JPSC Exam में बड़ी लापरवाही! ‘पुस्तक’ से ‘सिदो-कान्हू’ तक गलत, प्रश्नपत्र की गलतियां सोशल मीडिया पर वायरल

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में भारी भाषाई गलतियां सामने आई हैं। ‘पुस्तक’ से लेकर ‘सिदो-कान्हू’ तक के नामों में त्रुटि ने आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

JPSC Exam में बड़ी लापरवाही! ‘पुस्तक’ से ‘सिदो-कान्हू’ तक गलत, प्रश्नपत्र की गलतियां सोशल मीडिया पर वायरल
झारखंड लोक सेवा आयोग (फाइल फोटो)।
  • JPSC के प्रश्नपत्र में भारी गड़बड़ी
  • ‘पुस्तक’ भी नहीं लिख पाए सही!

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला सहायक वन संरक्षक (Assistant Conservator) मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र से जुड़ा है, जिसमें भाषाई और शाब्दिक अशुद्धियों की भरमार सामने आई है।

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6 अप्रैल को आयोजित इस परीक्षा के प्रश्नपत्र में इतनी गलतियां पाई गईं कि अब यह सोशल मीडिया पर चर्चा और मजाक का विषय बन गया है।

 ‘पुस्तक’ से ‘सिदो-कान्हू’ तक गलतियां

प्रश्नपत्र में सामान्य शब्दों तक को गलत लिखा गया। उदाहरण के तौर पर—

‘पुस्तक’ को ‘पुस्तख’
‘सिदो-कान्हू’ को ‘सिडो कान्हू’
‘महत्वपूर्ण’ को ‘महत्वपूर्न’
‘गठन’ को ‘गढन’
‘धारणाओं’ को ‘धरनाओं’

इतना ही नहीं, कई जगहों पर शब्दों की स्थिति ऐसी थी कि यह गलती किसी छोटे बच्चे से भी होने की संभावना कम लगती है।

 लगभग हर सवाल में त्रुटि, जांच प्रक्रिया पर सवाल

प्रश्नपत्र के लगभग हर प्रश्न में कोई न कोई गलती देखने को मिली।

‘टिप्पणी’ को ‘रिप्पणी’
‘समुदाय’ को ‘समुदाथ’
‘बुद्धिमता’ को ‘नुद्धिमता’
‘निर्माण’ को ‘निर्मान’
‘चर्चा कीजिए’ को ‘चर्च कीजिए’

यह स्थिति साफ दर्शाती है कि प्रश्नपत्र तैयार करने के बाद उसकी ठीक से जांच (Proofreading) नहीं की गई।

 सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

जैसे ही प्रश्नपत्र की कॉपी इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुई, लोगों ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे “इतिहास की सबसे खराब क्वालिटी का प्रश्नपत्र” तक करार दिया।

 आयोग की साख पर सवाल

यह वही आयोग है जो राज्य में सिविल सेवा और अन्य राजपत्रित पदों के लिए परीक्षा आयोजित करता है। ऐसे में इस स्तर की लापरवाही ने JPSC की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह भी है कि— अंग्रेजी के प्रश्नों में ज्यादा गलती नहीं थी, लेकिन हिंदी सेक्शन में रिकॉर्ड स्तर की अशुद्धियां मिलीं।

क्या होगी कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? क्या इस परीक्षा को लेकर कोई पुनर्विचार किया जाएगा? फिलहाल JPSC की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

निष्कर्ष

JPSC जैसी संवेदनशील परीक्षा में इस तरह की गलतियां न केवल अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हैं, बल्कि यह पूरे परीक्षा सिस्टम की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती हैं। अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।