहक यह देखकर हैरान रह गए कि पूरी कीमत ₹10 के सिक्कों में चुकाई जायेगी। चार घंटे तक चली गिनतीसिक्कों की संख्या इतनी अधिक थी कि शोरूम के पांच कर्मचारियों को मिलकर उनकी गिनती और सत्यापन करना पड़ा। पूरी प्रक्रिया में करीब चार घंटे का समय लगा। हालांकि इसमें समय जरूर लगाए लेकिन शोरूम प्रबंधन ने परिवार के संकल्प और ईमानदार बचत का सम्मान करते हुए पूरे धैर्य के साथ सिक्के स्वीकार किए।
पहले ही दे दी थी सूचना
शोरूम के मालिक उप्पु माधु ने बताया कि राघुपति ने पहले ही जानकारी दे दी थी कि वह सिक्कों से भुगतान करेंगे। शुरुआत में कर्मचारियों को समय लगने की चिंता थीए लेकिन जब उन्हें परिवार की वर्षों की मेहनत और सपना पता चला तो सभी ने खुशी.खुशी सहयोग किया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ
यह अनोखी घटना देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। हजारों लोग इस परिवार की किफायतए अनुशासन और बचत की आदत की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया है कि छोटी.छोटी बचत भी समय के साथ बड़े सपनों को साकार कर सकती है।
छोटी बचतए बड़ा संदेश
राघुपति की कहानी सिर्फ एक बाइक खरीदने की नहीं हैए बल्कि यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और धैर्य बनाए रखा जाए तो छोटी.सी बचत भी भविष्य में बड़ी उपलब्धि बन सकती है। साथ ही यह घटना लोगों को यह भी याद दिलाती है कि ₹10 के सिक्के पूरी तरह वैध मुद्रा हैं और उन्हें स्वीकार करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।






