नेपाल सरकार का बड़ा फैसला: अब नेपाल जाना हुआ मुश्किल! बिना ID बॉर्डर पार नहीं, बच्चों पर भी सख्ती

नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। अब नेपाल में प्रवेश के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया गया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी जरूरी होगी। सीमा पर एसएसबी और नेपाल एपीएफ की सख्त जांच से यात्रियों और मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नेपाल सरकार का बड़ा फैसला: अब नेपाल जाना हुआ मुश्किल! बिना ID बॉर्डर पार नहीं, बच्चों पर भी सख्ती
घुसपैठ रोकने के लिए नेपाल ने सीमा पर बढ़ाई सख्ती।
  • आधार-पासपोर्ट जरूरी, बिना कागज लौटाए जा रहे लोग
  • मजदूरों और यात्रियों की बढ़ी परेशानी
  • बालेन सरकार का एक और बड़ा फैसला
  • बच्चों के लिए भी नए नियम लागू

पटना (Threesocieties.com Desk ): भारत-नेपाल सीमा पर अब पहले जैसी आसानी से आवाजाही संभव नहीं होगी। नेपाल प्रशासन ने सीमा सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाते हुए भारत से नेपाल जाने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है। अब बिना आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट के किसी को भी नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। सीमा पर हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है और जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें वापस लौटाया जा रहा है।

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नेपाल प्रशासन के इस फैसले का असर बिहार के अररिया जिले से सटे इंडो-नेपाल बॉर्डर पर साफ दिखाई देने लगा है। सिकटी, कुर्साकांटा, मेघा-मायागंज और सुनवार्षि बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। सीमा पर एसएसबी, नेपाल पुलिस और नेपाल एपीएफ के जवान लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

बच्चों के लिए भी नया नियम लागू

नेपाल प्रशासन ने बच्चों के लिए भी नया नियम लागू किया है। अब 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नेपाल में प्रवेश के दौरान जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

अवैध घुसपैठ रोकने के लिए बढ़ाई गई सख्ती

सूत्रों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नेपाल सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं और वहां अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की गतिविधियों को देखते हुए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा सतर्क हो गई हैं।सोनामनी गोदाम से आमबारी तक करीब 38 किलोमीटर लंबी सीमा पर नेपाल प्रशासन के निर्देश के बाद सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। बॉर्डर पर आने-जाने वाले हर व्यक्ति के पहचान पत्र की जांच की जा रही है।

बॉर्डर पर लगी लंबी कतारें

नेपाल प्रशासन के अचानक सख्त रवैये के कारण बॉर्डर पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। नेपाल जाने वाले बाइक सवारों और मजदूरों को जांच प्रक्रिया के कारण काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई लोग ऐसे भी मिले जिनके पास पहचान पत्र नहीं था, उन्हें सीमा से ही वापस लौटना पड़ा। नेपाल में रोजाना मजदूरी करने वाले भारतीय श्रमिकों को भी इस नई व्यवस्था से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अचानक बढ़ी जांच और दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण कई लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।

दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नेपाल एपीएफ के अधिकारियों जी कटवाल और एसएस ठाकुर ने बताया कि यह नियम सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि नेपाल और अन्य देशों के लोगों पर भी लागू है। आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वहीं, एसएसबी अररिया के कार्यवाहक कमांडेंट पीएन सिंह ने कहा कि भारतीय सीमा पर भी हर आने-जाने वाले व्यक्ति के पहचान पत्र की जांच की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नेपाल या भारत आने-जाने के दौरान हमेशा वैध पहचान पत्र साथ रखें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।