PMCH से डिस्चार्ज होते ही बेउर जेल भेजे गए सांसद पप्पू यादव, डॉक्टर बोले—भर्ती लायक नहीं मिली कोई गंभीर समस्या
सांसद पप्पू यादव को पीएमसीएच से डिस्चार्ज कर बेउर जेल भेज दिया गया। डॉक्टरों ने जांच में भर्ती लायक कोई गंभीर समस्या नहीं पाई। 1995 के पुराने मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है।
पटना (Threesocieties.com Desk)। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) से डिस्चार्ज कर रविवार शाम बेउर जेल भेज दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद उन्हें भर्ती के योग्य नहीं पाया और ओपीडी स्तर पर इलाज की सलाह देते हुए अस्पताल से छुट्टी दे दी।
यह भी पढ़ें: “बांग्लादेश में अब भी1.25 करोड़ हिंदू, एकजुट हों तो बदल सकती है तस्वीर”: मोहन भागवत
पप्पू यादव को पीठ दर्द और हृदय संबंधी शिकायत के बाद शनिवार शाम पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। उन्हें कैदी वार्ड में रखकर विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जांच की। अस्पताल प्रशासन के अनुसार कार्डियोलॉजी, पीएमआर, यूरोलॉजी और सीटीवीएस विभाग के विशेषज्ञों ने जांच के बाद पाया कि उनकी स्थिति गंभीर नहीं है और उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं है।
31 साल पुराने मामले में हुई गिरफ्तारी
सांसद पप्पू यादव को 1995 के एक पुराने आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया था। गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/95 में अदालत ने उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया था। अदालत द्वारा पहले गिरफ्तारी वारंट और इश्तिहार भी जारी किया जा चुका था।
शुक्रवार रात पटना के मंदिरी स्थित आवास से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद शनिवार को उन्हें एमपी-एमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां विशेष न्यायाधीश ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जेल मैनुअल के तहत इलाज के लिए पीएमसीएच भेजने का आदेश दिया था।
जेल अस्पताल में किया गया शिफ्ट
पीएमसीएच से डिस्चार्ज होने के बाद जिला प्रशासन की निगरानी में पप्पू यादव को बेउर जेल ले जाया गया, जहां उन्हें जेल अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 21 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
क्या है मामला
यह मामला शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के मोहनपुर पुनाईचक स्थित मकान को कथित रूप से धोखाधड़ी कर किराये पर लेने और धमकी देने से जुड़ा है। सूचक विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि मकान कब्जा करने और कार्यालय चलाने के उद्देश्य से झूठी जानकारी देकर मकान लिया गया था। इस मामले में आईपीसी की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120 (बी) के तहत केस दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी के दौरान आवास के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी और पुलिस के साथ हल्की नोकझोंक भी हुई थी। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में सांसद समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ एक अलग प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।






